देश में इन दिनों राष्ट्र गीत वंदे मातरम् का 150 शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में विधानसभा भवन, जयपुर में वंदे मातरम् दीर्घा तैयार की गई है। कॉन्स्टिट्यूशन डे पर 26 नवंबर को विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी इसका इनोग्रेशन करेंगे। इस दीर्घा में वंदे मातरम् का पूरा इतिहास 38 पोस्टरों के माध्यम से बताया गया है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने इसे क्यूरेट किया है। इसे राजस्थान के साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग ने बनाया है। दीर्घा में उन दस्तावेज और ऐतिहासिक प्रमाणों को शामिल किया गया है, जिनसे पता चलता है कि स्वतंत्रता से पहले वंदे मातरम् को भारत का राष्ट्रीय गान माना जाता था। एक पोस्टर में 1923 में बनाई गई वंदे मातरम् की चित्राकृतियां हैं, जो उस समय इसकी लोकप्रियता और राष्ट्रभावना से इसके गहरे जुड़ाव को दर्शाती हैं। एक अन्य पोस्टर में पुराने ग्रामोफोन रिकॉर्ड्स पर लिखे शीर्षक दिखाए गए हैं। इनसे स्पष्ट होता है कि वंदे मातरम् उस दौर में भारतीय जन-मन का गीत बन चुका था। विधानसभा में बनी यह दीर्घा शोधकर्ताओं, छात्रों और आमजन के लिए राष्ट्र गीत से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों का एक सशक्त संग्रहालय है। वंदे मातरम् की रचना, उसके प्रकाशन, उस पर विवाद, स्वतंत्रता आंदोलन में उसकी भूमिका और आम जनता से मिले समर्थन, इन सभी को सरल और दृश्यात्मक रूप में प्रदर्शित किया गया है। यह दीर्घा देखने और पोस्ट पर छपी जानकारी को पढ़ने में करीब 20 से 25 मिनट का समय लगेगा। यह 27 नवंबर से सुबह 10 से शाम 4 बजे तक विजिटर्स के लिए खुली रहेगी। विजिटर्स विधानसभा के गेट नंबर 7 से प्रवेश कर सकेंगे। प्रवेश निशुल्क है, लेकिन आधार कार्ड की फोटोकॉपी साथ लाना अनिवार्य होगा। शनिवार को दीर्घा बंद रहेगी, जबकि बाकी दिनों में लोग इसे देख सकेंगे। ऐसे पोस्टर होंगे डिस्प्ले ‘वंदे मातरम् दीर्घा’ विजिटर्स इस दीर्घा के साथ विधानसभा में बने ‘डिजिट म्यूजियम’ और ‘संविधान दीर्घा’ को भी देख सकेंगे। यहां 3डी प्रोजेक्शन मैपिंग, होलोग्राम के माध्यम से राजस्थान के इतिहास, लोकतंत्र, विधानसभा के कार्य और फर्स्ट फ्लोर पर 40 से ज्यादा इंस्टॉलेशन के जरिए प्रशासन के बारे में समझाया जा रहा है। इसके जरिए राजपूताना से राजस्थान बनने का 200 साल का सफर दिखाया है। साथ ही राजस्थान के कल्चर, आंदोलन, वीर नायकों, स्वतंत्रता संग्राम के दौरान साहित्य और प्रेस की भूमिका, विधानमंडल के विकास के बारे में कई कलाकृतियों, 3डी रिफ्लेक्शन, डिस्प्ले बोर्ड, वर्चुअल रियलिटी के माध्यम से बताया जा रहा है। संविधान दीर्घा में 22 अध्याय में लिखे संविधान को 32 पैनल के जरिए शोकेस किया है। यहां विजिटर्स, स्टूडेंट्स और रिसर्चर्स को सदस्यों की शपथ, संविधानसभा की मोहर, महिलाओं की भूमिका, राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान पर संविधान सभा का लिया गया अंतिम निर्णय, डॉ. भीमराव अम्बेडकर के बारे में जानने को मिलेगा। ‘डिजिटल म्यूजियम’ और ‘संविधान दीर्घा’ को भी देख सकेंगे }4X2.8 फीट के 38 पोस्टरों के माध्यम से समझ सकेंगे वंदे मातरम् का इतिहास }दीर्घा को देखने में लगेगा करीब 20 से 25 मिनट का समय, सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक देख सकेंगे }शनिवार को दीर्घा बंद रहेगी, एंट्री फ्री CB Breaking 26 को कॉन्स्टिट्यूशन डे, विधानसभा अध्यक्ष देवनानी करेंगे इनोग्रेशन
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