Saturday, June 13, 2026
Homeराज्यउत्तरप्रदेशहाईकोर्ट की प्रदेश की नौकरशाही पर गंभीर टिप्पणी: कहा, नौकरशाही में...

हाईकोर्ट की प्रदेश की नौकरशाही पर गंभीर टिप्पणी: कहा, नौकरशाही में नैतिकता की मौलिक कमी, प्रशासन इसे बाहरी वस्तु मानती है – Prayagraj (Allahabad) News



इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नौकरशाही की मनमानी पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा है कि पारंपरिक नौकरशाही में नैतिकता की एक मौलिक कमी यह है कि यह नैतिकता को प्रशासन के रोज़मर्रा के कामकाज का अभिन्न अंग न मान उसे बाहरी वस्तु मानती है। सरकार के विधायी विंग द्वारा

.

कोर्ट ने कहा जहां प्रशानिक निर्णय तर्कहीन, अपमानजनक व मनमाने हैं,अदालतों को हस्तक्षेप करने के अपने अधिकारों को फिर से स्थापित करने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए। दूसरे शब्दों में कहें ,अदालतें, कानून के शासन के गारंटर के रूप में कार्य करने के बजाय, इस दायित्व को कार्यकारी शाखा को सौंप रही हैं, ताकि राज्य नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। किंतु नौकरशाही सहयोग नहीं कर रही।

कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव (गृह) को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया है और कहा है कि यदि आदेश पालन में कोई कानूनी बाधाएं हैं, तो उनका खुलासा करे। साथ ही पूछा है कि किस कारण से प्रदेश का गृह विभाग ,कोर्ट द्वारा समय-समय पर मांगी गई विशिष्ट और सटीक जानकारी देने में बार-बार विफल हो रहा है। कोर्ट ने जानकारी उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। याचिका की अगली सुनवाई 20.जनवरी .2026 को होगी।

यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकलपीठ ने राजेंद्र त्यागी व दो अन्य की गैंगस्टर एक्ट के तहत उनके खिलाफ की गई कार्यवाही की चुनौती याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।

प्रदेश के कुछ जिलों में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने और गैंगस्टर एक्ट के तहत जिलाधिकारी की शक्ति पुलिस कमिश्नरेट को देने के बाद शक्ति का दुरूपयोग करने की शिकायत को लेकर दाखिल याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह टिप्पणी की है और कहा है कि अपर मुख्य सचिव गृह व पुलिस कमिश्नर गाजियाबाद ने हलफनामा दाखिल किया कहा अपराध से निपटने के लिए पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली सबसे प्रभावी व अच्छी है।किन्तु उसमें मांगी गयी जानकारी ही नहीं है।अपर महाधिवक्ता ने फिर से समय मांगा,जबकि केस दर्जनों बार लग चुका है। कोर्ट ने डी जी पी अभियोजन को भी आदेश पालन का समय दिया।

कोर्ट ने कहा कि दाखिल हलफनामे से स्पष्ट है कि या तो कोर्ट का आदेश समझ नहीं सके या लापरवाही से विना विवेक का इस्तेमाल किए हलफनामा दाखिल कर दिया। उन्हें आदेश की अनदेखी करने के दुष्परिणाम की कोई परवाह नहीं। मनमानी पर उतारू है। कोर्ट मूकदर्शक नहीं रह सकती। प्रदेश के नागरिकों के हित में अपनी शक्ति को इस्तेमाल करने में संकोच नहीं करेगी। कोर्ट ने कहा अधिकारियों को ठीक से प्रशिक्षित नहीं किया गया है। उनमें संस्थागत काबिलियत की कमी है।फिर भी वे महात्वाकांक्षी है और हेरफेर करने में माहिर हैं। कोर्ट ने फिलहाल एक बार फिर मांगी गई जानकारी देने का समय दिया है।



Source link

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments