Sunday, April 12, 2026
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खाड़ी देशों का स्वाद सीवान में, अरबी डिश – अल्फाम ने मचायी धूम, उंगली चाट रहे खाने वाले, नोट गिन रहे परोसने वाले!


सिवान. सिवान में खाड़ी देशों के मशहूर खाने का स्वाद अब लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. दुबई, सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों में पसंद किए जाने वाले अल्फाम, जिसे कई जगह मंदी के नाम से भी जाना जाता है और खमास जैसे पारंपरिक नॉनवेज खाने अब सिवान के लोगों को भी खूब लुभा रहे हैं. सिवान शहर के स्टेशन रोड स्थित अलबैक रेस्टोरेंट में इन दिनों नॉनवेज प्रेमियों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है. खास बात यह है कि यहां वही असली स्वाद और वही तरीका अपनाया जाता है, जैसा खाड़ी देशों में मिलता है.

बिलकुल खाड़ी देशों की तरह होता है तैयार
रेस्टोरेंट के शेफ नासिर, जो मूल रूप से अलीगढ़ के रहने वाले हैं, बताते हैं कि अल्फाम और खमास खाड़ी देशों की पहचान माने जाते हैं और इन्हें वहीं की पारंपरिक शैली में बनाया जाता है. नासिर के अनुसार, रेस्टोरेंट के मालिक की इच्छा थी कि जिले के लोगों को विदेशी खाने का असली स्वाद मिले, इसलिए मसाले से लेकर पकाने की विधि तक सब कुछ पारंपरिक ढंग से तैयार किया जाता है. वे बताते हैं कि हर दिन सैकड़ों ग्राहक यहां पहुंचते हैं और इन खाने का स्वाद चखने के बाद तारीफ किए बिना नहीं रहते.

बेहद खास है अल्फाम की रेसिपी
अल्फाम बनाने की विधि काफी दिलचस्प है. इसमें चिकन को दो टुकड़ों में काटकर खास मसालों का लेप लगाया जाता है. इसके बाद इसे कोयले की धीमी आंच पर जालीदार लोहे के बर्तन में धीरे-धीरे पकाया जाता है. पकने के दौरान बार-बार बटर का लेप दिया जाता है ताकि चिकन नरम और जूसी बने. जब पूरी तरह तैयार हो जाता है, तो खाड़ी देशों की शैली के अनुसार थाली को खास तरीके से सजाकर ग्राहक को परोसा जाता है.

अब शहर में ही मिलने लगा स्वाद
ग्राहक मो. आतिफ बताते हैं कि इस खाने का स्वाद लेने के लिए पहले पटना, लखनऊ या दिल्ली जैसे शहरों की यात्रा करनी पड़ती थी. लेकिन अब सिवान में ही उपलब्ध होने से वे अक्सर यहां पहुंच जाते हैं. वे कहते हैं कि अल्फाम का असली स्वाद अब अपने ही शहर में मिलना एक राहत की बात है.
वहीं आमिर बताते हैं कि इस तरह के रेस्टोरेंट आम तौर पर बड़े शहरों में ही पाए जाते थे, लेकिन सिवान में खुल जाने से इस तरह के खाने को कभी भी आसानी से चखने का मौका मिल जाता है. उनका कहना है कि यहां केवल नाम ही नहीं, बल्कि असली स्वाद, पकाने का तरीका और सर्विंग स्टाइल भी पूरी तरह खाड़ी देशों जैसा है.

वहां रहने के दौरान सीखी रेसिपी
रेस्टोरेंट के मालिक वसीम शेख बताते हैं कि वे लंबे समय तक खाड़ी देशों में रहे हैं. रोजगार के सिलसिले में वहां रहने के दौरान उन्होंने वहां की खाने की संस्कृति और स्वाद को करीब से अनुभव किया. जब वे सिवान लौटे तो महसूस हुआ कि जिले के सैकड़ों लोग खाड़ी देशों में रहते हैं और जब घर आते हैं तो वहां के खाने को याद करते हैं.

इसी सोच के साथ उन्होंने अलबैक रेस्टोरेंट की शुरुआत की. वसीम बताते हैं कि शुरुआत से ही लोगों का शानदार रिस्पॉन्स मिला और आज स्थिति यह है कि रोज लगभग 50 हजार रुपये की आमदनी आसानी से हो जाती है.

चार जिलों में फ्रेंचाइजी
वसीम शेख आगे बताते हैं कि थाली सजाने से लेकर खाने की शैली तक सब कुछ खाड़ी देशों जैसा रखा गया है. वहां की तरह यहां भी एक खास जगह बनाई गई है जहां ग्राहक नीचे बैठकर भोजन कर सकते हैं. खासकर वे लोग जो खाड़ी देशों से छुट्टियों पर घर आते हैं, इस अनुभव को बेहद पसंद करते हैं. वर्तमान में वे पिछले पांच वर्षों से इस रेस्टोरेंट का संचालन कर रहे हैं और इसके अलावा चार अन्य जिलों में भी इसकी फ्रेंचाइजी चलाई जा रही है.

अलबैक रेस्टोरेंट की बढ़ती लोकप्रियता इस बात का संकेत है कि विदेशी खाने की मांग छोटे शहरों में भी तेजी से बढ़ रही है. सिवान जैसे शहर में खाड़ी स्वाद की यह शुरुआत न केवल स्वाद प्रेमियों के लिए नया अनुभव लेकर आई है, बल्कि शहर में रोजगार और व्यापार के नए अवसर भी पैदा कर रही है.



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