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Winter Homegrown Green Vegetables Tips: सर्दियों में पालक, मेथी, धनिया और हरी प्याज़ जैसी सब्ज़ियाँ घर के आंगन या छत पर बेहद आसानी से उगाई जा सकती हैं. कम जगह और कम समय में अधिक पौष्टिक सब्ज़ियाँ मिलती हैं, वह भी पूरी तरह ऑर्गेनिक. देसी खाद और हल्की सिंचाई से यह खेती हर घर में संभव है, जिससे आपकी थाली ताज़ी और सेहतमंद बनती है.
सब्ज़ी आलू की हो या दाल हो या किसी और की, हरा धनिया का उपयोग सभी सब्ज़ियों में किया जाता है. इसे हम घर के आँगन में भी आसानी से उगा सकते हैं. सबसे पहले एक गमला लेना है और उसमें पोषक मिट्टी को डाला जाता है, जिसमें थोड़ा सा गोबर मिला देते हैं. इसके बाद धनिया के बीजों को भिगोकर मिट्टी में रख देते हैं और नियमित रूप से पानी देते हैं. इस आसान प्रक्रिया के बाद 20 से 25 दिनों में हरा धनिया तैयार हो जाता है. इसे हम सब्ज़ी में डालने के लिए उपयोग में ले सकते हैं, जिससे सब्ज़ियों में ताज़गी और स्वाद बढ़ जाता है.

पालक सर्दी के मौसम की पसंदीदा और पौष्टिक सब्ज़ी है. क्योंकि सर्दी के मौसम में पालक का उपयोग सर्वाधिक पराठे, सब्ज़ी और रायता बनाने के लिए किया जाता है. पालक को घर के आँगन में ट्रे में हम आसानी से उगा सकते हैं. इसके लिए 3 से 4 इंच गहराई तक मिट्टी में बीज डालें और नियमित रूप से पानी देते रहें. करीब 20 दिन में पालक की पत्तियाँ सब्ज़ी और पराठों के उपयोग के लिए तैयार हो जाती हैं. इस तरह, आप घर पर ही ताज़ी और पोषण से भरपूर पालक का आनंद ले सकते हैं.

घर में मेथी को उगाने के लिए धूप वाले स्थान और नमी वाली मिट्टी का चयन करना बहुत ज़रूरी होता है. मिट्टी में मेथी के बीज डालते समय यह ध्यान ज़रूर रखना चाहिए कि मेथी के दानों के बीच में चौथाई इंच जगह ज़रूर छोड़नी चाहिए और प्रत्येक दिन पानी देना चाहिए ताकि नमी बनी रहे. लगभग 20 दिन में मेथी की पत्तियाँ सब्ज़ी बनाने के लिए तैयार हो जाती हैं. मेथी के एक पौधे की पत्तियों से हम कम से कम 3 से 4 बार सब्ज़ी बना सकते हैं या इसे उपयोग में ले सकते हैं, जिससे आपको लम्बे समय तक ताज़ी मेथी मिलती रहेगी.
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अगर हम सर्दी के मौसम में घर पर ही बथुआ उगाना चाहते हैं, तो हमें घर की छत पर धूप वाले स्थान पर एक गमला लेना है और इस गमले में चार-पाँच छेद करने हैं. फिर मिट्टी और वर्मी कम्पोस्ट को मिलाकर इस गमले में डाल देंगे. इसके बाद, इसमें बथुआ के बीज हम बिखेर देंगे और प्रत्येक दिन इसमें थोड़ा-थोड़ा पानी देना है. इस प्रक्रिया से 6 से 7 दिनों में बथुआ के बीज अंकुरित होने लग जाएँगे और 25 से 30 दिनों में बथुआ की पत्तियाँ सब्ज़ी या पराठे बनाने के लिए उपयोग में ली जा सकती हैं.

मूली को भी घर की छत पर हम गमले में लगा सकते हैं. इसके लिए हमें पोषक मिट्टी में गोबर की खाद को मिलाना है और गोबर की खाद मिली हुई मिट्टी को हम गमले में डाल देंगे. इसके बाद, इसमें मूली के बीजों को एक-दो इंच गहराई में हम डाल देंगे और इसमें थोड़ा-थोड़ा पानी देना होता है, क्योंकि अधिक पानी देना मूली के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इस विधि से हम 30 से 35 दिनों में मूली को सब्ज़ी के रूप में उपयोग में ले सकते हैं, और ताज़ी मूली का आनंद ले सकते हैं.

