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नई दिल्ली5 घंटे पहले
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केंद्र ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर बताया कि अनरेगुलेटेड ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स का टेरर फाइनेंस और मनी लॉन्ड्रिंग से लिंक है। इसलिए इन्हें रेगुलेट करने के लिए कानून बनाना जरूरी था।
केंद्र ने बताया कि ऑनलाइन पैसों वाले गेम तेजी से बढ़ रहे हैं और इससे धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग, टैक्स चोरी और कुछ मामलों में आतंकवाद को फंडिंग हो रही है, जो नेशनल सिक्योरिटी के लिए खतरा हैं।
केंद्र ने कहा कि ऑनलाइन गेमिंग कंपनियां बड़े विज्ञापनों, सेलिब्रिटी और इन्फ्लुएंसर के प्रमोशन का इस्तेमाल कर प्रचार करती हैं, जिससे युवाओं और कमजोर वर्गों तक इन ऐप्स की पहुंच और असर बढ़ जाता है।
सरकार का कहना है कि ऑनलाइन मनी गेम्स की वजह से देशभर में आर्थिक नुकसान और सुसाइड केस बढ़ रहे हैं। अगर हर राज्य का डेटा जोड़ा जाए, तो कुल संख्या बहुत ज्यादा होगी।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि वे गुरुवार को मामले की सुनवाई करने की कोशिश करेंगे। 8 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की याचिका मंजूर कर ऑनलाइन गेमिंग एक्ट, 2025 को चुनौती देने वाली हाईकोर्ट की सभी याचिकाएं अपने पास मंगवा लीं, ताकि अलग-अलग फैसले न हों।

कई प्लेटफॉर्म विदेश से ऑपरेट होते हैं
सरकार ने कहा कि ऑनलाइन मनी गेम्स का लोगों, परिवारों और समाज पर गंभीर बुरा असर पड़ रहा है। ये गेम जटिल तकनीक, एल्गोरिदम और देश-विदेश के नेटवर्क के जरिए चलते हैं। कई प्लेटफॉर्म विदेश से ऑपरेट होते हैं, जिससे वे भारतीय कानूनों से बच जाते हैं और राज्यों के नियम भी कमजोर पड़ जाते हैं।
पूरी तरह बैन को सही ठहराते हुए सरकार ने कहा कि लोगों को हर साल लगभग 20,000 करोड़ रुपए का नुकसान होता है और 45 करोड़ लोग ऐसे गेम्स से प्रभावित हैं।
सरकार ने कहा कि लोगों की भलाई, पब्लिक हेल्थ, उपभोक्ता सुरक्षा, नैतिक मूल्यों और देश की आर्थिक सुरक्षा को देखते हुए, ऑनलाइन गेमिंग पर कानून बनाना जरूरी था। सरकार का मानना है कि इससे एक सुरक्षित, व्यवस्थित और इनोवेशन को बढ़ावा देने वाला डिजिटल माहौल बनाया जा सकेगा।
ऑनलाइन गेमिंग बिल के बारे में जानें…
प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 के तहत देश में रियल मनी गेमिंग पर बैन लगाया जाएगा। यह बिल 20 अगस्त को लोकसभा और 21 अगस्त को राज्यसभा से पास हुआ था। 22 अगस्त को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बना और 1 अक्टूबर से लागू किया गया।
ऑनलाइन गेमिंग कानून को 3 हाईकोर्ट में चुनौती
- मध्य प्रदेश हाईकोर्ट: क्लबबूम 11 स्पोर्ट्स एंड एंटरटेनमेंट ने इस कानून को MP हाई कोर्ट में चुनौती दी है। यह कंपनी ऑनलाइन फैंटेसी स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म बूम11 चलाती है।
- कर्नाटक हाईकोर्ट: हेड डिजिटल वर्क्स ने कर्नाटक हाई कोर्ट में इस कानून के खिलाफ याचिका दायर की है। कोर्ट ने 8 सितंबर को इसकी अंतरिम राहत की मांग पर सुनवाई तय की है। हेड डिजिटल वर्क्स ऑनलाइन रम्मी प्लेटफॉर्म A23 रम्मी चलाती है।
- दिल्ली हाईकोर्ट: ऑनलाइन कैरम प्लेटफॉर्म बघीरा कैरम ने भी इस कानून के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है।

ऑनलाइन गेमिंग कानून में 4 सख्त नियम
इस कानून में कहा गया है कि चाहे ये गेम्स स्किल बेस्ड हों या चांस बेस्ड दोनों पर रोक है।
- रियल-मनी गेम्स पर रोक: कोई भी मनी बेस्ड गेम ऑफर करना, चलाना, प्रचार करना गैरकानूनी है। ऑनलाइन गेम खेलने वालों को कोई सजा नहीं होगी।
- सजा और जुर्माना: अगर कोई रियल-मनी गेम ऑफर करता है या उसका प्रचार करता है, तो उसे 3 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। विज्ञापन चलाने वालों को 2 साल की जेल और 50 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।
- रेगुलेटरी अथॉरिटी: एक खास अथॉरिटी बनाई जाएगी, जो गेमिंग इंडस्ट्री को रेगुलेट करेगी, गेम्स को रजिस्टर करेगी और ये तय करेगी कि कौन सा गेम रियल-मनी गेम है।
- ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा: पबजी और फ्री फायर जैसे ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेम्स को सपोर्ट किया जाएगा। ये गेम्स बिना पैसे वाले होते हैं इसलिए इन्हें बढ़ावा मिले।

इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा?
इस कानून के आने के बाद ड्रीम11, गेम्स24×7, विंजो, गेम्सक्राफ्ट, और माय11सर्कल जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स ने अपने मनी-बेस्ड गेम्स बंद कर दिए हैं। उदाहरण के लिए:
- ड्रीम11 ने 22 अगस्त को अपने कैश-बेस्ड गेम्स बंद करने की घोषणा की।
- गेम्सक्राफ्ट ने अपनी रमी एप्स, जैसे रमीकल्चर और गेमप्ले सर्विसेज रोक दी हैं।
- पोकरबाजी ने भी अपने ऑपरेशंस बंद कर दिए हैं।
- जूपी ने भारत में अपनी 30% वर्कफोर्स यानी 170 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है।
ऑनलाइन गेमिंग मार्केट में 86% रेवेन्यू रियल मनी फॉर्मेट से थी
भारत में ऑनलाइन गेमिंग मार्केट अभी करीब 32,000 करोड़ रुपए का है। इसमें से 86% रेवेन्यू रियल मनी फॉर्मेट से आता था। 2029 तक इसके करीब 80 हजार करोड़ रुपए तक पहुंचने की उम्मीद थी। लेकिन अब इन्होंने रियल मनी गेम्स बंद कर दिए हैं।
इंडस्ट्री के लोग कह रहे हैं कि सरकार के इस कदम से 2 लाख नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। सरकार को हर साल करीब 20 हजार रुपए के टैक्स का नुकसान भी हो सकता है।
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ऑनलाइन गेमिंग कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने सभी याचिकाओं पर सरकार से विस्तृत जवाब देने को कहा है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की बेंच ने कहा- हम चाहते हैं कि केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल जवाब की कॉपी याचिकाकर्ताओं के वकीलों को पहले से दे दें। पूरी खबर पढ़ें…

