Monday, April 13, 2026
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मूडीज ने बताई भारत की नई रेटिंग, क्‍या हैं इसके मायने, रेटिंग से कैसे होता है इकनॉमी को नफा या नुकसान?


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Moodys Rating : ग्‍लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारत की साख को लेकर एक बार फिर पॉजिटिव रुख दिखाया है. मूडीज ने भारतीय मुद्रा की साख को स्थिर बनाए रखा है. इसका अर्थव्‍यवस्‍था पर क्‍या असर पड़ेगा.

मूडीज ने बताई भारत की नई रेटिंग, क्‍या हैं इसके मायने, कैसे पड़ता है असरमूडीज ने भारत की रेटिंग को स्थिर बनाए रखा है.

नई दिल्‍ली. ग्‍लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज रेटिंग्स ने सोमवार को भारत की नई रेटिंग का ऐलान किया. मूडीज ने भारत के लिए ‘स्थिर’ परिदृश्य के साथ दीर्घकालिक स्थानीय और विदेशी मुद्रा जारीकर्ता रेटिंग और स्थानीय मुद्रा वरिष्ठ असुरक्षित रेटिंग को बीएए3 पर बरकरार रखा है. स्थानीय-मुद्रा और विदेशी-मुद्रा जारीकर्ता रेटिंग किसी देश की समग्र ऋण-पात्रता और दायित्वों को पूरा करने की क्षमता को बताती है. स्थानीय मुद्रा वरिष्ठ असुरक्षित रेटिंग, उधारकर्ता की असुरक्षित ऋण चुकाने की क्षमता को दर्शाती है यह कर्ज लेने वाले की अपनी मुद्रा में ऐसा ऋण होता है जिसके लिए कोई गारंटी नहीं होती.

इसके साथ वैश्विक रेटिंग एजेंसी ने भारत की अन्य अल्पकालिक स्थानीय मुद्रा रेटिंग को भी पी-3 पर कायम रखा है. मूडीज की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि रेटिंग की पुष्टि और स्थिर परिदृष्य हमारे इस विचार को दर्शाते हैं कि भारत की मौजूदा ऋण क्षमताएं बनी रहेंगी. इनमें देश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, मजबूत बाहरी स्थिति और मौजूदा राजकोषीय घाटे के लिए स्थिर घरेलू वित्तपोषण के आधार शामिल है.

टैरिफ के बावजूद तेजी कायम
रिपोर्ट में कहा गया है कि ये मजबूती प्रतिकूल बाहरी रुझानों के प्रति लचीलापन प्रदान करती है. खासकर जब उच्च अमेरिकी शुल्क और अन्य अंतरराष्ट्रीय नीतिगत उपाय भारत की विनिर्माण निवेश आकर्षित करने की क्षमता में बाधा डालते हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत की ऋण क्षमता राजकोषीय पक्ष की दीर्घकालिक कमजोरियों से संतुलित है. इससे पहले 14 अगस्त को एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने भारत की सरकारी साख को ‘बीबीबी-‘ से एक पायदान बढ़ाकर ‘बीबीबी’ कर दिया था.

सरकार पर कर्ज का बोझ घटेगा
इसके मुताबिक, अच्छी जीडीपी वृद्धि और क्रमिक राजकोषीय मजबूती सरकार के उच्च ऋण बोझ में बहुत कम कमी कर पाएगी. निजी उपभोग को बढ़ावा देने के हाल के राजकोषीय उपायों ने सरकार के राजस्व आधार को कम कर दिया है. रिपोर्ट में कहा गया कि भारत की दीर्घकालिक स्थानीय-मुद्रा (एलसी) बॉन्ड सीमा ए2 पर अपरिवर्तित बनी हुई है और इसकी दीर्घकालिक विदेशी-मुद्रा (एफसी) बॉन्ड सीमा ए3 पर अपरिवर्तित बनी हुई है.

क्‍या होता है रेटिंग का असर
ग्‍लोबल रेटिंग एजेंसियों की ओर से किसी देश की रेटिंग का असर उसकी अर्थव्‍यवस्‍था पर बखूबी दिखता है. रेटिंग अच्‍छी होने से विदेशी निवेशकों को बुलाना आसान होता है और उनका भरोसा जीतने में भी मदद मिलती है. अगर किसी की रेटिंग खराब है तो ऐसे देश में विदेशी निवेशक पैसे लगाने से कतराते हैं. यही वजह है कि ग्‍लोबल रेटिंग एजेंसियां काफी मायने रखती हैं. इससे देश को विदेशों से कर्ज मिलना भी आसान हो जाता है.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि… और पढ़ें

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मूडीज ने बताई भारत की नई रेटिंग, क्‍या हैं इसके मायने, कैसे पड़ता है असर



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