तस्वीर झूठ नहीं बोलती। किनारे की फैक्ट्री के पास से बांडी नदी में गिरता प्रदूषित पानी का नाला। फोटो : गौरव शर्मा
लूणी नदी…राजस्थान की सबसे पीड़ित, सबसे घायल और सबसे झूठ से ढकी नदी, लेकिन सरकार के रिकॉर्ड में यह क्लीन है। जलशक्ति मंत्रालय ने लोकसभा में कहा-बालोतरा की सभी 127 टेक्सटाइल यूनिट्स जेएडएलडी हैं यानी फैक्ट्रियों से प्रदूषित पानी की एक बूंद भी बाहर नही
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फैक्ट्रियों के पीछे से बहता नीला पानी, खेतों में जली फसलें और नदी की धार में तैरती रासायनिक झाग…ये प्रदूषित नदी का सच है। भास्कर ने बालोतरा, पाली व जोधपुर से 10 जगह से पानी के सैंपल लिए। चौंकाने वाले रिजल्ट मिले। एक भी सैंपल मानक सीमा में नहीं था। लूणी का पानी प्रदूषित है, यानी नदी में ऑक्सीजन ही नहीं बची। सवाल है कि अगर सभी यूनिट्स जीरो लिक्विड डिस्चार्ज पर काम करते हैं तो लोकसभा में सरकार ने झूठा जवाब क्यों दिया?
प्रदूषण कब रुकेगा… जवाब: नोटिस दिए हैं सांसद हनुमान बेनीवाल ने संसद में सवाल पूछा-आखिर औद्योगिक इलाकों का प्रदूषण कब रुकेगा? जवाब में पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने माना-पाली के 2 व जोधपुर के 2 ट्रीटमेंट प्लांट काम नहीं कर रहे हैं। लेकिन कार्रवाई क्या हुई? सिर्फ नोटिस। जब प्लांट बंद हैं और नदी में जहर कौन डाल रहा है?
प्रदूषण का सैलाब सीरीजI – बांडी, लूणी में जहर घोल रहीं टेक्सटाइल फैक्ट्रियां जिम्मेदार कौन?
राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड – रिपोर्टों पर कार्रवाई नहीं करता, सिर्फ नोटिस तक सीमित। उद्योग विभाग – रोजगार के नाम पर प्रदूषण पर आंख मूंदे बैठा है। स्थानीय प्रशासन – शिकायतें गांव से आती हैं, पर निरीक्षण टीम जाती है महीनों बाद।
इन 6 जगह विषैला पानी… खेड़ सीईटीपी में सीओडी 2040, टीडीएस 20 हजार से ज्यादा
- खेड़ सीईटीपी का केमिकल ऑक्सीजन डिमांड 2040 एमजी। पानी में इतनी रासायनिक मात्रा कि कोई जीव नहीं रह सकता। टीडीएस 20 हजार से ऊपर है।
- डोली और अराबा गांवों में खेतों की मिट्टी पर सफेद परतें जम चुकी थीं। जहां पहले चना और गेहूं की फसल लहलहाती थी, वहां अब सिर्फ बदबू और सूखापन बचा है।
- बालोतरा के सीईटीपी क्षेत्र में प्रदूषित पानी स्टोरेज टैंक से सीधा लूणी नदी में छोड़ रहे थे। कुछ फैक्ट्रियों के पाइप रात में नदी किनारे तक जाते हैं।
- जसोल और मांडल के बीच नाले में हवा में इतनी जलन थी कि पास खड़े बच्चे नाक पर रुमाल रखे हुए थे। भास्कर टीम को भी घुटन महसूस होने लगी।
- जेरला गांव के खाली प्लॉट और खेतों में वही काला पानी पसरा था, जिसमें रासायनिक झाग और गंध से लोग खिड़कियां बंद कर लेते हैं।
- पाली शहर की बांडी नदी अब काले नाले में बदल चुकी है। पुनायता बाइपास के पास से लिए सैंपल का सीओडी 2920, टीडीएस 5680 निकला।

