65 लाख की लैंड रोवर 8 लाख में और 45 लाख की मर्सिडीज सवा 4 लाख में। इतने सस्ते दाम में ये सेकंड हैंड लग्जरी कारें में दिल्ली-एनसीआर के लोग बेच रहे हैं।
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वजह है- 1 नवंबर से 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों को वहां पेट्रोल-डीजल नहीं दिया जाएगा। कम कीमत के कारण राजस्थान में भी इन गाड़ियों की डिमांड बढ़ी है।
दिल्ली-एनसीआर या किसी अन्य दूसरे स्टेट की सेकंड हैंड कार खरीदना क्या फायदे का सौदा है? क्या पूरे राजस्थान में इन वाहनों का उपयोग किया जा सकता है?
एक्सपर्ट व परिवहन विभाग के अधिकारियों से बात कर भास्कर ने राजस्थान में परिवहन के नियमों को समझने की कोशिश की।
मर्सिडीज और लैंड रोवर जैसी कार सस्ते में
दिल्ली में 1 नवंबर से 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों को ईंधन नहीं दिया जाएगा। ये नियम दिल्ली के अलावा गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, गाजियाबाद और सोनीपत में भी लागू होगा।
दिल्ली में पुराने वाहनों पर प्रतिबंध लगने के डर से लग्जरी कारों सहित पुरानी गाड़ियां सस्ती मिल रही हैं। दिल्ली के बिजनेसमैन नितिन गोयल को पिछले महीने ही अपनी दो लग्जरी गाड़ियों को बेहद कम कीमत में बेचना पड़ा।
नितिन ने 2013 मॉडल की लैंड रोवर 65 लाख और मर्सिडीज (सी क्लास 220 सीडीआई स्पोर्ट्स मॉडल लिमिटेड एडिशन) दस साल पहले 40 लाख में खरीदी थी।
दिल्ली के बिजनेसमैन नितिन गोयल को अपनी दोनों लग्जरी कारें सस्ते में बेचनी पड़ीं।
लैंड रोवर कार केवल 80 हजार किलोमीटर ही चली थी। नितिन का कहना है कि दूसरे स्टेट के लोगों को भी पता है कि अब दिल्ली में गाड़ियां चल नहीं सकती।
ऐसे में लैंड रोवर 8 लाख रुपए में बेचनी पड़ी। वहीं, मर्सिडीज को मारुति कार के बेस मॉडल की कीमत में सवा 4 लाख रुपए में बेचना पड़ा। जबकि इस नई कार की जयपुर में ऑन रोड प्राइस (कार देखो डॉट काॅम) पर करीब 67 लाख रुपए है।
क्या राजस्थान में चल सकते हैं दिल्ली नंबर के वाहन
परिवहन विभाग के ज्वॉइंट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर जगदीश प्रसाद बैरवा का कहना है कि 10 साल पुरानी डीजल गाड़ियों का राजस्थान में रजिस्ट्रेशन किया जाता है।
लेकिन इसके लिए पहले गाड़ी मालिक को दिल्ली सरकार से एनओसी (No Objection Certificate) लेनी होगी। ये एनओसी गाड़ी रजिस्ट्रेशन की वैलिडिटी खत्म होने से पहले ली जानी चाहिए।
एनओसी मिलने पर राजस्थान के निवासी या फिर यहां काम कर रहा व्यक्ति राजस्थान में गाड़ी का रजिस्ट्रेशन करा सकता है। इसके बाद ही राजस्थान में इन वाहनों का कानूनी रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है।

दूसरे स्टेट के वाहनों पर लगता है भारी जुर्माना
जयपुर आरटीओ (प्रथम) राजेंद्र सिंह शेखावत कहते हैं कि कुछ लोग टैक्स बचाने के लिए दूसरे स्टेट के वाहनों का प्रदेश में रजिस्ट्रेशन नहीं कराते हैं। टैक्स जमा नहीं कराने वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है।
ऐसे कई वाहनों की टैक्स लायबिलिटी 20 से 22 लाख रुपए तक निकली है। इस पर जब वाहन मालिक ने जुर्माना राशि जमा नहीं कराई तो वाहन जब्त कर लिया। हरियाणा नंबर की ऑडी व कई लग्जरी कारें आज भी परिवहन विभाग में खड़े हैं।
उन्होंने बताया कि नियमानुसार अगर दूसरे स्टेट का कोई वाहन राजस्थान में एक महीने से अधिक समय के लिए राज्य की सीमा में चलता है तो उसे यहां नियमानुसार टैक्स जमा करवाना होता है।
टैक्स नहीं देने की स्थिति में परिवहन विभाग जुर्माना और कर वसूलता है। जुर्माना नहीं जमा कराने पर वाहन जब्त कर लिया जाता है।
इन दो जिलों में जब्त होंगे पुराने वाहन
परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर में प्रतिबंधित गाड़ियां पूरे राजस्थान में नहीं चल सकती। अलवर व भरतपुर जिले एनसीआर क्षेत्र में आते हैं।
ऐसे में राजस्थान में रजिस्टर होने के बावजूद दिल्ली के पुराने वाहन यहां नहीं चलाए जा सकते। इन वाहनों को रजिस्ट्रेशन, फिटनेस, पॉल्यूशन प्रमाण-पत्र नहीं मिलता।
यानी वाहन एनसीआर क्षेत्र में नहीं चल सकते। यदि पुराने वाहन सड़क पर दिखाई दें तो उन्हें जब्त किया जा सकता है। राजस्थान ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के नियमों के अनुसार दिल्ली में रजिस्टर्ड पुराने वाहनों का अलवर और भरतपुर जिलों को छोड़कर अन्य जिलों में रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है।

जयपुर में बैन हैं 15 साल पुराने कमर्शियल वाहन
आरटीओ राजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि राजस्थान में 15 साल पुराने पेट्रोल और 10 साल पुराने डीजल के निजी वाहनों पर ऐसा कोई बैन नहीं है।
लेकिन जयपुर में 15 साल पुराने डीजल के कमर्शियल वाहनों पर रोक है। अभी इन्हें जब्त कर स्क्रैप नहीं किया जा रहा है। इन पर केवल जुर्माना लगाया जाता है।
हालांकि वाहन मालिक जयपुर में समय सीमा खत्म होने से पहले इन वाहनों का अन्य जिलाें में पंजीयन कराकर इससे बच सकते हैं।
6 महीने में सवा करोड़ से अधिक का जुर्माना वसूला
जयपुर आरटीओ (प्रथम) राजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि विभाग ने नियमों की पालना नहीं करने वाले दूसरे स्टेट के वाहनों के पिछले छह महीने में 6 हजार 724 चालान किए।
इसमें से 4 हजार 184 वाहनों से 8 करोड़ 25 लाख 94 हजार 479 रुपए वसूले गए। वहीं, 2 हजार 540 वाहनों पर 1 करोड़ 58 लाख 72 हजार 774 रुपए का जुर्माना व कर अभी बकाया है।
राजेंद्र सिंह ने बताया कि दूसरे स्टेट के वाहनों को सीधे खरीदकर यहां नहीं चलाया जा सकता। पहले वाहन मालिक को राजस्थान RTO में ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी करनी होगी। बिना लोकल रजिस्ट्रेशन और टैक्स चुकाए गाड़ी चलाना अवैध होगा।
बिना रजिस्ट्रेशन दूसरे स्टेट की गाड़ी को प्रदेश में चलाते हुए पकड़े जाने पर भारी जुर्माने का प्रावधान है। ये कई बार सेकंड हैंड गाड़ी की कीमत से भी कई गुना अधिक होता है।
परिवहन विभाग में ऐसे कई वाहन खड़े हैं जिन्हें भारी जुर्माना जमा नहीं कराने पर जब्त कर लिया गया। इनमें ऑडी जैसे लग्जरी वाहन भी शामिल हैं।

आसान व ऑनलाइन है रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया
आरटीओ राजेंद्र सिंह शेखावत का कहना है कि परेशानी और जुर्माने से बचने के लिए दूसरे स्टेट के वाहनों का प्रदेश में रजिस्ट्रेशन कराना चाहिए। इसके लिए परिवहन विभाग के ऑफिस में अलग से व्यवस्था की गई है।
जयपुर में रजिस्ट्रेशन कराने वाले आरजे 14, आरजे 60 और आरजे 59 सीरीज में से अपने पसंदीदा नंबर ले सकते हैं। इसी तरह की व्यवस्था अन्य जिलाें में भी है।
वाहन ट्रांसफर के लिए एनओसी (No Objection Certificate) लेना अनिवार्य है। उसके बाद राजस्थान RTO में फिटनेस, बीमा, रोड टैक्स जमा कर वाहन का ट्रांसफर एवं रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करनी होती है। अगर दस्तावेज पूरे हैं तो ये प्रक्रिया बेहद आसान है।
दूसरे स्टेट से सेकंड हैंड वाहन खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान–
- संबंधित राज्य की एनओसी (No Objection Certificate) होना जरूरी है। इसके बिना रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकता।
- वाहन का फिटनेस और पॉल्यूशन सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है।
- वाहन मालिक को RTO में आवेदन देकर NOC, बीमा, फिटनेस सर्टिफिकेट और रोड टैक्स जमा कराकर राजस्थान में नया रजिस्ट्रेशन नंबर लेना होगा।
- वाहन चोरी या किसी केस से जुड़ा तो नहीं है। इसकी जानकारी VAHAN पोर्टल पर चेक कर सकते हैं।
- 15 साल के बाद वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट रिन्यू कराना अनिवार्य है। RTO में फिजिकल चेकअप के बाद यह मिलता है।
- वाहन खरीदते समय इंजन की हालत, सर्विस हिस्ट्री, आरसी और बीमा दस्तावेज की जांच कर लें।
- वाहन की RC में ‘Scrap’ दर्ज है तो वह वाहन अब रोड पर नहीं चल सकता। उसे केवल पार्ट्स या स्क्रैप के रूप में बेचा जा सकता है।
अब कुछ जरूरी सवालों के जवाब?
सवाल : कोई व्यक्ति दूसरे स्टेट से निजी व्हीकल से राजस्थान घूमने आए, क्या तब भी टैक्स देना होगा?
जवाब : एक महीने से अधिक समय के लिए दूसरे स्टेट से आते हैं या यहां आकर रहते हैं तो टैक्स जमा कराना होता है। लेकिन कोई निजी वाहन से घूमने आए और कुछ दिन में वापस लौट जाए तो उसे टैक्स नहीं देना होता।
राजस्थान मोटर वाहन कर नियम 1951 के अनुसार 30 दिनों से अधिक समय तक राजस्थान में रहने वाले दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड निजी वाहन पर टैक्स का भुगतान करना होता है।
यदि वाहन 30 दिनों के बाद भी राज्य में रहता है और टैक्स नहीं दिया गया है, तो उसे जब्त किया जा सकता है। इसके साथ ही वाहन मूल्य के लगभग 10% के आधार पर रोड टैक्स का भुगतान करना होता है।
यदि कोई व्यक्ति निजी वाहन लेकर कुछ दिनों के लिए (30 दिन से कम) पर राजस्थान में हैं, तो टैक्स नहीं देना होगा।

परेशानी और जुर्माने से बचने के लिए दूसरे स्टेट के वाहनों का प्रदेश में रजिस्ट्रेशन कराना चाहिए। इसके लिए परिवहन विभाग के ऑफिस में अलग से व्यवस्था की गई है।
सवाल : राजस्थान में रजिस्टर्ड होने के बाद अगर 10 साल से पुरानी डीजल गाड़ी लेकर एनसीआर में किसी जगह जाएं तो क्या चालान कटेगा? कितना जुर्माना लगेगा? जवाब : राजस्थान में रजिस्टर्ड 10 साल पुरानी डीजल कार लेकर अगर आप एनसीआर में जाते हैं, तो वहां वाहन जब्त कर 10 हजार रुपए जुर्माना लगाया जा सकता है। दिल्ली सरकार से एनओसी लेकर गाड़ी राजस्थान में रजिस्टर्ड (non‑NCR इलाके) कराने के बावजूद एनसीआर क्षेत्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
सवाल : राजस्थान में रजिस्टर्ड गाड़ियों के लिए दिल्ली-एनसीआर में क्या नियम है? जवाब : दिल्ली-एनसीआर में 10 साल से पुरानी डीजल गाड़ियों को चलाना प्रतिबंधित है। चाहे वे राजस्थान, यूपी या किसी भी राज्य में रजिस्टर्ड हो।
वहीं, एनसीआर के गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, गाजियाबाद और सोनीपत में पुरानी गाड़ियों को 1 नवंबर से सीज किया जाएगा। यह नियम 2015 में NGT द्वारा जारी किया गया और 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए थे।

राजस्थान में पिछले कुछ दिनों में बाहर के नंबर वाली गाड़ियों पर भारी-भरकम जुर्माना किया गया है।
सवाल : राजस्थान में रजिस्टर्ड गाड़ियों के लिए दिल्ली-एनसीआर में क्या नियम है? जवाब : राज्य में भी केंद्र सरकार की वाहन स्क्रैप नीति के नियम ही लागू हैं। इसके तहत 20 साल पुराने पेट्रोल या डीजल के निजी वाहन यदि फिटनेस टेस्ट में फेल हो जाते हैं तो उन्हें स्क्रैप किया जा सकता है।
साथ ही प्रदूषण तथा सड़क सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करने वाले वाहनों का रजिस्ट्रेशन रिन्यू नहीं किया जाएगा। कमर्शियल वाहनों के लिए ये समय सीमा 15 साल है। यदि कोई वाहन फिटनेस टेस्ट में पास हो जाता है, तो उसे आगे भी चलाया जा सकता है।

