Bihar Unique Codeword Litti: राजधानी पटना में लिट्टी-चोखा के शौकीनों की कमी नहीं है. यहां गली-मोहल्लों से लेकर बड़े बाजारों तक लिट्टी की कई दुकानें मिल जाएंगी, लेकिन क्या आपने कभी ऐसी दुकान के बारे में सुना है जहां लिट्टी खाने के लिए आपको अपना ऑर्डर नंबरों में देना पड़े? कोई 225 बोलता है तो कोई 325. पहली बार सुनने वालों को ये नंबर भले ही किसी पहेली जैसे लगें, लेकिन यहां के पुराने ग्राहकों के लिए यही लिट्टी ऑर्डर करने का खास अंदाज है. इतना ही नहीं, यहां लिट्टी बनाने का तरीका भी आम दुकानों से बिल्कुल अलग है. आटा पानी से नहीं, बल्कि दूध से गूंथा जाता है. यही वजह है कि पटना की इस करीब 45 साल पुरानी दुकान पर आज भी लिट्टी के शौकीन खिंचे चले आते हैं.
225 और 325 का क्या है चक्कर?
इस दुकान पर लिट्टी खाने पहुंचते ही सबसे पहले जो चीज आपका ध्यान खींचेगी, वह है ऑर्डर देने का अनोखा तरीका. यहां ग्राहक सीधे यह नहीं कहते कि हमें दो या तीन लिट्टी चाहिए. इसके बजाय कोई 225 बोलता है तो कोई 325. सुनने में ये नंबर किसी खास कोड जैसे लगते हैं, लेकिन इनके पीछे का गणित बेहद आसान है.
दरअसल, यहां लिट्टी को बटर में फ्राई करके परोसा जाता है. दुकानदार भोला कुमार ने बताया कि 225 का मतलब है दो लिट्टी और 25 ग्राम बटर, जबकि 325 का मतलब है तीन लिट्टी और 25 ग्राम बटर. इसी तरह ग्राहक अपनी पसंद के हिसाब से लिट्टी और बटर की मात्रा तय कर सकते हैं. किसी को 50 ग्राम बटर चाहिए तो कोई 100, 150 या 200 ग्राम तक बटर में अपनी लिट्टी फ्राई करवाता है. यानी यहां सिर्फ लिट्टी खाने का नहीं, बल्कि अपने स्वाद के हिसाब से उसे तैयार करवाने का भी पूरा इंतजाम है. दुकान का यह कोडवर्ड वाला अंदाज पुराने ग्राहकों के बीच इतना लोकप्रिय है कि वे बिना किसी उलझन के अपना ऑर्डर दे देते हैं.
पानी नहीं, दूध से गूंथा जाता है लिट्टी का आटा
लिट्टी की असली पहचान उसके स्वाद और सोंधी खुशबू में छिपी होती है. लेकिन इस दुकान में लिट्टी को खास बनाने की तैयारी आटा गूंथने के साथ ही शुरू हो जाती है. आमतौर पर लिट्टी बनाने के लिए आटे में पानी मिलाया जाता है, मगर यहां कारीगर दूध का इस्तेमाल करते हैं. दुकान में एक बार में करीब 30 से 35 किलो आटा गूंथा जाता है, जिसके लिए लगभग 20 किलो दूध का इस्तेमाल होता है. जब कारीगर से पूछा कि आटा पानी की जगह दूध से क्यों गूंथा जाता है, तो उनका सीधा जवाब था कि इससे खाने में अच्छा लगता है.
चोखा भी ऐसा कि मसालों का अंदाज कर देगा हैरान
लिट्टी के साथ चोखा न हो तो बिहारी स्वाद की बात अधूरी रह जाती है. इस दुकान में चोखा तैयार करने का तरीका भी काफी अलग है. यहां बैंगन और टमाटर को उबालकर उसमें उबले हुए आलू मिलाए जाते हैं. इसके बाद शुरू होता है मसालों का खेल. चोखे में जीरा, गोलकी, भुनी मिर्च, लहसुन, धनिया पत्ता और दूसरे मसालों के साथ हाजमोला पाउडर भी मिलाया जाता है. इन सामग्रियों को अच्छी तरह मिलाकर चोखे को खास स्वाद दिया जाता है. कारीगर की मानें तो यहां चोखा बनाने के लिए एक बार में करीब 40 किलो आलू, 20 किलो बैंगन और 15 किलो टमाटर का इस्तेमाल किया जाता है. आखिर में, सरसों का तेल भी मिलाया जाता है. इतनी बड़ी मात्रा में चोखा तैयार होने से अंदाजा लगाया जा सकता है कि दुकान पर लिट्टी के साथ चोखे की भी अच्छी मांग रहती है.
45 साल पुरानी दुकान, बचपन से स्वाद ले रहे ग्राहक
इस दुकान की खासियत सिर्फ लिट्टी बनाने का तरीका या ऑर्डर देने का कोडवर्ड नहीं है, बल्कि इसके साथ जुड़ी लोगों की पुरानी यादें भी हैं. यहां आने वाले कुछ ग्राहक ऐसे हैं जो बचपन से लिट्टी खाने के लिए पहुंच रहे हैं. इस लिट्टी दुकान का नाम गोपी कृष्णा लिट्टी भंडार है. इसको 1981 में गोपी कृष्णा जी ने शुरू किया था. आज भी वे अपने बेटे भोला के साथ इस दुकान को चलाते हैं.
पटना में कहां मिलेगी यह खास लिट्टी?
अगर आप भी दूध से गूंथे आटे और बटर में फ्राई की गई लिट्टी का स्वाद चखना चाहते हैं, तो आपको पटना के जीपीओ गोलंबर के पास पहुंचना होगा. यहां मल्टीमॉडल हब से सटे सबवे के एंट्री पॉइंट पर, कबाड़ी मार्केट में पीपल के पेड़ के पास गोपी कृष्णा जी की यह दुकान मौजूद है. दुकान पर लिट्टी खाने का समय शाम 4:30 बजे से रात 10:30 बजे तक बताया गया है. इसलिए अगर आप यहां जाने का प्लान बना रहे हैं, तो शाम के समय पहुंचना बेहतर रहेगा.

