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अक्षय कुमार और प्रियदर्शन ने साथ में कई फिल्मों में काम किया है. यह कॉमेडी फिल्में सुपरहिट हुई हैं. हाल में आई भूत बंगला भी बॉक्स ऑफिस 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का कलेक्शन कर चुकी है. लेकिन साल 2006 में प्रियदर्शन की एक ऐसी फिल्म आई, जिसमें अक्षय कुमार नहीं थे. फिल्म फिर सुपरहिट हुई. फिल्म की कहानी के सेंटर में लॉटरी का टिकट था.
प्रियदर्शन ने ‘हेरा फेरा’, ‘भूल भुलैया’ जैसी कॉमेडी फिल्मों को डायरेक्ट किया और स्टार डायरेक्टर बन गए. ‘हंगामा’, ‘हलचल’ और ‘हेरा फेरी’ के अलावा उनकी एक और चर्चित फिल्म रही, जिसे बहुत कम लोग जानते हैं. साल 2006 में आई यह फिल्म ग्रामीण परिवेश में बनाई गई थी. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी. महज 7 करोड़ रुपए में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 42 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया था. (फिल्म पोस्टर/यूट्यूब थंबनैल)

इस फिल्म का नाम ‘मालामाल वीकली’ है. कॉमेडी फिल्मों की बात हो और ‘मालामाल वीकली’ का नाम न आए, ऐसा मुश्किल है. प्रियदर्शन के डायरेक्शन में बनी यह फिल्म ग्रामीण भारत की पृष्ठभूमि पर आधारित एक ऐसी कहानी है, जिसमें लालच, किस्मत और हास्य का जबरदस्त मिश्रण देखने को मिलता है. (फिल्म पोस्टर/यूट्यूब थंबनैल)

कहानी एक छोटे से गांव लाहौली के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां के लोग बेहद गरीब हैं और किसी चमत्कार का इंतजार करते रहते हैं. गांव में गरीबी इतनी ज्यादा है कि लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतें भी मुश्किल से पूरी कर पाते हैं. ऐसे में एक दिन गांव के एक आदमी लॉटरी टिकट खरीदता है और यहीं से कहानी में बड़ा ट्विस्ट आता है. (फिल्म पोस्टर/यूट्यूब थंबनैल)
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‘मालामाल वीकली’ में लीडर रोल लोटन का है, जो रितेश देशमुख ने जताया है. लोटन गांव में एक छोटे-मोटे काम करने वाला सीधा-सादा युवक है. उसे पता चलता है कि गांव के जिस आदमी ने लॉटरी टिकट खरीदा था, वह मर चुका है—लेकिन उसकी टिकट पर करोड़ों की लॉटरी लग चुकी है. अब समस्या यह है कि अगर यह बात सबको पता चल गई, तो पैसे पर झगड़ा और बवाल होना तय है. (फिल्म पोस्टर/यूट्यूब थंबनैल)

लोटन अपने दोस्त और गांव के कुछ लोगों के साथ मिलकर एक योजना बनाता है कि इस लॉटरी के पैसे को कैसे अपने कब्जे में लिया जाए. लेकिन जैसे-जैसे वे इस प्लान को अंजाम देने की कोशिश करते हैं, कहानी में नए-नए मोड़ आते जाते हैं और हालात और ज्यादा उलझते जाते हैं. (फिल्म पोस्टर/यूट्यूब थंबनैल)

फिल्म में परेश रावल का किरदार लीलाराम का है, जो बेहद मजेदार है, जो हर स्थिति में अपने फायदे की सोचता है. वहीं ओमपुरी बलवंत के रोल में हैं, जिनका मासूम लेकिन चालाक अंदाज दर्शकों को खूब हंसाता है. इनके अलावा असरानी और राजपाल जैसे कलाकार भी फिल्म में जबरदस्त कॉमिक टाइमिंग लेकर आते हैं. (फिल्म पोस्टर/यूट्यूब थंबनैल)

जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, गांव के हर व्यक्ति को इस लॉटरी के बारे में शक होने लगता है. हर कोई किसी न किसी तरह उस पैसे को हासिल करना चाहता है. नतीजा यह होता है कि एक के बाद एक झूठ, धोखा और चालबाजी का सिलसिला शुरू हो जाता है. लोग एक-दूसरे को बेवकूफ बनाने में लगे रहते हैं, और यही स्थिति फिल्म को बेहद हास्यास्पद बना देती है. फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें हास्य सिर्फ डायलॉग्स से नहीं, बल्कि सिचुएशनसे पैदा होता है. (फिल्म पोस्टर/यूट्यूब थंबनैल)

एक छोटी सी बात कैसे बड़ी समस्या बन जाती है, और फिर उसे छिपाने के लिए लोग और बड़ी गलतियां करते जाते हैं—यही फिल्म की कॉमिक ताकत है. क्लाइमैक्स में हालात इतने बिगड़ जाते हैं कि सच्चाई छिपाना मुश्किल हो जाता है. अंत में यह दिखाया जाता है कि लालच इंसान को कैसे उलझनों में फंसा देता है और कभी-कभी जो चीज हमें आसानी से मिल सकती है, वही हमारी गलतियों की वजह से हाथ से निकल जाती है. (फिल्म पोस्टर/यूट्यूब थंबनैल)

