तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी3 मिनट पहले
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ईरान में राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने इस्तीफा दे दिया है। ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने देश के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह मोजतबा खामेनेई को अपना इस्तीफा भेज दिया है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पजशकियान ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि देश की सत्ता पर अब पूरी तरह इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडरों का कंट्रोल हो गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि फरवरी में अमेरिका और इजराइल के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से उनकी सरकार को अहम फैसलों की प्रक्रिया से लगभग अलग कर दिया गया है।
पजशकियान के मुताबिक, उनकी सरकार को बड़े फैसलों में शामिल नहीं किया जा रहा है और वास्तविक नियंत्रण सैन्य नेतृत्व के हाथों में चला गया है। अभी यह साफ नहीं है कि सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई उनका इस्तीफा स्वीकार करेंगे या नहीं।
हालांकि, फर्स्टपोस्ट के मुताबिक ईरानी राष्ट्रपति कार्यालय में संचार और सूचना प्रसार विभाग के डिप्टी चीफ सैयद मेहदी तबातबाई ने इस रिपोर्ट को खारिज किया है।

ईरान के राष्ट्रपति मसदू पजशकियान। वे जुलाई 2024 में राष्ट्रपति बने थे।
पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स…
- ब्यूफोर्ट किले पर इजराइल का कब्जा: इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान में 900 साल पुराने ब्यूफोर्ट किले और आसपास की पहाड़ियों पर कब्जा कर लिया। यह पिछले 26 साल में इजराइल की लेबनान में सबसे बड़ी घुसपैठ है।
- इमरजेंसी मीटिंग बुलाने की मांग: फ्रांस ने लेबनान में इजराइल की बढ़ती सैन्य कार्रवाई को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की है।
- ट्रम्प बोले- ईरानी सेना के खिलाफ सख्त एक्शन नहीं: ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका ने ईरानी सेना पर उतनी सख्त कार्रवाई नहीं की, जितनी वह दूसरे देशों की सेनाओं के खिलाफ करता रहा है।
- ईरान को अमेरिका पर भरोसा नहीं: ईरान ने कहा है कि जब तक यह भरोसा नहीं हो जाता कि उसके अधिकार पूरी तरह सुरक्षित हैं, तब तक अमेरिका के साथ किसी भी समझौते को मंजूरी नहीं दी जाएगी।
- अमेरिका ने ईरान जा रहे जहाज को रोका: अमेरिका ने ईरान की ओर जा रहे एक और मालवाहक जहाज को रोक दिया। 17 अप्रैल से अब तक अमेरिका 6 जहाजों को ईरान जाने से रोक चुका है।
ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
लाइव अपडेट्स
3 मिनट पहले
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हिजबुल्लाह का दावा- दक्षिणी लेबनान में इजराइली ड्रोन गिराया
हिजबुल्लाह ने दावा किया है कि उसने दक्षिणी लेबनान के पश्चिमी इलाके में इजराइल के हर्मीस 450 ड्रोन को मार गिराया है।
हर्मीस 450 इजराइल का निगरानी और हमले में इस्तेमाल होने वाला प्रमुख ड्रोन माना जाता है। हालांकि, इजराइली सेना की तरफ से अभी इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
हिजबुल्लाह ने यह भी दावा किया है कि उसके लड़ाकों ने दक्षिणी लेबनान के योहमोर अल-शकीफ कस्बे के पूर्वी बाहरी इलाके में मौजूद इजराइली सैनिकों पर बड़ी संख्या में रॉकेट और तोप के गोले दागे।
संगठन के मुताबिक, यह हमला स्थानीय समयानुसार रात 1 बजे किया गया।
22 मिनट पहले
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ईरान-अमेरिका के बीच 4 मुद्दों पर बातचीत हो रही
ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य इस्माइल कौसरी ने कहा कि ईरान, अमेरिका के साथ फिलहाल चार प्रमुख मुद्दों पर बातचीत कर रहा है।
इनमें शामिल हैं-
1. भविष्य में फिर से युद्ध न होने की गारंटी
2. युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा
3. अमेरिकी फोर्स की होर्मुज से वापसी
4. ईरान पर लगाए गए नौसैनिक प्रतिबंधों को हटाना
कौसरी ने यह भी दावा किया कि दुनिया के कई देशों ने होर्मुज पर ईरान के कंट्रोल को स्वीकार कर लिया है। हालांकि युद्ध खत्म करने को लेकर अमेरिका से किसी ठोस नतीजे की उम्मीद नहीं है।
कौसरी ने यह भी दावा किया कि परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा अब अमेरिका के साथ चल रही बातचीत के एजेंडे से हटा दिया गया है।

24 मिनट पहले
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फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र में इमरजेंसी मीटिंग बुलाने की मांग की
फ्रांस ने लेबनान में इजराइल की बढ़ती सैन्य कार्रवाई को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की है। यह मांग तब की गई जब इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के रणनीतिक ब्यूफोर्ट किले पर कब्जा कर लिया।
फ्रांस के विदेश मंत्री जां-नोएल बारो ने कहा कि फ्रांस इजराइल के आत्मरक्षा के अधिकार को मानता है, लेकिन लेबनान के भीतर लगातार सैन्य अभियान चलाना और वहां और गहराई तक कब्जा बढ़ाना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, मौजूदा हालात क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा सकते हैं।
फ्रांस का कहना है कि इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष को और फैलने से रोकना जरूरी है। इसी वजह से उसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा करने की मांग की है।
ब्यूफोर्ट किले पर कब्जे के बाद इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के बड़े इलाके में लोगों को घर खाली करने का आदेश भी दिया है। फ्रांस को आशंका है कि इससे मानवीय संकट और गहरा सकता है, साथ ही दोनों देशों के बीच संघर्ष और बढ़ सकता है।


