आपको ऑनलाइन शॉपिंग करनी हो या अपने घर की बिजली का बिल भरना हो, वेबसाइट के नाम के आगे HTTPS देखकर अक्सर लगता है कि साइट सेफ है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि HTTPS होने के बावजूद कोई वेबसाइट धोखाधड़ी करने वाली हो सकती है? भारत की साइबर सिक्योरिटी कंपनी eMudhra से जुड़े एक मामले ने ऑनलाइन सिक्योरिटी सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसमें कंपनी के आठ डिजिटल सर्टिफिकेट की प्राइवेट-की बेहद कमजोर पाई गईं। इससे फर्जी वेबसाइट्स को असली दिखाकर लोगों को धोखा देने का खतरा पैदा हो सकता था।
क्या है eMudhra का मामला?
eMudhra डिजिटल सिग्नेचर, ऑनलाइन पहचान और वेबसाइट सिक्योरिटी से जुड़ी सेवाएं देती है। कंपनी के ग्लोबल वेबसाइट सिक्योरिटी कारोबार से जुड़े आठ इंटरमीडिएट सर्टिफिकेट में यह खामी सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, इनसे जुड़ी कमजोर प्राइवेट-की का पता लगाना बेहद आसान था। डिजिटल सर्टिफिकेट को वेबसाइट का पहचान पत्र समझ सकते हैं। ब्राउजर इनकी मदद से वेबसाइट की पहचान जांचता है और सुरक्षित कनेक्शन बनाने में मदद करता है। लेकिन अगर सर्टिफिकेट से जुड़ी प्राइवेट-की कमजोर हो, तो इसका गलत इस्तेमाल किए जाने का जोखिम बढ़ जाता है।
ऑनलाइन फ्रॉड कैसे हो सकता है?
मान लीजिए, कोई साइबर अपराधी आपके बैंक या किसी शॉपिंग वेबसाइट जैसी दिखने वाली फर्जी साइट बनाता है। अगर वह भरोसेमंद सर्टिफिकेट का गलत इस्तेमाल कर सके, तो उसकी वेबसाइट असली जैसी दिखाई दे सकती है। ऐसे में यूजर धोखे में आकर अपना पासवर्ड, लॉगिन डिटेल या पेमेंट की जानकारी साझा कर सकता है। हालांकि, इस मामले में संभावित खतरे का मतलब यह नहीं है कि ऐसा हमला हुआ ही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कमजोर की का इस्तेमाल करके साइबर हमले किए जाने का कोई सबूत सामने नहीं आया है।
eMudhra और सरकार ने क्या कदम उठाए?
कंपनी के मुताबिक, प्रभावित आठों इंटरमीडिएट सर्टिफिकेट 19 अक्टूबर को रद्द कर दिए गए थे। गूगल, मोजिला, एप्पल और माइक्रोसॉफ्ट को भी मामले की जानकारी दी गई और प्रभावित सर्टिफिकेट को ब्लॉक करने के कदम उठाए गए। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने जांच के लिए विशेष टीम बनाई है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारत की नियमन के तहत आने वाली डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट और eSign सेवाएं प्रभावित नहीं हुई हैं। eMudhra ने भी कहा है कि उसके सिस्टम में सेंध या ग्राहक डेटा लीक होने की घटना नहीं हुई।
ऑनलाइन यूजर्स कैसे रहें सुरक्षित?
HTTPS या ताले के निशान को सुरक्षा की पूरी गारंटी न मानें। वेबसाइट का पता ध्यान से जांचें, अनजान मैसेज में आए पेमेंट लिंक पर क्लिक करने से बचें और किसी के साथ OTP या पासवर्ड शेयर न करें। ब्राउजर को अपडेट रखें और बैंकिंग या पेमेंट के लिए हमेशा आधिकारिक वेबसाइट या ऐप का इस्तेमाल करें। याद रखें, HTTPS कनेक्शन को एन्क्रिप्ट करने में मदद करता है, लेकिन यह गारंटी नहीं देता कि वेबसाइट चलाने वाला व्यक्ति भरोसेमंद ही है।
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