पटना में सोमवार को राज्यसभा सांसद मनोज झा ने आज पीसी की। इस दौरान उन्होंने कहा कि 1952 के बाद यह पहला चुनाव है जो इतना क्रिटिकल है। यह केवल सत्ता बदलने का नहीं, बल्कि बदलाव का चुनाव है। यह तय करेगा कि बिहार किस दिशा में जाएगा। उन्होंने कहा कि बिहार क
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मनोज झा ने कहा, ‘हमें गुजरात से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन बिहार के साथ भेदभाव अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गुजरात में निवेश की बातें होती हैं, जबकि बिहार में सिर्फ श्रमिक भेजने की चर्चा होती है। अमित शाह और मोदी को याद रखना चाहिए कि गुजरात उनका नहीं, बल्कि बापू और सरदार पटेल की धरती है।’
उन्होंने तेजस्वी यादव के रोजगार वाले वादे का जिक्र करते हुए कहा कि जब तेजस्वी ने ‘हर घर सरकारी नौकरी’ का नारा दिया, तो कई लोगों ने शक जताया, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि ‘जब इंटेंट होगा तो कंटेंट भी होगा।’ उन्होंने बताया कि अगर महागठबंधन की सरकार बनी, तो पांच साल की अवधि में हर साल रोजगार दिए जाएंगे।
पटना में राज्यसभा सांसद ने की पीसी।
मतदाताओं को ₹10,000 तक बांटे जा रहे हैं
मनोज झा ने दावा किया कि ‘तेजस्वी यादव ना होते तो बिहार में नौकरी चुनावी मुद्दा ही नहीं बनता।’ उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान मतदाताओं को ₹10,000 तक बांटे जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं खुद चुनाव आयोग गया था और यह सबूतों के साथ कहा कि चुनाव के वक्त पैसे बांटे जा रहा हैं, जैसे ही चुनाव खत्म होता है पैसा बंद।’
14 नवंबर के बाद बिहार से ‘संविदा’ शब्द खत्म हो जाएगा और इस पर कानून लाया जाएगा। माइक्रो फाइनेंस जैसी कंपनियों पर भी सख्त कार्रवाई होगी। झा ने घोषणा की कि महागठबंधन की सरकार बनी तो 25 लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा और 50 लाख रुपए का बीमा जनप्रतिनिधियों को दिया जाएगा।
अपने तीखे अंदाज़ में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा, ‘वे बहुत हल्की बातें करते हैं, भाषा की गरिमा नहीं रखते। मैंने कई प्रधानमंत्री देखे हैं, पर ऐसा स्तर पहले कभी नहीं देखा।’
अंत में मनोज झा ने कहा, “यह चुनाव बिहार के आत्मसम्मान का चुनाव है — या तो बिहार आगे बढ़ेगा, या फिर नफ़रत की राह पर जाएगा।”

