राज्य के हर थाने में अब चाइल्ड हेल्प डेस्क या चाइल्ड कॉर्नर बनाया जाएगा। पुलिस मुख्यालय के कमजोर वर्ग और अपराध अनुसंधान विभाग ने इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। 2 अक्टूबर 2026 यानी गांधी जयंती तक राज्य के सभी थानों में यह व्यवस्था शुरू करना अनिवार
.
इस पहल का मकसद बच्चों और उनके माता-पिता को थाने में शिकायत या मदद के लिए आने पर सुरक्षित, आरामदायक और डर-मुक्त माहौल देना है। चाइल्ड हेल्प डेस्क को थाने के सामान्य लॉकअप से अलग जगह पर बनाया जाएगा। इससे बच्चों का संपर्क लॉकअप या उससे जुड़े माहौल से नहीं होगा। डेस्क को ऐसी जगह बनाने के निर्देश हैं, जो आसानी से दिखे और जरूरतमंद बच्चे या उनके माता-पिता वहां आसानी से पहुंच सकें।
चाइल्ड हेल्प डेस्क या कॉर्नर का संचालन बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी (CWPO) के नेतृत्व में होगा। डेस्क पर संबंधित CWPO के साथ-साथ जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी (DCPO) का नाम, पदनाम और मोबाइल नंबर भी साफ तौर पर दिखाया जाएगा।
इसका मकसद है कि बच्चों या उनके परिवार को किसी मदद या शिकायत के लिए संबंधित अधिकारी से संपर्क करने में दिक्कत न हो। दिखाए गए मोबाइल नंबरों को चालू रखने और मिली शिकायतों पर तय समय में कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
बच्चों से जुड़े मामलों में बातचीत और शिकायत दर्ज कराते समय आरामदायक माहौल देने पर भी खास जोर दिया गया है। खासकर लड़कियों से जुड़े मामलों के लिए योग्य महिला पुलिसकर्मियों को तैनात किया जाएगा।
महिला पुलिसकर्मी लड़कियों से जुड़ी समस्याओं को समझेंगी, उनकी बात सुनेंगी और जरूरी पुलिस कार्रवाई में मदद करेंगी। इससे बच्चों को अपनी परेशानी खुलकर बताने के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल मिल पाएगा।
शिकायत मिलते ही शुरू होगी कार्रवाई
चाइल्ड हेल्प डेस्क पर बच्चों और उनके अभिभावकों की ओर से मिलने वाली शिकायतों तथा सहायता अनुरोधों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। शिकायतों के निपटारे के साथ-साथ उनका उचित रिकॉर्ड भी रखा जाएगा। वरिष्ठ अधिकारी करेंगे नियमित निगरानी
सिर्फ डेस्क स्थापित करना ही नहीं, बल्कि उसकी कार्यप्रणाली की मॉनिटरिंग भी निरंतर की जाएगी। संबंधित पुलिस उपाधीक्षक, विशेष अपराध-सह-प्रभारी SJPU और अन्य वरीय जिला पदाधिकारी चाइल्ड हेल्प डेस्क की व्यवस्था और कामकाज की नियमित समीक्षा करेंगे। निगरानी के दौरान यह देखा जाएगा कि डेस्क निर्धारित स्थान पर संचालित हो रहा है या नहीं, संबंधित अधिकारियों के संपर्क नंबर प्रदर्शित हैं या नहीं, शिकायतों पर समय से कार्रवाई की जा रही है या नहीं और मामलों का रिकॉर्ड ठीक से रखा जा रहा है या नहीं। 2 अक्टूबर तक सभी थानों में स्थापना का लक्ष्य पुलिस मुख्यालय ने 2 अक्टूबर 2026 की समयसीमा तय की है। गांधी जयंती तक राज्य के प्रत्येक थाने में Child Help Desk/Child Corner स्थापित करना अनिवार्य होगा। व्यवस्था लागू होने के बाद सभी संबंधित जिलों को इसकी अनुपालन रिपोर्ट 5 अक्टूबर 2026 तक कमजोर वर्ग, अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार को उपलब्ध करानी होगी। इस रिपोर्ट के जरिए यह जानकारी ली जाएगी कि संबंधित थानों में निर्देश के अनुसार चाइल्ड हेल्प डेस्क/कॉर्नर स्थापित किया गया है या नहीं। बच्चों के लिए थाने का माहौल बदलने की कोशिश पुलिस मुख्यालय की इस पहल का व्यापक उद्देश्य बच्चों से संबंधित मामलों में पुलिस व्यवस्था को अधिक बाल-संवेदनशील और सहयोगपूर्ण बनाना है। थाने में अलग और बाल-मित्र स्थान उपलब्ध होने से बच्चों तथा उनके अभिभावकों को अपनी शिकायत या समस्या रखने में सहूलियत मिलने की उम्मीद है। लॉकअप से अलग स्थान, CWPO की जिम्मेदारी, महिला
पुलिसकर्मियों की तैनाती, संपर्क नंबरों का प्रदर्शन, शिकायतों का रिकॉर्ड और वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी, इन सभी व्यवस्थाओं को एक साथ लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे बच्चों से जुड़े मामलों में पुलिस की शुरुआती प्रतिक्रिया को अधिक व्यवस्थित और संवेदनशील बनाने की दिशा में काम होगा।

