काशी में जन्म लेने के 3 घंटे बाद श्रीकृष्ण बाल स्वरूप में बाबा विश्वनाथ के दर्शन करेंगे। लड्डू गोपाल जब गर्भगृह में दर्शन के लिए पहुंचेंगे। उस वक्त बाबा मंगला स्वरूप में होंगे।
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श्रीकृष्ण को नजर न लगे, इसलिए बाबा विश्वनाथ एक पानी से भरी चांदी की थाली में उनका प्रतिबिंब रखेंगे। कान्हा बाबा की मंगला आरती में शामिल हाेंगे।
लड्डू गोपाल को जिस पंचामृत से स्नान करवाया जाएगा, उसे प्रसाद के स्वरूप में भक्तों के बीच बांटा जाएगा। लड्डू गोपाल को सत्यनारायण मंदिर में रात्रि विश्राम कराया जाएगा।
काशी विश्वनाथ मंदिर में यह दूसरा अवसर होगा, जब जन्माष्टमी को कान्हा को काशी पुराधिपति के पास पालने पर विराजमान किया जाएगा। लाखों भक्त लड्डू गोपाल और बाबा विश्वनाथ को एक साथ माथा टेक सकेंगे। 16 अगस्त को भक्तों के बड़ा मौका होगा, जब उन्हें बाबा विश्वनाथ और श्रीकृष्ण के एक साथ ऑनलाइन दर्शन होंगे।
काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में एक दिन पहले से श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। जन्म के साथ बधाइयां गूंजेंगी, तो मंगला आरती में बाबा विश्वनाथ मोरपंखी धारण कर लेंगे। भव्य शोभायात्रा के साथ बाबा विश्वनाथ का महाअभिषेक के बाद भगवान कृष्ण को पालने में बैठाकर झूला झुलाया जाएगा।
मंगला आरती में महादेव और भगवान कृष्ण एक साथ भक्तों को दर्शन देंगे। धाम में हरि की अद्भुत अद्वितीय अपूर्व छटा ने भक्तों का मन मोह लेगी। जन्म के बाद मंगल गीत गाए जाएंगे और लड्डू गोपाल को पंचामृत से अभिषेक कराने के बाद भक्तों में प्रसाद का वितरण हजारों भक्तों में होगा।
पुरोहितों के अनुसार जन्म के कुछ घंटे बाद लड्डू गोपाल को मंदिर के अर्चक पालने में गर्भगृह में ले जाएंगे और कान्हा अपने प्रिय बाबा विश्वनाथ के मंगला स्वरूप के दर्शन करेंगे। लड्डू गोपाल और बाबा विश्वनाथ के एक साथ दर्शन देश ही नहीं दुनिया भर के सनातनधर्मी भी ऑनलाइन करेंगे।
भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव शिव की नगरी में धूमधाम से मनाया जाएगा। लगातार दूसरे साल काशी विश्वनाथ धाम में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। जन्म के वई घंटे बाद ही लड्डू गोपाल बाबा विश्वनाथ के मंगला स्वरूप के दर्शन करेंगे और बाबा विश्वनाथ पानी की थाल में लड्डू गोपाल के दर्शन करेंगे।
लड्डू गोपाल को सत्यनारायण मंदिर में रात्रि विश्राम कराया जाएगा। जन्म के ढाई घंटे के बाद भगवान लड्डू गोपाल को बाबा विश्वनाथ की मंगला आरती में विराजमान कराया जाएगा। लड्डू गोपाल बाबा विश्वनाथ के मंगला स्वरूप का दर्शन करेंगे। एसडीएम शंभूशरण ने बताया कि पिछले साल की तरह ही विश्वनाथ मंदिर में लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव मनाया जाएगा।

मंदिर में निभाई जाएगी यशोदा की परंपरा
जन्माष्टमी भव्यता के साथ मनाया जाएगा। श्री कृष्ण जन्म का उत्सव से पहले धाम से मथुरा के उपहार सामग्री भेजी गई है। भगवान श्री कृष्ण जन्म लेने के बाद सुबह होने वाली मंगला आरती में विश्वनाथ जी के साथ गर्भगृह में विराजमान होंगे।
मंदिर के मुख्य कार्यपालिका अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा ने बताया कि पुराणों के अनुसार जिस तरह से भगवान कृष्ण के जन्म के बाद साक्षात शिव उनके दर्शन के लिए पहुंचे थे, लेकिन उनकी माताजी ने शिव से कृष्ण की परछाई देखने के लिए कहा था ताकि भगवान शिव का विकराल रूप देखकर बच्चा डर ना जाए।
उन्हीं परंपराओं का निर्वहन करते हुए हमने भी भगवान भोलेनाथ के मंदिर में श्री कृष्ण के जन्म उत्सव को मना कर भोलेनाथ को श्री कृष्ण के दर्शन करवाने का काम किया। यह अद्भुत और अलौकिक पल था जिसका साक्षी मंदिर में मौजूद हर व्यक्ति बनेगा।
जन्मोत्सव पर 12 बजे होगी आरती, मंदिर में अन्य अनुष्ठान
काशी सावन के बाद अपने नटखट बाल गोपाल कान्हा का जन्मदिन मनाने को आतुर है। बाबा विश्वनाथ के दरबार में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म उत्सव की धूम काशी विश्वनाथ मंदिर में दिखेगी, प्रशासन विशेष तैयारी कर रहा है। धाम स्थित मंदिर चौक में श्री लड्डू गोपाल के अभिषेक एवं जन्म अनुष्ठान का समारोह आयोजित होगा। जन्मोत्सव का आयोजन 16 अगस्त की रात्रि 11:00 बजे से प्रारंभ होकर मध्यरात्रि पश्चात दिनांक 17 अगस्त को प्रातः 12:05 तक विधि-विधान पूर्वक से होगा। इसके बाद 2.30 बजे पट खुलने के साथ ही 3 बजे मंगला आरती होगी।
काशीविश्वनाथ ने लड्डू गोपाल को भेजा उपहार
श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर आज श्री काशी विश्वनाथ की ओर से कान्हा के लिए उपहार भेजे गए। विश्वनाथ धाम से श्री कृष्ण जन्मस्थान के लिए विशेष उपहार, कान्हा की पोशाकें, चाकलेट, लड्डू, फल, मिठाइयां और धाम की मंगल वस्तुएं भेजी गई।
सबसे पहले न्यास कार्यालय से डमरू दल के साथ अर्चक की टोली उपहार सामग्री लेकर धाम के मुख्य परिसर में पहुंचे। मंदिर में मंगल मंत्रोच्चार के बीच बाबा के गर्भगृह में सभी उपहार पहुंचाए गए।
जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल के लिए तैयार किए गए विशेष उपहार सामग्री को विश्वेश्वर महादेव के समक्ष रखा गया। वैदिक श्लोकों के बीच विधिपूर्वक पूजित कर भगवान विश्वेश्वर से अवलोकित कराया गया। बाबा को सभी उपहारों के बारे में बताया गया।
पूजा-अर्चना एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ परिसर में अदभुत दृश्य रहा। पूरा परिसर हर हर महादेव और जय श्री कृष्ण के जयघोष से गूंज उठा। इसके बाद सामग्री श्रीकृष्ण जन्मस्थान, मथुरा के लिए रवाना कर दी गई।
मंदिर न्यास के पीआरओ ने बताया कि मथुरा एवं काशी की आध्यात्मिक परंपराएं भारत की चेतना में गहराई से रची-बसी हैं। यह अनुष्ठान परस्पर श्रद्धा, समर्पण और सांस्कृतिक आदान-प्रदान करता है। मथुरा से रंगभरी एकादशी पर उपहार आते हैं।

