यह ऐतिहासिक परीक्षण ओडिशा के तट पर स्थित व्हीलर द्वीप (अब डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप) से किया गया था. इस लॉन्च ने दुनिया को दिखा दिया कि भारत न केवल अपनी रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भर है. बल्कि किसी भी चुनौती का जवाब देने में सक्षम भी है.
9 अगस्त 2012 को जब अग्नि-2 का परीक्षण किया गया.
करीब 20 मीटर लंबी और 17 टन वजनी अग्नि-2 में अत्याधुनिक इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS) और GPS-आधारित मार्गदर्शन सिस्टम लगी है. जिससे यह अपने लक्ष्य को सटीकता से भेद सकती है.
इसकी मोबाइल लॉन्चिंग क्षमता इसे बेहद लचीला बनाती है. इससे यह देश के अलग-अलग इलाकों में तुरंत तैनात की जा सकती है.
9 अगस्त 2012 को जब अग्नि-2 का परीक्षण किया गया, तो यह पूरी तरह सफल रहा. मिसाइल ने अपने लक्ष्य को सटीकता से साधा, जिसकी पुष्टि रडार और टेलीमेट्री स्टेशनों ने की. यह परीक्षण भारतीय सेना की ऑपरेशनल रेडीनेस की जांच के तहत किया गया था. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस परीक्षण ने यह साबित किया कि भारत की मिसाइल तकनीक और निवारक क्षमता लगातार मजबूत हो रही है और किसी भी संभावित खतरे का मुकाबला करने में सक्षम है.
रणनीतिक महत्व और पड़ोसी देशों पर संदेश
अग्नि-2 का महत्व केवल इसकी तकनीकी क्षमता में नहीं बल्कि इसके रणनीतिक संदेश में भी है. 2,500 किलोमीटर की रेंज का मतलब है कि यह पाकिस्तान के लगभग हर हिस्से और चीन के भी कई सामरिक ठिकानों तक पहुंच सकती है. विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मिसाइल न केवल एक निवारक हथियार है, बल्कि यह भारत की ‘नो फर्स्ट यूज’ नीति को मजबूती देती है. इसके होने से दुश्मन देशों को किसी भी आक्रामक कदम से पहले कई बार सोचना पड़ता है.
अग्नि-2 की सफलता इस बात का भी प्रतीक है कि भारत अपनी रक्षा तकनीक में तेजी से आत्मनिर्भर हो रहा है. इसकी पूरी डिजाइन और विकास प्रक्रिया DRDO और भारतीय उद्योगों द्वारा देश में ही की गई है. यह न केवल विदेशी निर्भरता को कम करता है, बल्कि भारत की रक्षा तकनीक को निर्यातक बनने की दिशा में भी आगे बढ़ाता है.
आगे क्या?
अग्नि-2 जैसे हथियार भारत के रणनीतिक शस्त्रागार की रीढ़ हैं. इसके बाद अग्नि-3, अग्नि-4 और अग्नि-5 जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों के सफल परीक्षण ने भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में ला खड़ा किया है जिनके पास बहु-स्तरीय मिसाइल क्षमता है. अग्नि-2 के 2012 में सफल परीक्षण के बाद से ही भारत ने अपनी मिसाइल तकनीक को लगातार अपग्रेड किया है और अब यह विभिन्न प्लेटफॉर्म से लॉन्च करने की क्षमता भी विकसित कर चुका है.

