STAR की स्पीड मैक 1.8 से 2.5 (612–850 मी/सेकंड) तक जाती है. यह समुद्र की लहरों को छूता हुआ उड़ सकता है और 10 किमी ऊंचाई से सीधी डाइव भी कर सकता है. इसकी रेंज 55 से 175 किमी तक है और फ्लाइट टाइम 50 से 200 सेकंड तक. यह सब मिलकर इसे दुनिया के सबसे खतरनाक क्रूज़ मिसाइलों जैसा बना देता है.
DRDO STAR को दो वेरिएंट्स में तैयार कर रहा है- एयर-लॉन्च्ड STAR, जिसे तेजस जैसे फाइटर जेट लेकर जाएंगे, और ग्राउंड-लॉन्च्ड STAR, जिसे ट्रक से कहीं भी तैनात किया जा सकता है. यह इसे वायुसेना, नौसेना और थलसेना, तीनों के लिए बहुउपयोगी बना देता है.
आत्मनिर्भर भारत की छलांग
पहले भारत को ट्रेनिंग के लिए विदेशी टारगेट सिस्टम आयात करने पड़ते थे, लेकिन अब STAR के आने से यह निर्भरता खत्म हो जाएगी. पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बना STAR न सिर्फ कम लागत वाला है बल्कि रीयूजेबल भी है. DRDO के पूर्व प्रमुख जी. सतीश रेड्डी के अनुसार “भारत ने मिसाइल तकनीक में आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है, STAR इसका जीता-जागता सबूत है.”
दुश्मन को संदेश
STAR सिर्फ एक ट्रेनिंग सिस्टम नहीं बल्कि दुश्मनों के लिए सीधा संदेश है. यह बताता है कि भारत न सिर्फ लड़ाई के लिए तैयार है बल्कि युद्ध जैसी स्थिति की हर सटीक नकल भी कर सकता है. पिछले कुछ सालों में भारत का रक्षा उत्पादन 174% बढ़ा है और STAR इस प्रगति का प्रतीक है.
आने वाले कल का हथियार
विशेषज्ञ मानते हैं कि STAR आगे चलकर सिर्फ टारगेट सिस्टम न रहकर एक टैक्टिकल हथियार के रूप में भी विकसित हो सकता है, जो दुश्मन के राडार और निगरानी विमान को निशाना बना सके. यानी STAR अभी से दुश्मन को यह चेतावनी दे रहा है- “होशियार रहो, भारत अब हर चुनौती का जवाब देने के लिए तैयार है.”

