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दशहरे पर रावण दहन के साथ जलेबी और इमरती खाने का भी खास चलन है. आखिर इस दिन ये मिठाइयां खाने की परंपरा कैसे शुरू हुई और इसका भगवान श्रीराम से क्या संबंध है, जानिए…
श्रीराम को शशकुली नाम की मिठाई पसंद थी. (Photo- AI)
आज पूरे देश में दशहरे का पर्व मनाया जा रहा है. लोग रावण दहन देखने के लिए मेले में जमा होंगे. इसके अलावा खाने-पीने की भी परंपरा को फॉलो करेंगे. इस त्योहार में देश के कई हिस्सों में जलेबी और इमरती खाने की परंपरा है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दशहरे पर खास तौर पर जलेबी और इमरती ही क्यों खाई जाती हैं? इसके पीछे धार्मिक मान्यताएं हैं या पुरानी परंपराएं, जानें इस त्योहार से जुड़ी कई बातें…
दशहरे पर जलेबी खाने को लेकर एक लोकप्रिय मान्यता भगवान श्रीराम से जुड़ी है. कहा जाता है कि श्रीराम को शशकुली नाम की मिठाई पसंद थी, जिसे जलेबी का पुराना रूप माना जाता है. मान्यता के अनुसार, रावण पर विजय के बाद मिठाई खाकर खुशी मनाने की परंपरा से जलेबी का संबंध जोड़ा जाता है. हालांकि, इस कहानी को प्रमाणित ऐतिहासिक तथ्य के बजाय धार्मिक मान्यता और लोककथा के रूप में ही देखना चाहिए.
दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. ऐसे में इस दिन मीठा खाना खुशी जाहिर करने और एक-दूसरे का मुंह मीठा कराने का तरीका भी बन गया. यही वजह है कि कई परिवारों में रावण दहन के बाद घर लौटते समय जलेबी खरीदने की परंपरा आज भी देखने को मिलती है.
इमरती का दशहरे से क्या है संबंध?
इमरती भी भारत की लोकप्रिय पारंपरिक मिठाइयों में शामिल है. इसे आमतौर पर उड़द की दाल के घोल से बनाया जाता है और फिर चाशनी में डुबोया जाता है. इसका रंग, गोल आकार और जलेबी जैसी बनावट इसे खास बनाते हैं. जलेबी की तरह इमरती का भी कोई एक प्रमाणित दशहरा-विशेष धार्मिक इतिहास सामने नहीं आता. कई जगह इसे त्योहारों, मेलों और पारिवारिक समारोहों में पसंद किया जाता है. इसलिए दशहरे पर इमरती खाना स्थानीय खानपान और मिठाई की पसंद से जुड़ी परंपरा हो सकती है.
बदलते मौसम और त्योहार की खुशी से भी है नाता
दशहरा आमतौर पर सितंबर या अक्टूबर में आता है. इस दौरान कई इलाकों में मौसम गर्मी से हल्की ठंड की ओर बढ़ने लगता है. त्योहारों के समय बाजारों में ताजी मिठाइयों की दुकानें सजती हैं और मेले में लोग परिवार के साथ घूमने निकलते हैं. ऐसे माहौल में जलेबी और इमरती जैसी मिठाइयां उत्सव का हिस्सा बन जाती हैं. जलेबी को गरमागरम खाना कई लोगों को पसंद होता है, जबकि इमरती अपनी मोटी बनावट और चाशनी के स्वाद के लिए जानी जाती है.
देशभर में दशहरे की अलग-अलग परंपरा
भारत में दशहरा अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है. उत्तर भारत में रावण दहन और रामलीला का खास महत्व है, जबकि कई दूसरे क्षेत्रों में स्थानीय रीति-रिवाज और खानपान की परंपराएं अलग हैं. इसलिए हर जगह दशहरे पर जलेबी या इमरती खाना जरूरी नहीं है. जहां यह चलन है, वहां धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ स्थानीय स्वाद और पीढ़ियों से चली आ रही आदतों ने इसे बनाए रखा है.
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विविधा सिंह हिंदी डिजिटल पत्रकारिता का उभरता हुआ नाम हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया में साढ़े चार साल का अनुभव है. वर्तमान में वह News18 हिंदी में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह लाइफस्टाइल वर्टि…

