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वैज्ञानिक रूप से देखें तो सोना एक बेहद स्थिर और उत्कृष्ट कंडक्टर धातु है, इसलिए इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस में इसका इस्तेमाल होता है. समुद्र में बहुत कम मात्रा में सोना घुला हुआ पाया जाता है, लेकिन इसे निकालना आर्थिक रूप से संभव नहीं है.
4 साल के रिसर्च के बाद गिर की गायों के यूरिन में गोल्ड मिला है. (सांकेतिक तस्वीर)
अहमदाबाद. भारतीय समाज में सोने को इंवेस्टमेंट कम इमोशन से ज्यादा कनेक्ट किया जाता है. भारतीय संस्कृति के अलग-अलग संस्कारों में सोना देने और पहनने की परंपरा रही है. महिलाओं के लिए इसे श्रृंगार से जोड़ा जाता है. इसे लक्ष्मी का आशीर्वाद और समृद्धि का प्रतीक भी मानते हैं. सोना सबसे ज्यादा डिमांडिंग मेटल है. इतिहास में इसके लिए कई युद्ध हुए हैं.
इंसान के शरीर में सोना मिलता है. सोने का सबसे बड़ा भंडार समुद्र में है. वहां 10 अरब टन सोना छुपा है. इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस में इसे गुड कंडक्टर के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. पेड़-पौधों में सोना मिलता है. एक ऐसा कीड़ा है, जो सोना उगलता है. आपको जानकर हैरानी होगी कि एक नस्ल की गाय के यूरिन में सोना बनता है.
जूनागढ़ एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों को करीब 4 साल के रिसर्च के बाद गिर की गायों के यूरिन में सोने के कण मिले हैं. JAU की एक रिसर्च में सामने आया है कि गिर की गायों के प्रति लीटर यूरिन में 3 से 10 मिली ग्राम सोने की मात्रा पाई जाती है.
यूरिन में ये सोना धातु आयन यानी गोल्ड सॉल्ट के रूप में पाया गया है. ये सोना घुलनशील होता है. JAU के बायो टेक्नॉलोजी विभाग के प्रमुख डॉ. बीए गोलकिया की अगुआई में इस रिसर्च टीम ने यूरिन के सैंपल की जांच क्रोमेटोग्राफी-मास स्पेक्ट्रेमेट्री प्रोसेस से इस पूरी रिसर्च को अंजाम दिया है. गाय के यूरिन में करीब 5100 पदार्थ मिले. इनमें से करीब 388 पदार्थ खासतौर से मेडिकल के लिहाज से अहम हैं. ये पदार्थ कई तरह की बीमारियों के इलाज में काम आ सकते हैं.
एक बैक्टीरिया है Cupriavidus metallidurans. लाइव साइंस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैक्टीरिया में CupA नाम का एक एंजाइम होता है. यह एंजाइम कोशिका के अंदर मौजूद अतिरिक्त तांबे को बाहर निकालकर कोशिका की दो झिल्लियों के बीच मौजूद एक सुरक्षात्मक हिस्से में पहुंचा देता है. इस हिस्से को पेरिप्लाज्म कहा जाता है. इसी से सोने के बेहद छोटे-छोटे टुकड़े बाहर निकल आते हैं. ये कण माइक्रोमीटर के आकार के होते हैं, लेकिन धीरे-धीरे आपस में मिलकर रेत के दानों जैसे छोटे गुच्छे बना सकते हैं.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

