जयपुर में “वाह विरासत” के बैनर तले आयोजित जनरल मैनेजर्स एक्सचेंज प्रोग्राम (GMX) ने राजस्थान की हॉस्पिटैलिटी और वेडिंग इंडस्ट्री को नई दिशा देने की मजबूत पहल की। इस आयोजन में राज्य के प्रमुख स्टार होटलों के जनरल मैनेजर्स और इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञ एक मंच पर जुटे, जहां वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर गहन मंथन हुआ। वेडिंग इंडस्ट्री के जाने-माने नाम ऋतुराज खन्ना इस आयोजन के प्रमुख संयोजक रहे। कार्यक्रम में ट्रेवल और होटल सेक्टर से जुड़े कई प्रमुख व्यक्तित्वों की उपस्थिति रही, जिनमें कुलदीप सिंह चंदेला(HRAR), महेंद्र सिंह (अध्यक्ष RATO), सुरेंद्र सिंही शाहपुरा (प्रेसिडेंट FHTR), हितेंद्र शर्मा (अध्यक्ष FOREM) और भगत सिंह शामिल रहे। “वाह विरासत” के संस्थापक अरशद हुसैन और सह-संस्थापक मनीष तांबी के नेतृत्व में इस कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। मनीष तांबी विरासत हेरिटेज रेस्टोरेंट के मैनेजिंग डायरेक्टर भी हैं, जो अपनी पारंपरिक राजस्थानी रॉयल हॉस्पिटैलिटी के लिए प्रसिद्ध है। कार्यक्रम की शुरुआत साईं बाबा मंदिर के महंत ओमप्रकाश शर्मा द्वारा पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसने आयोजन को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की। इस कार्यक्रम में हॉस्पिटैलिटी, टूरिज्म और वेडिंग सेक्टर से जुड़े प्रमुख संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ राजस्थान के विभिन्न स्टार होटलों के जनरल मैनेजर्स ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इससे यह आयोजन इंडस्ट्री के लिए एक महत्वपूर्ण नेटवर्किंग और नॉलेज-शेयरिंग प्लेटफॉर्म बनकर उभरा। GMX के दौरान वेडिंग टूरिज्म के तेजी से बढ़ते ट्रेंड, डेस्टिनेशन वेडिंग्स की बढ़ती मांग, लक्ज़री हॉस्पिटैलिटी में नवाचार और इंडस्ट्री में आपसी सहयोग को मजबूत करने जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि राजस्थान अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, भव्य लोकेशन्स और बेहतरीन आतिथ्य के दम पर राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में अपनी पहचान को और मजबूत कर सकता है। यह आयोजन न केवल विचार-विमर्श का मंच बना, बल्कि भविष्य में होटल्स, वेडिंग प्लानर्स और अन्य संबंधित इकाइयों के बीच मजबूत साझेदारियों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ। “वाह विरासत” की यह पहल जयपुर और पूरे राजस्थान को वेडिंग और हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर मानी जा रही है।
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