वाराणसी में तेंदुए की दहशत गौराकला गांव से सारनाथ तक के लोगों तक पहुंच गया है। पिछले रात गांव के लोगों ने तेंदुआ देखने का दवा किया और भीड़ इकट्ठा हो गयी। हालांकि वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने स्थिति को संभाला काफी तलाश के बाद पता चला कि कोई अन्य जानवर
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कहीं तेदुए की कोई आहट न मिलने या किसी जानवर आदि को नुकसान पहुंचाने की सूचना न मिलने से वन विभाग उसके चले जाने को लेकर लगभग आश्वस्त है। फिर भी ग्रामीणों की संतुष्टि के लिए गांव व आसपास के क्षेत्रों में ट्रैप कैमरों से निगरानी रखी जा रही है।
गांव में वन विभाग की टीम और पुलिस एक्टिव।
सर्विलांस टीमें लगातार 24 घंटे सक्रिय
वन संरक्षक रवि कुमार सिंह ने बताया कि तेंदुए के चले जाने की संभावनाओं के बाद भी पूरी सतर्कता बरती जा रही है। सर्विलांस टीमें लगातार 24 घंटे सक्रिय हैं तथा ट्रैप कैमरे जगह-जगह लगाए गए हैं, क्षेत्र में ड्रोन से भी निगरानी की जा रही है।
एक वन विभाग के कर्मी ने बताया तेंदुए की उपस्थिति होने या चले जाने के बारे में बहुत स्पष्ट कुछ कहना उचित नहीं हैै। इसके लिए अभी प्रामाणिक साक्ष्य नहीं मिले हैं। टीम पूरी सर्तकता से तैनात है। आसपास के क्षेत्र से उसके होने या जानवरों के खाने के उपरांत उनके शव के अवशेष मिलने की भी कहीं से कोई सूचना नहीं आई है। कांबिंग लगातार जारी है तथा सर्विलांस टीमों को सक्रिय रखा गया है। बुधवार को तेंदुए की उपस्थिति को लेकर अफवाहें भी कम रही। वन विभाग की टीम गौराकला एहतियात के तौर पर अभी लगी है।

दिन और रात में एक टीम कर रही गांव में ड्यूटी।
वन विभाग का दावा सभी उपकरण वाराणसी में मौजूद
वन संरक्षक रवि कुमार सिंह ने बताया कि वन विभाग के पास सभी संसाधन उपलब्ध हैं। बाडी प्रोटेक्टर, हेलमेट, फाइबर के डंडे और ट्रंकोलाइजर गन, ड्रोन सब कुछ विभाग का है। इसके बारे में कुछ लोग झूठी अफवाहें फैलाकर क्षेत्र मं 24 घंटे ड्यूटी कर रहे विभागीय जवानों का मनोबल गिरा रहे हैं। केवल चिकित्सक यहां नहीं थे तो लखनऊ से डा. विजयेंद्र यादव को बुलाया गया था।

जहां भी गांव वाले तेंदुआ दिखने का दावा कर रहे वहां कैमरा लगाया जा रहा।
प्रदीप मौर्या ने प्रशासन पर खड़े किए सवाल
गौराकल कामाख्या नगर कालोनी में 23 मई की सुबह साढ़े नौ बजे तेंदुए के हमले में गंभीर रूप से घायल प्रदीप मौर्य (अमित) निवासी नवापुरा शंकरपुर पांच दिन के उपचार के बाद बुधवार को घर आ गए। उन्होंने बतया कि कि वह खेत में फूल तोड़ने गए थे, तभी उसमें छिपे तेंदुए ने हमला कर दिया। उन्होंने कहा कि घायल होने के बाद वह पंडित दीनदयाल अस्पताल में लगभग साढ़े ग्यारह बजे दिन में ही पहुंच गए थे लेकिन उपचार के लिए चिकित्सक देर शाम को आए। महादेव कालेज के प्रबंधक ने पैसा जमा कर हम सभी घायलों को प्राइवेट वार्ड में भर्ती कराया, तब थोड़ी राहत मिली।

