Saturday, April 11, 2026
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15 लाख के लिए बेटे को जीते जी मार डाला: मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाकर क्लेम के लिए रची साजिश, गांववाले भुजरिया देने पहुंचे तो जिंदा मिला ‘नर्मदा’ – narmadapuram (hoshangabad) News


नर्मदापुरम जिले के उमरधा गांव से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां राजेंद्र कुशवाह और उनके भाई हल्के भैया ने बीमा के 15 लाख रुपये हड़पने के लिए अपने जिंदा बेटे नर्मदा को कागजों में मृत घोषित कर दिया। उन्होंने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया

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इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब गांव वाले राखी के बाद ‘भुजरिया’ देने उनके घर पहुंचे और उन्हें पता चला कि नर्मदा जीवित है। पंचायत ने तत्काल बीमा कंपनी को सूचित किया, जिसकी जांच में पिता और चाचा द्वारा किए गए इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ।

जनपद पंचायत सीईओ ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। वहीं, पिता और चाचा अपने बेटे को लेकर गांव से भाग गए हैं। पुलिस ने मामला दर्ज करने से इनकार करते हुए विभागीय जांच की बात कही है।

चार माह बाद राखी पर खुला मामला

उमरधा में राजेंद्र कुशवाह अपने दो भाइयों के साथ रहते हैं। राजेंद्र का बेटा नर्मदा ट्रैक्टर ड्राइवर था। दो साल पहले ट्रैक्टर के नीचे दब जाने से उसकी रीढ़ की हड्डी और निचला हिस्सा टूट गया, जिसके कारण वह बिस्तर पर है। नर्मदा ने एलआईसी पॉलिसी ली थी, साथ ही श्रीराम फाइनेंस से लोन लेकर एक ट्रैक्टर भी खरीदा था।

दुर्घटना के बाद से ट्रैक्टर की किस्त जमा नहीं हो पा रही थी। तभी किसी एजेंट ने उन्हें बीमा क्लेम का लालच दिया। इस लालच में आकर पिता राजेंद्र कुशवाह और चाचा हल्के भैया ने 27 मार्च की रात को बेटे नर्मदा कुशवाह की सामान्य मृत्यु होना बताते हुए अंतिम संस्कार साड़िया घाट पर करने की जानकारी दी।

मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए 10 अप्रैल को पिता ने आवेदन दिया और 12 अप्रैल को मृत्यु प्रमाणपत्र जारी भी हो गया। इस बीच उन्होंने बीमा क्लेम में आवेदन देने के साथ ही फाइनेंस कंपनी को बेटे की मृत्यु की सूचना देने की योजना बना ली थी, ताकि उन्हें फाइनेंस के रुपये न देने पड़ें। लेकिन, राखी के बाद भुजरियां पर पिता-चाचा का यह झूठा कारनामा उजागर हो गया।

नर्मदा का मृत्यु प्रमाणपत्र 12 अप्रैल को जारी किया गया था।

नर्मदा का मृत्यु प्रमाणपत्र 12 अप्रैल को जारी किया गया था।

भुजरियां देने घर पहुंचे तो परिजन बोले-कोई मृत्यु नहीं हुई

ग्राम पंचायत उमरधा की सरपंच जागृति जूदेव के पिता और आदिवासी राजघराने के राजा महेंद्र सिंह जूदेव ने बताया कि गांव में किसी की मृत्यु होने पर राखी के अगले दिन भुजरियां या होली पर गुलाल डालने जाने की परंपरा है। राजेंद्र कुशवाह के बेटे की मृत्यु की जानकारी होने पर वे और ग्रामीण राखी के अगले दिन भुजरियां देने राजेंद्र कुशवाह के घर पहुंचे। वहां परिवार के सदस्यों ने बताया कि नर्मदा तो जिंदा है और हथवास में है।

इस घटना के बाद मामला उजागर हुआ। ग्राम पंचायत ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के अधिकारियों को मामले की सूचना दी। 29 अगस्त को LIC के अधिकारी जांच करने उमरधा पहुंचे, जहां लोगों से उन्हें पता चला कि नर्मदा कुशवाहा की मृत्यु नहीं हुई है। मौके पर ही बीमा कंपनी के अधिकारियों ने पंचनामा बनाया।

पंचायत ने नर्मदा के पिता और चाचा के कैमरे के सामने बयान दर्ज किए थे।

पंचायत ने नर्मदा के पिता और चाचा के कैमरे के सामने बयान दर्ज किए थे।

जिंदा है बेटा, बीमा क्लेम पाने बनवाया प्रमाणपत्र

पंचायत ने जब राजेंद्र कुशवाह से मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने का कारण पूछा तो उन्होंने लिखित में कथन देते हुए कहा कि नर्मदा का इलाज कराने में काफी रुपये लग रहे थे और वे गरीब हैं, इसलिए बेटे के इलाज के लिए उनके पास पैसे नहीं बचे थे। उन्हें नर्मदा की पॉलिसी की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने अपने भाई हल्के भैया कुशवाह के साथ मिलकर बीमा क्लेम की राशि की जानकारी ली।

एक बीमा एजेंट ने क्लेम दिलाने का वादा किया, जिसके बाद उन्होंने बेटे नर्मदा कुशवाह की 27 मार्च 2025 को मृत्यु होने की झूठी जानकारी देते हुए ग्राम पंचायत में मृत्यु प्रमाणपत्र का आवेदन दिया। दो दिन में उन्हें मृत्यु प्रमाणपत्र मिल गया और उन्होंने क्लेम के लिए एजेंट को आवेदन भी दे दिया था। राजेंद्र कुशवाह ने कहा कि अगर उन्हें क्लेम के करीब 15 लाख रुपये मिलते तो वे सारे रुपये बेटे के इलाज में लगाने वाले थे। उन्होंने यह भी कहा कि उनका बेटा नर्मदा कुशवाह जिंदा है।

शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचे, जांच के बाद होगी कार्रवाई

मामला उजागर होने पर पंचायत में पदस्थ वर्तमान सचिव, ऑपरेटर, उमरधा पंचायत की सरपंच जागृति सिंह जूदेव के पिता महेंद्र सिंह जूदेव 29 अगस्त को बनखेड़ी थाने में झूठी और भ्रामक जानकारी देकर मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने की शिकायत करने पहुंचे। बनखेड़ी थाना प्रभारी विजय सनस ने शिकायत दर्ज नहीं करते हुए कहा कि रिपोर्ट केवल विभागीय जांच के बाद ही दर्ज की जा सकती है। उन्होंने संबंधित विभाग को मामले की जानकारी देने के लिए कहा।

नर्मदा के पिता और चाचा के बयान गांव वालों के सामने में दर्ज किए गए।

नर्मदा के पिता और चाचा के बयान गांव वालों के सामने में दर्ज किए गए।

बेटे को लेकर पिता-चाचा हुआ गायब

मामला सामने आने के एक सप्ताह बाद से राजेंद्र कुशवाह, हल्के भैया कुशवाह और नर्मदा कुशवाह के मोबाइल फोन बंद हैं और उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि नर्मदा कुशवाह के साथ तीनों कहीं छुप गए हैं। 8 अगस्त को दैनिक भास्कर की टीम जब पिपरिया में हथवास स्थित राजेंद्र कुशवाह के घर पहुंची, तो वहां कोई नहीं मिला।

राजेंद्र कुशवाह के मंझले भाई से फोन पर संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि वे भोपाल आए हुए हैं और राजेंद्र काम करने के लिए इंदौर में रह रहे हैं, जहां वे भतीजे नर्मदा कुशवाह को भी साथ लेकर गए हैं। मृत्यु प्रमाणपत्र के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है और न ही उनके पास राजेंद्र और हल्के भैया का मोबाइल नंबर है। उन्होंने यह भी कहा कि उनसे उनकी 20 दिनों से कोई बात नहीं हुई है और अब उन्हें इस विषय में फोन न किया जाए। सूत्रों के अनुसार, राजेंद्र कुशवाह और हल्के भैया ने पिपरिया में किसी किसान के खेत में धान की फसल की रखवाली का काम लिया है और वे वहीं छिपकर रह रहे हैं, जहां उन्होंने बेटे नर्मदा को भी रखा हुआ है।

ग्राम पंचायत उमरधा।

ग्राम पंचायत उमरधा।

घर पहुंचे तो पता चला बेटा जिंदा है

ग्राम पंचायत उमरधा की सरपंच जागृति जूदेव के पिता और आदिवासी राजघराने के राजा महेंद्र सिंह जूदेव ने बताया गांव में किसी के घर भी मृत्यु होने पर राखी के अगले दिन भुजरिया या होली पर गुलाल डालने जाने की परंपरा रहती है। राजेंद्र कुशवाह के बेटे के मृत्यु की जानकारी थी। इसी हिसाब से हम और ग्रामीण राखी के अगले दिन भुजरिया देने राजेंद्र कुशवाह के घर पहुंचे। तब पता चला कि बेटा तो जिंदा है। मामला गंभीर था और हमने भारतीय जीवन बीमा कंपनी और श्रीराम फायनेंस कंपनी को सूचित किया। इसके बाद पंचायत सचिव साहब सिंह पटेल के माध्यम से जनपद पंचायत और थाने सूचना देने भेजा।

पूर्व सचिव बोले- डिजिटल सिग्नेचर से जारी हुआ प्रमाणपत्र

उमरदा पंचायत के पूर्व सचिव ओमप्रकाश पटेल का कहना है कि मेरे पास 3 पंचायतों का प्रभार था। मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए आवेदन नर्मदा के पिता राजेंद्र कुशवाह ने दिया था। पंचायत के ऑपरेटर नारायण पटेल और ग्राम कोटवार ने दस्तावेजों की पुष्टि की। ऑपरेटर ने मुझे सूचना दी कि नर्मदा कुशवाहा का स्वर्गवास हो गया है, उसका मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करना है। जिसके लिए मुझसे ऑपरेटर ने ओटीपी मांगा था।

मृत्य प्रमाणपत्र निरस्त किया, तीन सदस्यीय समिति बनाई

जनपद पंचायत बनखेड़ी की सीईओ रीना कुम्हारिया ने बताया कि पिता, चाचा ने झूठी, भ्रामक जानकारी देकर मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाया है। जानकारी मिलने के बाद मृत्यु प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया है। पिता, चाचा ने लिखकर भी दिया कि बीमा क्लेम की राशि के लिए मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाया था। कोटवार और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के वेरिफिकेशन के आधार पर सचिव मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करते है। 3 सदस्यीय जांच टीम बनाई है। जांच प्रतिवेदन आने पर जो दोषी होगा, उसके खिलाफ उच्चाधिकारियों के निर्देश पर कार्रवाई की जाएगी।

शिकायत मिली थी कि युवक जिंदा है

एलआईसी के पिपरिया ब्रांच मैनेजर अभिजीत सिंह ने बताया नर्मदा कुशवाह के नाम युवक की एक पॉलिसी है। जिसके मृत्यु के संबंध में बीमा भुगतान के लिए मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाया गया हैं। ग्राम पंचायत की तरफ से हमें रिटर्न शिकायत भी मिली थी कि युवक जिंदा है। क्लेम के लिए मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाया गया है। क्लेम संबंधी आवेदन हमें नहीं आया। इसलिए हम धोखाधड़ी की शिकायत नहीं कर पा रहे।

मृत्यु प्रमाणपत्र मामले में गंभीर नहीं अफसर जनपद सीईओ ने जांच के 5 दिन पहले जांच के आदेश दिए थे, लेकिन अब तक टीम ने भी जांच शुरू नहीं की है। जांच अधिकारी मामले में गंभीर नहीं है। जांच टीम के पंचायत इंस्पेक्टर टीकाराम कुमरे का कहना है कि टीम में तीन सदस्य बने है। मीटिंग और अन्य कार्य होने से अब तक हम जांच करने नहीं जा पाएं हैं। कल जिले की बैठक में जाना है। समय मिलने पर दो-तीन दिन में जाएंगे।



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