Saturday, April 11, 2026
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800 साल पुरानी दरगाह को गिराना क्यों… महरौली में DDA के एक्शन पर SC की रोक


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SC Order on Mehrauli Dargah: सूफी संत बाबा शेख शहीबुद्दीन को मानने वाले लोगों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने महरौली में स्थित उनकी 800 साल पुरानी आशिक अल्लाह दरगाह और चिल्लागाह पर डीडीए को बड़ा…और पढ़ें

800 साल पुरानी दरगाह को गिराना क्यों... महरौली में DDA के एक्शन पर SC की रोकमहरौली में स्थित सूफी संत बाबा शेख शहीबुद्दीन उर्फ आशिक अल्लाह की 800 साल पुरानी दरगाह के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा आदेश दिया.
दिल्ली के महरौली में स्थित सूफी संत बाबा शेख शहीबुद्दीन उर्फ आशिक अल्लाह की 800 साल पुरानी दरगाह के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा आदेश दिया. अदालत ने आशिक अल्लाह दरगाह और चिल्लागाह को ऐतिहासिक धरोहर मानते हुए उसके मौजूदा स्वरूप को संरक्षित रखने और किसी भी तरह का नया निर्माण या परिवर्तन न करने का निर्देश दिया.

दरअसल याचिका में दलील दी गई थी कि यह दरगाह 13वीं सदी की ऐतिहासिक धरोहर है, जिसका जिक्र भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट में भी ‘प्राचीन स्मारक’ के रूप में किया गया है. याचिकाकर्ताओं ने कहा कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के बुलडोजर एक्शन से इस धरोहर को नुकसान पहुंचने का खतरा है.

सुप्रीम कोर्ट के सवाल पर क्या बोली DDA?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया… ‘आप इसे गिराना क्यों चाहते हैं?’ इस पर DDA की ओर से पेश वकील ने कहा कि दरगाह को नहीं, बल्कि उसके आसपास हुए अवैध निर्माणों को हटाया जा रहा है.

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वर्तमान ढांचे में कोई बदलाव या नया निर्माण नहीं होना चाहिए और इसे संरक्षित रखा जाए. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मामला धार्मिक समिति को नहीं भेजा जा सकता, क्योंकि दरगाह के भीतर अतिक्रमण का कोई मुद्दा नहीं है. साथ ही, कोर्ट ने एएसआई को आदेश दिया कि वह दरगाह की निगरानी, मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी ले.

कोर्ट ने सभी अपीलों का निपटारा करते हुए कहा कि ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की आड़ में अवैध निर्माणों को संरक्षण नहीं मिल सकता. अदालत ने साफ किया कि जो संरचना ऐतिहासिक धरोहर के रूप में मौजूद है, वही सुरक्षित रहेगी.

कौन थे आशिक अल्लाह?

शेख शहीबुद्दीन (आशिक अल्लाह) के मकबरे और चिल्लागाह पर लगे एक शिलालेख के अनुसार इसका निर्माण 1317 ईस्वी में हुआ था. शहीबुद्दीन को संत माना जाता है और वे सूफी संत कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी के सहायकों में से एक थे.

उनका मकबरा राय पिथोड़ा (पृथ्वीराज चौहान) के गढ़ के रणजीत द्वार के पश्चिम में स्थित है, जो एक संरक्षित स्मारक है. शेख फ़रीदुद्दीन काकी के प्रमुख शिष्य थे. चिल्लागाह मुस्लिम संतों का ध्यान स्थल हुआ करता था.

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Saad Omar

An accomplished digital Journalist with more than 13 years of experience in Journalism. Done Post Graduate in Journalism from Indian Institute of Mass Comunication, Delhi. After Working with PTI, NDTV and Aaj T…और पढ़ें

An accomplished digital Journalist with more than 13 years of experience in Journalism. Done Post Graduate in Journalism from Indian Institute of Mass Comunication, Delhi. After Working with PTI, NDTV and Aaj T… और पढ़ें

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