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NPS Fee Hike : अगर कोई एनपीएस खाता फ्रीज हो जाता है तो भी जुर्माना देना होगा. शुल्क वसूली की प्रक्रिया को पूरी तरह स्वचालित बनाया गया है. सेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसियां हर तिमाही के अंत में सीधे सब्सक्राइबर्स के खातों से यूनिट्स काटकर अपना शुल्क वसूलेंगी.
नियमों में बदलाव होने का असर आपकी जेब पर भी होगा.
नई दिल्ली. पेंशन फंड नियामक पीएफआरडीए (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम यानी एनपीएस के फीस ढांचे में बदलाव कर दिया है. ये बदलाव एक जुलाई से लागू होंगे. इनका सीधा असर करोड़ों सब्सक्राइबर्स की जेब पर पड़ने वाला है. सब्सक्राइबर्स को हर छोटी-बड़ी सुविधा और निवेश के चुनाव के लिए अलग-अलग शुल्क देना होगा. नए नियमों की सबसे बड़ी मार उन निवेशकों पर पड़ेगी जिन्होंने जोखिम कम करने के लिए अपने निवेश को कई स्कीमों में बांट रखा है.
अब तक पूरे खाते पर एक निश्चित शुल्क का प्रावधान था, लेकिन 1 जुलाई से एक ही खाते के भीतर मौजूद हर स्कीम के लिए अलग चार्ज देना होगा. यदि आपने अपने एनपीएस प्लान के तहत इक्विटी, कॉरपोरेट बॉन्ड और सरकारी बॉन्ड जैसी अलग-अलग संपत्तियों में निवेश किया है, तो पीएफआरडीए इन तीनों को अलग-अलग इकाई मानेगा और हर एक के लिए शुल्क वसूलेगा.
निष्क्रिय खाते पर भी देना होगा चार्ज
सरकार ने उन सब्सक्राइबर्स पर भी नकेल कसने की तैयारी कर ली है जो खाता खुलवाने के बाद उसमें निवेश करना भूल जाते हैं. नए सर्कुलर के अनुसार, यदि किसी एनपीएस खाते में लगातार एक साल यानी चार तिमाहियों तक कोई अंशदान नहीं दिया जाता है तो उस खाते को फ्रीज कर दिया जाएगा. खाता फ्रीज होने के बावजूद शुल्क कटना बंद नहीं होगा. ऐसे निष्क्रिय खातों से भी सामान्य प्रान (PRAN) शुल्क का 10 प्रतिशत हिस्सा जुर्माने के तौर पर वसूला जाता रहेगा. यह प्रक्रिया तब तक जारी रहेगी जब तक सब्सक्राइबर अपने खाते को दोबारा सक्रिय नहीं करा लेता या फिर खाते में मौजूद बैलेंस पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता.
टियर-II खाताधारकों के लिए खत्म हुई मौज
एनपीएस का टियर-II खाता, जिसे कई लोग कम शुल्क और आसान निकासी के कारण बचत खाते की तरह इस्तेमाल करते थे. लेकिन, अब इसका शुल्क भी टियर-I के बराबर कर दिया गया है. हालांकि, छोटे निवेशकों को थोड़ी राहत देते हुए यह प्रावधान किया गया है कि यदि टियर-II खाते में शेष राशि 1,000 रुपये से कम है, तो उनसे सालाना मेंटेनेंस चार्ज नहीं वसूला जाएगा.

