भारतीय शेयर बाजारों की मंगलवार को कमजोर शुरुआत हो सकती है. ग्लोबल बाजारों में कमजोरी और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. बाजार खुलने से पहले गिफ्ट निफ्टी करीब 45 अंक गिरकर 24,164 के आसपास कारोबार कर रहा था. ऐसे में निफ्टी और सेंसेक्स पर शुरुआत दबाव हो सकता है. घरेलू बाजार के लिए फिलहाल कोई बड़ा पॉजिटिव ट्रिगर नहीं है.
एशियाई बाजारों में भी मंगलवार को बिकवाली देखने को मिली. जापान का निक्कई करीब 0.91 फीसदी नीचे रहा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 2.79 फीसदी तक फिसलकर कारोबार कर रहा है. ताइवान का बाजार भी करीब 0.77 फीसदी कमजोर नजर आ रहा है. इससे भारतीय बाजार में भी शुरुआती कारोबार के दौरान कमजोरी का माहौल रहने की संभावना है.
US-ईरान तनाव से बढ़ी चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बाजार के लिए सबसे बड़ा ग्लोबल ट्रिगर बना हुआ है. अमेरिका ने ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ शुरू किया है और ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों पर कड़े आर्थिक कदम उठाने की चेतावनी दी है. ईरान ने इसे युद्ध की कार्रवाई बताया है. दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव से निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ी है और वे रिस्क वाले एसेट्स में निवेश को लेकर सतर्क हो रहे हैं.
सोना-चांदी और कच्चे तेल पर नजर
जियो-पॉलिटिकल टेंशन का असर कमोडिटी बाजार पर भी दिख रहा है. निवेशक अनिश्चित माहौल में सुरक्षित निवेश की तलाश कर रहे हैं, जिससे सोने और चांदी की कीमतों में तेजी बनी हुई है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब तीन महीने के हाई लेवल के आसपास कारोबार कर रहा है. चांदी में भी मजबूती देखने को मिली है.
दूसरी ओर, ब्रेंट क्रूड करीब 92 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है. अगर अमेरिका-ईरान तनाव और बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतों पर और दबाव आ सकता है. भारत के लिए महंगा कच्चा तेल चिंता का विषय है, क्योंकि इससे आयात बिल और महंगाई पर असर पड़ सकता है.
एशियाई बाजारों में बिकवाली
अमेरिकी बाजार का प्रदर्शन सोमवार को मिला-जुला रहा. डाउ जोन्स 0.26 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि टेक्नोलॉजी शेयरों में कमजोरी के कारण नैस्डैक 0.76 फीसदी गिरा. S&P 500 में भी 0.28 फीसदी की गिरावट रही.
इसी कमजोरी का असर मंगलवार को एशियाई बाजारों पर दिखाई दिया. कोस्पी में करीब 2.79 फीसदी की गिरावट सबसे ज्यादा रही. निक्कई 0.91 फीसदी और ताइवान का बाजार 0.77 फीसदी कमजोर रहा. ग्लोबल बाजारों की यह चाल भारतीय शेयर बाजार के लिए भी नेगेटिव संकेत दे रही है.
बॉन्ड यील्ड और बाजार की आगे की चाल
अमेरिका की 10 साल की बॉन्ड यील्ड करीब 4.7 फीसदी तक पहुंच गई है. हाई बॉन्ड यील्ड आमतौर पर शेयर बाजार के लिए दबाव बढ़ा सकती है, क्योंकि निवेशकों को सुरक्षित सरकारी बॉन्ड से बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद रहती है.
ऐसे माहौल में भारतीय बाजार में आज बड़ी तेजी की संभावना सीमित नजर आ रही है. निवेशकों की नजर गिफ्ट निफ्टी, कच्चे तेल की कीमत, एशियाई बाजारों और अमेरिका-ईरान तनाव से जुड़ी खबरों पर रहेगी. बाजार में सेक्टर और खबर की वजह से उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.

