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Bollywood Most Iconic Villain : बॉलीवुड में कई सुपरहिट-ब्लॉकबस्टर फिल्में सिर्फ विलेन के नाम से जानी जाती हैं. शोले फिल्म के ‘गब्बर सिंह’ का नाम भला कौन नहीं जानता. ज्यादातर लोग तो उनका वास्तविक नाम भी जानते थे. बस गब्बर सिंह के नाम से परिचित हैं. गब्बर सिंह उर्फ अमजद खान ने यह आइकॉनिक रोल किया था. अमजद खान के बाद बॉलीवुड में एक ऐसा विलेन हुआ जो हीरो से ज्यादा फीस लेता था. सुपरस्टार अजय देवगन सेट पर रोज उनके पैर छुआ करते थे. इस फेमस विलेन ने 10 साल में छह ऐसी फिल्में कीं जो इतिहास बना गईं. इन 6 फिल्मों में 3 फिल्में सुपरहिट, एक सुपर ब्लॉकबस्टर, दो ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर निकलीं. आइये जानते हैं बॉलीवुड के सबसे चर्चित इस विलेन की जिंदगी से जुड़े दिलचस्प किस्से….
मुंबई. पंजाब के नवांशहर का एक नौजवान हीरो बनने का ख्वाब लेकर मुंबई आया. आवाज भारी-भरकम थी. थिएटर के मंच पर जब यह नौजवान अपने डायलॉग्स बोलता तो दर्शक सन्न रह जाते थे. हीरो नहीं बन पाया तो इंश्युरेंस कंपनी में नौकरी करने लगा लेकिन एक्टिंग का सपना नहीं छोड़ा. थिएटर्स में खूब नाम कमाने के बाद 39 साल की उम्र में सुनील दत्-वहीदा रहमान की फिल्म ‘रेशमा और शेरा’ से बॉलीवुड में एंट्री ली. जी हां, हम बात कर रहे हैं अमरीश पुरी की जिन्होंने 25 साल तक बॉलीवुड में राज किया. अमजद खान के बाद बॉलीवुड में खूंखार विलेन की कमी नहीं होने दी. अमरीश पुरी ने अपने करियर में करीब 400 से ज्यादा फिल्मों में काम किया.
80 के दशक में उन्होंने अपनी एक्टिंग का असल जादू दिखाना शुरू किया. सुभाष घई ने उन्हें अपनी लगभग हर फिल्म में मौका दिया. अमरीश पुरी हर किरदार में जान डाल देते थे. ‘विधाता’ (1982), हीरो और ‘मेरी जंग’ (1985) में बैक-टू-बैक शानदार परफॉर्मेंस से दर्शकों के दिल में खास जगह बनाई. फिर ‘मिस्टर इंडिया’ (1987) में उन्होंने मोगैंबो के किरदार को हमेशा-हमेशा के लिए अमर कर दिया. अमरीश पुरी अपनी आवाज को बहुत मजबूत बनाने के लिए रोजाना 3-4 घंटे रियाज किया करते थे. अमरीश पुरी के सामने सामने बड़े-बड़े से हीरो भी खौफ खाते थे.
90 के दशक में उन्होंने अजय देवगन, सनी देओल, शाहरुख खान जैसे सुपरस्टार के साथ काम किया. अजय देवगन ने अपने करियर का किरदार 1991 में आई फिल्म ‘फूल और कांटे’ से किया था. इस फिल्म में अमरीश पुरी ने एक गैंगस्टर नागेश्वर का रोल निभाया था. अजय देवगन ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि वो सेट पर रोजाना अमरीश पुरी के पैर छूते थे लेकिन साथ ही दिनभर उनकी टांग खींचते रहते थे. इससे अमरीश पुरी नाराज हो जाते थे. वो ऐसे शख्स से थे जो किसी भी स्टार के गम-खुशी के मौके पर सबसे पहले पहुंचते थे.
‘घायल’ (1990) में उन्होंने बलवंत राय, तो दामिनी में इंद्रजीत चड्ढा का आइकॉनिक रोल अमरीश पुरी ने निभाया था. अमरीश पुरी और सनी देओल का ऐसा कॉम्बिनेशन बना कि इस जोड़ी की हर फिल्म को दर्शकों ने खूब प्यार दिया. 1995 में आई फिल्म दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे में उन्होंने ट्रेन वाले सीन में ‘जा सिमरन जा’ डायलॉग को हमेशा के लिए अमर कर दिया. यह फिल्म ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी. 1995 में उनकी एक फिल्म ‘करन-अर्जुन’ आई थी जो कि सुपर ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी. फिर 2001 में गदर एक प्रेमकथा में उन्होंने अपनी एक्टिंग से सबका दिल जीत लिया. अमरीश पुरी ने उर्मिला दिवेकर से शादी रचाई थी. 12 जनवरी 2005 को ब्रेन हैमरेज से अमरीश पुरी का निधन हो गया था.
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