Saturday, August 1, 2026
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हाईकोर्ट बोला-पीड़िता की निजी तस्वीरे सीलबंद लिफाफे में पेश होगी: कहा-खुले तौर पर अदालत में पेश की जाती है, यह महिलाओं की गरिमा और गोपनीयता का उल्लंखन – Jaipur News




राजस्थान हाईकोर्ट ने एक रिपोर्टेबल जजमेंट देते हुए कहा है कि यौन अपराधों से संबंधित सभी मामलों में पीड़िता की निजी, अश्लील फोटो-वीडियो केवल सीलबंद लिफाफे अथवा पासकोड लॉक इलेक्ट्रॉनिक फोल्डर में ही पेश की जाएगी। यह आदेश जस्टिस अनूप ढंढ की अदालत ने एक आपराधिक मामलें की सुनवाई करते हुए दिया। अदालत ने कहा कि आजकल जमानत याचिकाओं, आपराधिक रिवीजन, अपील सहित अन्य मामलों में आरोपी अथवा पुलिस पीड़िता की फोटो याचिका के साथ अथवा सीडी और पेन ड्राइव में पेश कर रही हैं। ये फाइलें जांच एजेंसी के कार्यालय से लेकर कोर्ट रूम और रजिस्ट्री तक कई हाथों से गुजरती हैं, इसलिए इनका दुरुपयोग होने, सोशल मीडिया या इंटरनेट पर वायरल होने की पूरी आशंका रहती है, जो किसी भी महिला के वर्तमान, भविष्य और उसके वैवाहिक जीवन को पूरी तरह तबाह कर सकता है। अदालत ने कहा कि ऐसा करना महिलाओं की गरिमा व गोपनीयता का उल्लंघन है। ट्रायल शर्मिंदा करने का जरिया ना बन जाए
कोर्ट ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्ति को गरिमापूर्ण जीवन जीने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। लेकिन जब जांच ही अपमान में बदल जाए, तो कानूनी प्रक्रिया स्वयं में एक सजा बन जाती है और जब अदालती ट्रायल सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करने का जरिया बन जाए, तो यह व्यक्ति के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंखन हैं। अदालत ने कहा कि हमने नोटिस किया कि अक्सर आरोपी अथवा उनके वकील खुद के बचाव में यह दिखाने के लिए कि दोनों पक्षों के बीच संबंध सहमति से थे, ऐसी निजी तस्वीरें और वीडियो जांच अधिकारी और अदालतों के समक्ष खुले तौर पर पेश कर देते हैं। यह न केवल महिला की निजता पर हमला है, बल्कि खुली फाइलों के जरिए पीड़िता की पहचान को सार्वजनिक भी करता हैं। सभी थानों के एसएचओ को सूचित करें
हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को यौन अपराधों से संबंधित सभी याचिकाओं की सख्त जांच करने का निर्देश दिया है, ताकि पीड़िता का नाम, पता, फोटो या सोशल मीडिया विवरण कहीं भी उजागर न हो। वहीं रजिस्ट्रार न्यायिक को कहा है कि वे इस मामले को प्रशासनिक रूप से मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखें, ताकि पूरे राज्य के लिए स्टैंडिंग ऑर्डर जारी किए जा सकें। इसके अलावा रजिस्ट्रार जनरल को सभी न्यायिक अधिकारियों को भी यह आदेश भेजने के निर्देश दिए हैं। साथ ही एसीएस होम, डीजीपी, पुलिस महानिदेशक, मुख्य विधि सचिव और अभियोजन विभाग के निदेशक को आदेश की प्रति भेजकर सभी थानों के एसएचओ को सूचित करने के लिए भी कहा है।



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