दिग्गज निवेशक विजय केडिया ने एक ऐसे स्मॉल कैप शेयर में बड़ा दांव लगाया है, जो पिछले एक साल से लगातार दबाव में था. केडिया सिक्योरिटीज ने Zaggle Prepaid Ocean Services के 20 लाख शेयर खरीदे हैं. NSE के बल्क डील डेटा के मुताबिक ये शेयर औसतन ₹164.72 प्रति शेयर के भाव पर खरीदे गए. यानी इस निवेश की कुल वैल्यू करीब ₹33 करोड़ बैठती है.
केडिया की खरीदारी का टाइमिंग इसलिए चर्चा में है क्योंकि Zaggle का शेयर हाल में अपने 52 हफ्ते के निचले स्तर तक पहुंचा था. 18 अगस्त 2026 को शेयर ₹154.36 के 52-वीक लो पर गया था. यानी बाजार में बिकवाली का दबाव था, लेकिन इसी दौरान केडिया सिक्योरिटीज ने बड़ी मात्रा में शेयर खरीद लिए. यही वजह है कि निवेशकों की नजर अब इस स्टॉक पर टिक गई है.
खरीदारी की खबर आते ही शेयर में जोरदार उछाल
केडिया की खरीदारी की खबर के अगले दिन Zaggle के शेयर में जबरदस्त तेजी देखने को मिली. शेयर पिछले बंद भाव ₹165.88 के मुकाबले ₹187.40 पर खुला और कारोबार के दौरान करीब 17.4% उछलकर ₹194.70 तक पहुंच गया. हालांकि बाद में कुछ मुनाफावसूली हुई, लेकिन शेयर फिर भी करीब 12.15% की तेजी के साथ ₹186.04 पर बंद हुआ.
लेकिन शेयर का पुराना रिकॉर्ड डराने वाला है
यहां कहानी का दूसरा पहलू भी समझना जरूरी है. जिस शेयर में केडिया ने खरीदारी की है, उसका प्रदर्शन पिछले एक साल में कमजोर रहा है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक एक साल में शेयर करीब 55% टूट चुका है, जबकि पिछले छह महीनों में गिरावट करीब 50% रही है. यानी केडिया ने किसी तेजी से भागते शेयर का पीछा नहीं किया, बल्कि भारी गिरावट के बाद इसमें एंट्री ली है.
आखिर Zaggle करती क्या है?
अब कंपनी के कारोबार को समझिए. Zaggle Prepaid Ocean Services कॉरपोरेट कंपनियों, SME और स्टार्टअप्स के बिजनेस खर्चों को मैनेज करने के लिए फाइनेंशियल और पेमेंट सॉल्यूशन देती है. कंपनी का फोकस बिजनेस एक्सपेंस मैनेजमेंट को टेक्नोलॉजी और ऑटोमेटेड वर्कफ्लो के जरिए आसान बनाने पर है. यानी कंपनी का कारोबार कॉरपोरेट खर्चों और डिजिटल फाइनेंशियल मैनेजमेंट से जुड़ा है.
क्या केडिया को दिख रही है वापसी की उम्मीद?
बाजार में ऐसे निवेश को अक्सर इस नजर से देखा जाता है कि बड़े निवेशक को कंपनी के मौजूदा वैल्यूएशन या भविष्य की ग्रोथ में संभावनाएं दिखाई दे रही हों. हालांकि सिर्फ किसी बड़े निवेशक की खरीदारी देखकर शेयर खरीदना सही रणनीति नहीं है. कंपनी के नतीजे, वैल्यूएशन, कर्ज, कारोबार की ग्रोथ और भविष्य की कमाई को देखकर ही फैसला करना चाहिए.

