श्रीनगर20 घंटे पहलेलेखक: मुदस्सिर कुल्लू
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जम्मू सिविल सचिवालय-सर्दियों में सरकार का मुख्य दफ्तर।
जम्मू-कश्मीर में ‘दरबार मूव’ की 150 साल पुरानी परंपरा 4 साल बंद रहने के बाद इस बार फिर लौटी है। शुक्रवार को सरकारी दफ्तर बंद होने के बाद सामान और कर्मचारियों के श्रीनगर से जम्मू रवाना होने का सिलसिला शुरू हो गया। सरकारी कार्यालय 3 नवंबर से जम्मू में काम शुरू करेंगे और 6 महीने वहीं रहेंगे।
सीएम सचिवालय और सिविल सचिवालय के सभी अन्य विभागों सहित कुल 39 कार्यालय पूरी तरह जम्मू भेजे जाएंगे, 47 विभाग कैंप के रूप में भेजे जाएंगे। जो विभाग कैंप के तौर पर जाएंगे, वे अपने कुल कर्मचारियों के 33% या 10 अधिकारियों (जो भी कम हों) के साथ काम करेंगे। गर्मी शुरू होते ही ये दफ्तर फिर कश्मीर लौट आएंगे।
यह परंपरा 2021 में उपराज्यपाल ने रोक दी थी, लेकिन अब सीएम उमर अब्दुल्ला ने इसे फिर शुरू किया है। इसके साथ करीब 6 लाख कश्मीरी जम्मू जाएंगे, जिससे जम्मू की सर्दियों की अर्थव्यवस्था को फिर से मजबूती मिलेगी।

कारोबारी बोले- जम्मू लौटी सर्दियों की धड़कन
- होटल और ट्रांसपोर्ट सहित विभिन्न व्यापारी व्यस्त सीजन की तैयारी में जुटे हैं। इनका कहना है कि जम्मू की सर्दियों की धड़कन लौट आई है। दुकानदार राजिंदर गुप्ता कहते हैं, “दरबार मूव बंद होने के बाद बाजार सुनसान हो गए थे। वर्षों तक इन महीनों ने हमारा कारोबार जिंदा रखा। अब फिर उम्मीद लौट आई है।’
- पुराने सचिवालय के पास छोटा सा होटल चलाने वाले सुरेश कुमार ने कहा, ‘परंपरा बंद होने के बाद कमरों की बुकिंग घट गई थी। जब सरकारी कर्मचारी और उनके परिवार आते थे, तो हर कमरा भरा रहता था। सड़कों पर रौनक रहती थी, रेस्तरां व्यस्त रहते थे और हर क्षेत्र में पैसा घूमता था। यह फैसला हमारे लिए वरदान है।’
- अनंतनाग के टैक्सी चालक मोहम्मद यूसुफ ने कहा, ‘यह सिर्फ दफ्तरों के स्थानांतरण की बात नहीं है, बल्कि यह दोनों इलाकों को जोड़ता है। जब कश्मीरी जम्मू में सर्दियां बिताते हैं, तो कारोबार, दोस्ती और समझ बढ़ती है।’ कश्मीर के लोगों में भी यह घोषणा पुरानी यादें और आर्थिक आशा लेकर आई है।
- श्रीनगर में सरकारी कर्मचारी फैजान अहमद ने कहा, ‘यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं थी, यह दोनों क्षेत्रों से जुड़ाव की भावना देती थी। जब दरबार मूव रुका, तो वह संबंध भी टूट गया था। अब ऐसा लगता है जैसे एक पुल फिर से बन गया है।’
दो दिन ट्रैफिक बंद रहेगा

जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44)- कश्मीर को देश से जोड़ने वाला अहम मार्ग।
दरबार मूव के चलते 1 और 2 नवंबर को जम्मू से श्रीनगर की ओर वाहनों की आवाजाही पर रोक रहेगी। ट्रैफिक पुलिस ने बताया कि इन दो दिनों में सिर्फ छोटे वाहन दोनों ओर से चल सकेंगे। वहीं, श्रीनगर से जम्मू की ओर सरकारी रिकॉर्ड और कर्मचारियों के वाहनों को नियंत्रित तरीके से जाने की अनुमति होगी।
जानिए क्या है दरबार मूव
जम्मू-कश्मीर की ये परंपरा 150 साल पुरानी है। इसे 1872 में डोगरा शासक महाराजा रणबीर सिंह ने शुरू किया था। उस वक्त घाटी की सर्दियां बहुत कठोर होती थीं, इसलिए शासन को ठंड में श्रीनगर से जम्मू और गर्मियों में वापस जम्मू से श्रीनगर ले जाया जाता था।
इस व्यवस्था के तहत हर साल सरकारी दफ्तर, फाइलें, कंप्यूटर और करीब 10 हजार कर्मचारी एक शहर से दूसरे शहर शिफ्ट होते हैं। पूरा सामान सैकड़ों ट्रकों में भरकर लगभग 300 किलोमीटर दूर भेजा जाता है।
दरबार मूव सिर्फ राजधानी बदलने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि जम्मू और कश्मीर के बीच जुड़ाव की परंपरा है। यह दोनों क्षेत्रों के लोगों, कारोबार और संस्कृति को जोड़ने का प्रतीक मानी जाती है।

