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पाकिस्तान से आए एक और प्रोपेगेंडा को भारत ने सिरे से खारिज कर दिया है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने की कोशिश की, जिसके जवाब में भारतीय विदेश मंत्रालय ने करारी फटकार लगाई है और कहा कि पहले अपने गिरेबान में झांको.
पाकिस्तान ने भारत में क्रिसमस और मुसलमानों की स्थिति को लेकर जहर उगला, तो भारत ने उसे ऐसा आइना दिखाया कि इस्लामाबाद में खलबली मचनी तय है. विदेश मंत्रालय ने दो टूक कहा, जिसके खुद के घर में अल्पसंख्यकों पर जुल्म सिस्टम का हिस्सा हो, उसे बोलने का कोई हक नहीं.
पाकिस्तान के इस बयान के आते ही नई दिल्ली ने मोर्चा संभाल लिया. भारतीय विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक तीखे बयान में पाकिस्तान की टिप्पणियों को पूरी तरह खारिज कर दिया. भारत ने कड़े शब्दों में कहा, हम उस देश की टिप्पणियों को खारिज करते हैं, जिसका इस मोर्चे पर खुद का रिकॉर्ड बेहद खराब है. रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान को याद दिलाया कि दुनिया जानती है कि वहां अल्पसंख्यकों के साथ क्या होता है. उन्होंने कहा, पाकिस्तान में विभिन्न धर्मों के अल्पसंख्यकों का खौफनाक और व्यवस्थित उत्पीड़न एक स्थापित तथ्य है. MEA ने अपने बयान में साफ कर दिया कि पाकिस्तान चाहे जितनी भी उंगली उठा ले, वह अपनी सच्चाई को छिपा नहीं सकता.
पाकिस्तान ने क्यों छेड़ा राग
यह बयानबाजी ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के रिश्ते पहले से ही न के बराबर हैं. पाकिस्तान अक्सर अपनी घरेलू समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए भारत में अल्पसंख्यकों का मुद्दा उठाता है. लेकिन इस बार भारत का जवाब रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक था. भारत ने पाकिस्तान के आरोपों पर सफाई देने के बजाय सीधे उसके सिस्टमैटिक परसिक्यूशन यानी हिंदुओं, सिखों और ईसाइयों के जबरन धर्मांतरण वाली नब्ज दबा दी है.
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