Thursday, September 24, 2026
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1 मिठाई के लिए 3 km का बाजार… 150 दुकानें, 100 साल से जुबान पर राज कर रहा MP का ये स्वाद


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Rampur Khurchan Sweet: क्या आप जानते हैं कि मध्य प्रदेश के रामपुर में एक ऐसी पारंपरिक मिठाई बनती है, जिसका स्वाद 100 साल से बरकरार है? पीढ़ियों से चले आ रहे इस खास जायके के मुरीद न केवल देश में हैं, बल्कि इसकी मांग अब अमेरिका तक पहुंच चुकी है. आखिर क्या है इस मशहूर खुरचन का अनोखा रहस्य? जानिए…

Satna News: अगर आप मीठे के शौकीन हैं और कभी मध्य प्रदेश के रामपुर इलाके से गुजरे हैं तो सड़कों के किनारे एक खास मिठाई की धीमी खुशबू आपको अपनी तरफ जरूर खींच लेगी. यहां की मशहूर खुरचन केवल एक मिठाई नहीं बल्कि 100 साल पुरानी परंपरा और बेमिसाल स्वाद की पहचान है. शुद्ध दूध को धीमी आंच पर पकाकर तैयार की जाने वाली यह खुरचन अपने गाढ़े स्वाद और खास बनावट के लिए जानी जाती है. स्थानीय लोगों के अलावा रामपुर आने वाले बाहरी लोग भी इसे चखना नहीं भूलते. यही वजह है कि इस खुरचन की पहचान अब केवल रामपुर तक सीमित नहीं है बल्कि देश-विदेश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंच चुकी है. यहां के परिवारों की पुरानी रेसिपी और वर्षों के अनुभव ने इसे रामपुर की खास शान बना दिया है.

40 साल का अनुभव और माता-पिता से मिली सीख
रामपुरबघेलन क्षेत्र के ग्राम नेमुआ वार्ड नंबर 5 के रहने वाले कमलेश पांडे पिछले 40 से भी ज्यादा सालों से यह मिठाई बेच रहे हैं. लोकल 18 से बातचीत में उन्होंने बताया कि वह अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं जो इस कारोबार में लगी है. उन्होंने खुरचन बनाना अपने माता-पिता से सीखा था. कमलेश ने बताया कि शुरुआत में वह एक स्थायी ढाबा बनाकर खुरचन बेचते थे. फिर बाद में उन्होंने भी सड़क किनारे बाकी दुकानदारों की तरह टीन शेड की दुकान खोल ली. आज वह अपने गांव में बैठ के ही इस टीन शेड की दुकान से बस कम से कम 5 से 10 किलो खुरचन आसानी से बेच लेते हैं और इसके अलावा ऑर्डर में सप्लाई अलग से होती है.

3 किलोमीटर लंबा बाजार और 150 दुकानें 
पांडे जी ने बताया कि यह खुरचन बाजार 100 साल से भी ज्यादा पुराना है जो देश की आजादी से पहले से चला आ रहा है. आज इस तीन किलोमीटर लंबी नेशनल हाईवे की इस रोड में लगभग 150 दुकानें इस खुरचन मार्केट में सजी हुई हैं. पांडे जी ने बताया कि उनका खुद का बनाया खुरचन अमेरिका तक जाता है. वहीं पूरे रामपुर के खुरचन की बात करें तो यह देश के विभिन्न राज्यों के अलावा दुनिया के कई देशों तक सप्लाई किया जाता है.

धीमी आंच और कड़ाही में खुरचन बनाने की आसान प्रक्रिया
इस मशहूर मिठाई को बनाना बेहद सरल और पारंपरिक है. सबसे पहले एक साथ 6 कड़ाहियों को धीमी आंच पर चढ़ा दिया जाता है और हर कड़ाही में एक-एक पाव दूध डाला जाता है. जैसे-जैसे दूध उबलता है उसकी सतह और कड़ाही के किनारों पर मलाई की गाढ़ी परत जमने लगती है. उस मलाईदार परत को कड़ाही के किनारों पर ही चिपकाते जाना होता है. इसके बाद खुरचनी से कुरेदकर मलाई अलग कर ली जाती है और उसमें हल्की शक्कर मिलाई जाती है. फिर यही प्रक्रिया बार-बार दोहराई जाती है और मलाई को खुरच-खुरचकर एक के ऊपर एक रखते जाते हैं इसके साथ ही बीच में शक्कर मिलाते रहते हैं.

रोल और पीसेस वाली खुरचन के प्रकार और दाम
यह खुरचन मिठाई मुख्य रूप से दो प्रकार से तैयार की जाती है. पहला प्रकार है रोल वाली खुरचन जो 600 रुपये किलो मिलती है. इसमें मलाई की सभी परतों को एक साथ रखकर रोल कर दिया जाता है. वहीं दूसरा प्रकार 400 रुपये किलो मिलता है जिसमें मलाई को एक के ऊपर एक रखकर छोटे-छोटे मिठाई के पीसेस में काट लिया जाता है.

महीने की 60000 कमाई और करोड़ों का कारोबार
कमाई के मामले में भी यह व्यवसाय बहुत बड़ा जरिया है. यहां की हर छोटी और मझोली दुकान दिन में 5 किलो खुरचन रोज बेच लेती है, जिससे महीने के हिसाब से 60 हजार रुपये तक की कमाई आसानी से हो जाती है. वहीं कई बड़े कारोबारियों का व्यवसाय तो करोड़ों से ऊपर पहुंच चुका है. रामपुर और आसपास के गांवों के 150 से अधिक परिवार इस व्यापार में लगे हुए हैं. वहीं पूरे क्षेत्र में हजारों लोगों के लिए खुरचन कमाई का मुख्य जरिया है क्योंकि इसके चलते स्थानीय डेयरी व्यापार भी लगातार फल फूल रहा है.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…

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