Friday, September 18, 2026
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नालंदा में सिंचाई की कमी की परेशानी होगी दूर: 30 योजनाओं की सूची तैयार, नहरों की होगी मरम्मत, हर खेत तक पहुंचेगा पानी – Nalanda News


नालंदा में कृषि क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या सिंचाई की कमी है। इसको हल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिले की मृत पड़ी नहरों को पुनर्जीवित करने के लिए सिंचाई विभाग ने एक व्यापक एक्शन प्लान तैयार करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है।

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2 अगस्त को बिहारशरीफ में आयोजित किसान संवाद कार्यक्रम में जिले के कोने-कोने से आए किसानों ने अपनी समस्याएं रखीं और समाधान के सुझाव दिए। इस बैठक में किसानों की ओर से दी गई सलाहों के आधार पर सिंचाई विभाग ने नहरों के जीर्णोद्धार की एक प्राथमिकता सूची तैयार की है। यह सूची पहले से ही जिला प्रशासन को भेजी जा चुकी है।

सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता अजीत कुमार ने बताया कि किसान संवाद में आए सुझावों को हमने गंभीरता से लिया है। सभी प्रस्तावों को सूचीबद्ध कर जिला प्रशासन को भेजा गया है। प्रशासन की अनुशंसा के बाद हम विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करेंगे।”

सालों से वीयर और बैराज का रखरखाव नहीं

विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नदियों और नहरों में पानी आने के बावजूद खेतों तक पहुंचने में सबसे बड़ी बाधा पुरानी हो चुकी सिंचाई योजनाएं हैं। सालों से वीयर और बैराज का रखरखाव नहीं हुआ है।

नहरों में भरी गाद को निकालने का काम नहीं किया गया है। कई नहरें तो जंगली वनस्पति से भर गई हैं। जलकुंभी की समस्या के कारण बारिश के पानी का प्रवाह भी बाधित हो जाता है।

नहर परियोजना से सिंचाई में होगी सुविधा।

इसके अतिरिक्त, नहरों के तटबंधों पर सड़क निर्माण भी पानी के प्रवाह में बाधक बना है। यह स्थिति न केवल सिंचाई को प्रभावित करती है बल्कि बाढ़ के दौरान जल निकासी में भी समस्या पैदा करती है।

सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता सुशील प्रकाश ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए कहा कि नहरीकरण की 30 ऐसी योजनाओं को चिह्नित किया गया है, जो अत्यंत उपयोगी साबित होंगी। उनके अनुसार, “इन 30 योजनाओं के क्रियान्वयन से पटवन की समस्या का काफी हद तक समाधान हो जाएगा।

विभाग की ओर से प्रस्ताव की स्वीकृति के बाद प्रत्येक योजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी। इसमें तकनीकी विश्लेषण, लागत अनुमान और कार्यान्वयन की समय सीमा शामिल होगी।

नदियां पड़ोसी जिले के लिए भी जरुरी

नालंदा की सिंचाई व्यवस्था में कई नदियां अहम भूमिका निभाती हैं। पैमार, पंचाने, फल्गु और सकरी नदियां न केवल नालंदा बल्कि पड़ोसी जिलों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। चूंकि ये नदियां जिलों की सीमाओं को पार करती हैं, इसलिए इनके विकास में अंतर-जिला समन्वय की आवश्यकता होती है।

विशेष रूप से पैमार नदी सिंचाई योजना का महत्व इसलिए और बढ़ जाता है कि यह नालंदा के कई प्रखंडों – इस्लामपुर, एकंगरसराय, करायपरसुराय और हिलसा के सैकड़ों हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करती है। इन क्षेत्रों के किसानों के लिए यह नदी जीवनदायिनी का काम करती है।

इस्लामपुर क्षेत्र के किसानों ने एक अभिनव प्रस्ताव दिया है कि पैमार नदी को फल्गू नदी से जोड़ा जाए, ताकि पैमार में निरंतर जल प्रवाह बना रहे। यह प्रस्ताव तकनीकी दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है। लेकिन सफल होने पर यह पूरे क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था को क्रांतिकारी बदलाव दे सकता है। सिंचाई विभाग ने इस प्रस्ताव को भी अपनी कार्य योजना में शामिल करने का निर्णय लिया है।



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