Monday, June 1, 2026
Homeराज्यमध्यप्रदेशजबलपुर में महिला जेल प्रहरी नौकरी छोड़ने को मजबूर: पीड़िता बोली-...

जबलपुर में महिला जेल प्रहरी नौकरी छोड़ने को मजबूर: पीड़िता बोली- पीछा कर मानसिक प्रताड़ना दी जा रही, 2 साल पहले विवाद का मामला एनएचआरसी तक पहुंचा – Jabalpur News




जबलपुर के पाटन सब जेल में पदस्थ एक महिला जेल प्रहरी कथित प्रताड़ना से इस कदर परेशान हो चुकी है कि उसने नौकरी छोड़ने तक का मन बना लिया है। महिला जेल प्रहरी ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने की शिकायत की है। उसका आरोप है कि ड्यूटी के बाद बाजार जाने पर भी उसका पीछा किया जाता है। साल 2024 से शुरू हुआ यह विवाद अब तक सुलझ नहीं पाया है। हालांकि जेल प्रशासन का कहना है कि विभाग पूरी तरह महिला कर्मचारी के साथ खड़ा है और मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों सहित एडीजे को भी दी गई है। 2024 की घटना से शुरू हुआ पूरा विवाद जानकारी के अनुसार जबलपुर से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित पाटन सब जेल में पदस्थ महिला जेल प्रहरी रचना ने शिकायत में बताया है कि साल 2024 में सौरभ व्यास नाम का व्यक्ति जेल पहुंचा था और बिना अनुमति सीधे मुलाकात कक्ष की ओर जाने लगा। रचना ने जब उससे मिलने की अनुमति और पहचान संबंधी दस्तावेज पूछे, तो इसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया। महिला प्रहरी का आरोप है कि इसके बाद से उसे लगातार परेशान किया जाने लगा। महिला जेल प्रहरी को धमकी- तुम्हारी वर्दी उतरवा दूंगा पाटन जेल में सहायक जेल अधीक्षक हेमेंद्र बागरी के मुताबिक रचना की नियुक्ति साल 2018 में महिला जेल प्रहरी के पद पर हुई थी और सब कुछ सामान्य चल रहा था। लेकिन 2024 से सौरभ व्यास द्वारा उसे परेशान किया जाने लगा। मामले की लिखित शिकायत पाटन थाने में की गई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर मानव अधिकार आयोग को पत्र लिखा गया। इसके बाद 17 जनवरी 2026 को एफआईआर दर्ज हुई, हालांकि पुलिस ने थाने से ही आरोपी को जमानत दे दी। महिला जेल प्रहरी ने शिकायत में कहा है कि उसका लगातार पीछा किया जा रहा है और धमकियां दी जा रही हैं। उसे कहा जाता है कि “तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे जेल में रोकने की, तुम्हारी वर्दी उतरवा दूंगा।” महिला कर्मचारी का आरोप है कि सौरभ अपने साथियों के साथ उसका पीछा करता है और अधिकारियों से लगातार शिकायतें कर मानसिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। समझौते का दबाव बनाने का आरोप महिला प्रहरी ने आरोप लगाया है कि मामला कोर्ट में पहुंचने के बावजूद उस पर राजीनामा करने का दबाव बनाया जा रहा है। उसका कहना है कि लगातार तनाव और दबाव के कारण उसकी मानसिक स्थिति प्रभावित हो रही है। इतना ही नहीं, वह अपनी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी ठीक से नहीं कर पा रही है। पुलिस के साथ विभागीय जांच जारी सब जेलर हेमेंद्र बागरी का कहना है कि मामला जांच में है और पुलिस के साथ विभागीय स्तर पर भी जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि सौरभ व्यास पेशे से अधिवक्ता हैं और दो साल पहले बिना आवश्यक दस्तावेज के जेल परिसर में घूम रहे थे, जिस पर महिला प्रहरी ने आपत्ति जताई थी। इसी बात से नाराज होकर वह लगातार उसे परेशान कर रहे हैं। बागरी के मुताबिक महिला जेल प्रहरी सरकारी आवास में अकेले रहती है और लगातार धमकियों व पीछा किए जाने से मानसिक रूप से परेशान हो चुकी है। कई बार उसने नौकरी छोड़ने की बात भी कही है। उन्होंने बताया कि हाल ही में जेलर पद की परीक्षा भी प्रस्तावित है, लेकिन मानसिक तनाव के कारण वह पढ़ाई तक नहीं कर पा रही है। सभी आरोप निराधार, सबूत देना चाहिए वहीं मामले में सौरभ व्यास का कहना है कि उन्होंने जेल में कथित अनियमितताओं की शिकायत की थी और इसी कारण उनके खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज करवाई गई। उनका कहना है कि उन पर लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। सौरभ व्यास ने यह भी कहा कि महिला जेल प्रहरी का पीछा करने के आरोप भी गलत हैं और यदि इस संबंध में कोई सबूत हैं तो उन्हें पुलिस या संबंधित अधिकारियों के सामने पेश किया जाना चाहिए। बंदी की मां से शिकायत करवाने का आरोप जेल प्रशासन ने एक अन्य मामले का भी उल्लेख किया है। 21 मई को जेल में बंद सौरभ पिता राजू नामक बंदी ने बैरक में लोहे की रॉड से सिर टकराकर खुद को घायल कर लिया था। अगले दिन उसकी मां ने पाटन पहुंचकर आरोप लगाया कि जेल में उसके बेटे के साथ मारपीट की गई है। जांच में सामने आया कि बंदी ने खुद अपनी मां को ऐसा कहने के लिए कहा था। सब जेलर के मुताबिक बंदी को बाहर से मनचाही वस्तुएं नहीं मिल पाने के कारण उसने दबाव बनाने के लिए यह कदम उठाया था। मामले की जांच एडीजे स्तर पर भी हुई, जिसमें स्पष्ट हुआ कि बंदी ने खुद को चोट पहुंचाई थी। बाद में कुछ लोगों ने इस मामले को अलग रूप देकर जेल विभाग पर झूठे आरोप लगाए।



Source link

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments