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Bollywood Superhit Movies based on Same Story : वैसे तो बॉलीवुड में किसी भी फिल्म को हिट करवाने का कोई सेट फॉर्मूला नहीं है, फिर भी प्रोड्यूसर-डायरेक्टर ब्लॉकबस्टर-सुपरहिट फिल्मों की कहानी को नए अंदाज में पेश करके, उसमें थोड़ा बहुत बदलाव करके नई फिल्में बनाते रहे हैं. 1965 में एक ऐसी फिल्म आई जिसका बेसिक आइडिया चुराकर बॉलीवुड में 70-80 के दशक में कई फिल्में बनाई गईं. दिलचस्प बात यह है कि ज्यादातर फिल्में सुपरहिट रहीं. ऐसी ही चार फिल्मों से जुड़े दिलचस्प फैक्ट्स की हम बात करने जा रहे हैं.
बॉलीवुड हो या हॉलीवुड, किसी के पास हिट फिल्म का फॉर्मूला नहीं है. फिर भी बॉलीवुड में ब्लॉकबस्टर फिल्मों की कहानी को नए अंदाज में, थोड़े बहुत बदलाव के साथ दर्शकों के सामने पेश करने का चलन रहा है. 1965 में बीआर चोपड़ा की एक ऐसी ब्लॉकबस्टर फिल्म आई थी जिसे यश चोपड़ा ने डायरेक्ट किया था. यह फिल्म आज कल्ट क्लासिक में शुमार है. नाम था : वक्त. इसी फिल्म में खोया-पाया का फॉर्मूला आजमाया गया था. दिलचस्प बात यह है कि ये फॉर्मूला 70-80 के दशक में खूब काम आया. इस फॉर्मूले के आधार पर बनीं फिल्में बॉक्स ऑफिस पर जबर्दस्त तरीके से हिट रहीं. ये फिल्में थीं : 1. यादों की बारात, धरम-वीर, अमर अकबर एंथोनी और सुहाग.

सबसे पहले बात करते हैं 1965 में आई फिल्म ‘वक्त’ की जो कि एक मसाला फिल्म थी जिसका डायरेक्शन यश चोपड़ा ने किया था. प्रोड्यूसर बीआर चोपड़ा थे. कहानी अख्तर मिर्जा ने लिखी थी. डायलॉग अख्तर उल इमान ने लिखे थे. 28 जुलाई 1965 को रिलीज हुई इस फिल्म में सुनील दत्त, शशि कपूर, साधना शिवदसानी, राज कुमार, शर्मिला टैगोर, बलराज साहनी, अचला सचदेव, रहमान और मदन पुरी अहम भूमिकाओं में नजर आए थे. गीत साहिर लुधियानवी ने लिखे थे. संगीत रवि का था. फिल्म के सदाबहार गाने आज भी सुने जाते हैं. इनमें से ‘ऐ मेरी जोहरा जबीं’और ‘वक्त से दिन और रात’ आज भी पॉप्युलर हैं.

इस फिल्म में लंबे समय बाद ‘खोया-पाया’ का फॉर्मूला बॉलीवुड में फिर से आजमाया गया था. इससे पहले अशोक कुमार की 1943 की फिल्म ‘किस्मत’ में भी यही प्लॉट देखने को मिला था. वक्त फिल्म में बलराज साहनी का परिवार एक तूफान की वजह से बिखर जाता है और फिल्म के अंत में पूरा परिवार मिल जाता है. यह पहली मल्टी स्टार कास्ट फिल्म थी. वक्त ने 5 फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते थे. बॉक्स ऑफिस पर यह एक ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी.
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1973 में सलीम-जावेद की जोड़ी ने ‘वक्त’ फिल्म से इंस्पायर्ड होकर एक कहानी लिखी. आमिर खान के पिता नासिर हुसैन ने ‘यादों की बारात’ नाम से फिल्म बनाई. नासिर हुसैन ही फिल्म के प्रोड्यूसर थे. फिल्म में धर्मेंद्र, विजय अरोड़ा, तारिक खान, जीनत अमान, नीतू सिंह, अजीत और कैप्टन राजू लीड रोल में थे. म्यूजिक आरडी बर्मन का था और गीत मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे थे. फिल्म का म्यूजिक सदाबहार था. फिल्म का पॉप्युलर गाना ‘चुरा लिया है तुमने जो दिल को’ मूवी की पहचान बन गया.

‘यादों की बारात’ फिल्म की कहानी सलीम-जावेद ने ‘वक्त’ से इंस्पायर्ड होकर ही लिखी थी. दोनों फिल्मों में कई समानताए हैं. दोनों फिल्मों में परिवार के सदस्य शुरू में बिछड़ने की वजह जरूर अलग है. ‘वक्त’ में तूफान की वजह से परिवार के सदस्य बिछड़ते हैं जबकि ‘यादों की बारात’ में मां-बाप मारे जाते हैं और कहानी के अंत में मिलते हैं. वक्त में भी पूरा परिवार कहानी के अंत में मिलता है. वक्त में बड़े भाई निभाने वाले राजकुमार चोर रहते हैं, जबकि यादों की बारात में धर्मेंद्र शातिर चोर की भूमिका निभाते हैं. वक्त में राजकुमार रानी का हार चुराना होता है, वहीं यादों की बारात में भी धर्मेंद्र रानी का हार चुराते हैं. यादों की बारात और जंजीत के मेन विलेन अजीत ही थे. यादों की बारात ने नीतू सिंह को पहचान दी. ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ के बाद जीनत अमान की यह एक सुपरहिट फिल्म थी. यादों की बारात में आमिर खान ने चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर काम किया था. यह 1973 की पांचवीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी.

चार साल बाद ही जाने-माने डायरेक्टर-प्रोड्यूसर मनमोहन देसाई ने इसी ‘खोया-पाया’ फॉर्मूले पर बेस्ड एक मल्टी-स्टारर फिल्म बनाई. फिल्म का नाम अमर अकबर एंथोनी था जो कि 27 मई 1977 को रिलीज हुई थी. अखबार में छपी एक छोटी सी खबर से मनमोहन देसाई को इस फिल्म को बनाने का आइडिया आया था. खबर के मुताबिक, एक व्यक्ति तीन बच्चों को पार्क में छोड़कर चला गया था. उन्होंने अपने दोस्त प्रयागराज को खबर बताई और फिर ऐसी कहानी तैयार की जिस पर बनी मसाला फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया.

फिल्म में एक्शन-ट्रेजडी, रोमांस-कॉमेडी सब कुछ था. लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के म्यूजिक से सजे आनंद बख्शी के गानों को कहानी को गति दी. फिल्म के प्रति लोगों का रुझान बढ़ाया. विनोद खन्ना के साथ पहले किसी भी हीरोइन को काम नहीं करना था. जब उन्हें पता चला तो मचल उठे. ऐसे में मनमोहन देसाई ने शबाना आजमी को साइन किया. उनकी एक छोटी सी लव स्टोरी फिल्म में दिखी. करीब 1.2 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 15 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह फिल्म 1977 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली दूसरी फिल्म थी.

बॉलीवुड में मनमोहन देसाई ने ‘खोया-फॉर्मूला’ पर बेस्ड फिल्में सबसे ज्यादा बनाई. हर बार फिल्म की शुरुआत एक जैसी रही. इसी फॉर्मूले को रिपीट करते हुए मनमोहन देसाई की एक और फिल्म सितंबर 1977 धरम-वीर आई. धरम-वीर में धर्मेंद्र, जीनत अमान, जीतेंद्र, नीतू सिंह, प्राण, जीवन और रंजीत लीड रोल में थे. म्यूजिक लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का था. गीत आनंद बख्शी और विट्ठलभाई पटेल ने लिखे थे. फिल्म का म्यूजिक सुपरहिट था. मनमोहन देसाई ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने धरम-वीर की कहानी महाभारत के कर्ण से इंस्पायर्ड होकर लिखवाई थी. वो कर्ण को अपना हीरो मानते थे. धरम-वीर 1977 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाले फिल्म थी.

मनमोहन देसाई की एक और फिल्म 1979 में सिनेमाघरों में आई थी. इस फिल्म में भी ‘खोया-पाया’ का फॉर्मूला आजमाया गया था. फिल्म का नाम ‘सुहाग’ था जिसमें अमिताभ बच्चन, शशि कपूर, रेखा, परवीन बॉबी, निरूपा रॉय, अमजद खान, कादर खान, रंजीत और जीवन ने अहम भूमिकाएं निभाई थीं.
इस फिल्म में रेखा ने तवायफ का रोल निभाया था. कहानी प्रयागराज ने लिखी थी और स्क्रीनप्ले केके शुक्ला और डायलॉग कादर खान ने लिखे थे. म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का था. सुहाग फिल्म का म्यूजिक सुपरहिट रहा था. फिल्म का एक गाना ‘तेरी रब ने बना दी जोड़ी’ लंदन में शूट हुआ था. इस फिल्म की धुन पंजाबी फॉक सॉन्ग से इंस्पायर्ड है. 1946 की फिल्म ‘मां-बाप की लाज’ के एक सॉन्ग ‘आई मस्त जवानी आई, काहे प्रीतम से हम प्रीत रचाएं’ से प्रेरित था. गीतकार अल्ला रक्खा कुरैशी थे. सुहाग के कई सीन मनमोहन देसाई की 1977 की फिल्म ‘परवरिश’ से मिलते-जुलते थे. एक करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 5 करोड़ का कलेक्शन किया था.

