Wednesday, April 15, 2026
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वर्ल्ड अपडेट्स: मणिपुर-मिजोरम के ब्नेई मेनाशे लोगों की इजराइल वापसी, इस साल 1200 जाएंगे; ₹250 करोड़ की इजराइली योजना मंजूर


1 घंटे पहले

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मणिपुर और मिजोरम में बसे ब्नेई मेनाशे समुदाय के करीब 5,800 लोगों की इजराइल वापसी की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। इजराइली कैबिनेट द्वारा 250 करोड़ रुपए की योजना को मंजूरी दिए जाने के बाद चरणबद्ध तरीके से समुदाय को इजराइल ले जाया जाएगा। 2026 तक समुदाय के 1,200 लोग इजराइल भेजे जाएंगे। जबकि, 2030 तक पूरी ‘घर वापसी’ का लक्ष्य रखा गया है।

पूर्वोत्तर भारत की पहाड़ियों में बसा यह समुदाय खुद को बाइबिल की ‘दस खोई हुई जनजातियों’ में से मेनाशे का वंशज मानता है। 2700 साल पहले असिरियन निर्वासन के बाद वे पूर्व की ओर बढ़े और अंत में भारत में बस गए। इजराइल सरकार की नई योजना से उनकी ‘घर वापसी’ तेज हो रही है। हालांकि इस तेजी के पीछे मणिपुर की जातीय हिंसा की त्रासदी भी छिपी बताई जा रही है।

इजराइल में 1950 के दशक में दुनियाभर में यहूदी जड़ों की खोज शुरू हुई थी। इसके तहत 2005 में इजराइल के मुख्य रब्बी श्लोमो अमर ने यहूदी परंपराओं का पालन करने वाले इस समुदाय को धार्मिक मान्यता दी।

इजराइल इसे धार्मिक पुनर्मिलन मानता है। इसके अलावा, उसकी योजना इस समुदाया को गलील क्षेत्र में बसाने की है जिससे उसकी उत्तरी सीमा मजबूत होगी। ऐसे में आस्था, सुरक्षा और रणनीतिक अहमियत की संभावना के कारण ब्नेई मेनाशे को प्राथमिकता दी गई है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे महत्वपूर्ण जियोनिस्ट फैसला माना है।

जाने वाले सदस्यों को इजराइल में शांति व सुकून की उम्मीद है। मिजोरम के कम्युनिटी लीडर जेरेमिया एल. ह्वामते कहते हैं, हम ‘प्रॉमिस्ड लैंड’ लौट रहे हैं। हिंसा ने हमें मजबूर किया, पर यह हमारी जड़ों की पुकार है। एक युवा सदस्य ने कहा, ‘यहां सुरक्षा नहीं, इजराइल में परिवार मिलन, नौकरी, आवास और हिब्रू शिक्षा मिलेगी।’

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भारत समेत दुनियाभर में साल 2026 का आगाज हो चुका है। दिल्ली में इंडिया गेट पर लोगों ने काउंटडाउन के साथ नए साल का स्वागत किया, जबकि जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी के बीच जश्न मनाया गया।

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