सवाई माधोपुर के दुमोदा गांव में कई दिनों से आबादी क्षेत्र के आसपास घूम रहे भालू को वन विभाग ने पिंजरे में कैद कर रेस्क्यू किया। भालू की लगातार मूवमेंट को देखते हुए वन विभाग की टीमों ने इलाके में निगरानी बढ़ा रखी थी और जगह-जगह पिंजरे लगाए गए थे। स्वास्थ्य जांच के बाद भालू को सुरक्षित रणथंभौर के जंगल में छोड़ दिया गया। इससे दो दिन पहले इसी क्षेत्र में मासूम पर हमला करने वाला लेपर्ड भी पिंजरे में कैद हुआ था। वन विभाग ने ग्रामीणों से वन्यजीव दिखाई देने पर उसके पास नहीं जाने और तत्काल टीम को सूचना देने की अपील की है। कई दिनों से भालू का था मूवमेंट रणथंभौर के डीएफओ मानस सिंह ने बताया – फलौदी रेंज के कैलाशपुरी और दुमोदा क्षेत्र में पिछले कुछ समय से लेपर्ड के साथ एक स्लॉथ बीयर (भालू) भी बार-बार आबादी क्षेत्र में आ रहा था। भालू की लगातार मौजूदगी को देखते हुए ग्रामीणों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विशेष निगरानी और रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान भालू पिंजरे में कैद हो गया। स्वास्थ्य जांच के बाद जंगल में छोड़ा वन विभाग की टीम ने भालू को सुरक्षित रेस्क्यू कर उसका स्वास्थ्य परीक्षण कराया। इसके बाद उसे रणथंभौर के घने जंगलों में सुरक्षित छोड़ दिया गया। रेस्क्यू के दौरान टीम ने इस बात का विशेष ध्यान रखा कि आमजन को किसी तरह का खतरा न हो और भालू को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचे। वन्यजीव दिखे तो पास नहीं जाने की अपील डीएफओ ने ग्रामीणों से अपील की कि आबादी क्षेत्र में किसी वन्यजीव की गतिविधि दिखाई देने पर उसके पास न जाएं, उसे घेरने का प्रयास न करें और भीड़ एकत्र न करें। इसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दें। लेपर्ड के बाद भालू के भी पकड़े जाने से कैलाशपुरी, दुमोदा और आसपास के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
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