Thursday, January 15, 2026
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जिहाद नहीं रोटी जरूरी… अग्निवीर के बहाने कश्मीर में एक नया सवेरा


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श्रीनगर में रेजिमेंट सेंटर ने गुरुवार को अग्निवीरों के अपने पांचवें बैच की पासिंग आउट परेड (POP) आयोजित की. यह सिर्फ एक परेड नहीं थी बल्कि बदलाव की एक गूंज थी. 326 रंगरूट भारतीय सेना में शामिल हुए जिनमें कश्मीर के कई नौजवान भी थे. यह उन युवाओं की कहानी है जिन्होंने बंदूक की जगह कंधे पर सितारे सजाने का फैसला किया है. कभी जो जिहाद की ओर धकेले जाते थे आज वे नौकरी, सम्मान और एक उज्ज्वल भविष्य की तलाश में सेना में शामिल हो रहे हैं. यह कश्मीर में एक नए अध्याय की शुरुआत है, जहां “जिहाद नहीं रोटी जरूरी” का नारा गूंज रहा है. (फोटो X/@basiitzargar)

परेड ग्राउंड पर फैले ये अनुशासित कदम, हर कदम एक नए संकल्प की गवाही दे रहा था. “बलिदानं वीर लक्षणम्” का नारा गूंज रहा था. जो इन अग्निवीरों के अदम्य साहस और राष्ट्र के प्रति समर्पण को दर्शाता है. यह एक ऐसा दृश्य था जो बताता है कि कश्मीर अब हिंसा नहीं, बल्कि विकास और राष्ट्र निर्माण की राह पर है. (फोटो X/@basiitzargar)

हवा में लहराती राइफलें और आसमान की ओर देखते ये युवा चेहरे जुनून से भरे थे. उनकी आंखों में देश सेवा का दृढ़ संकल्प साफ दिखाई दे रहा था. सटीक तालमेल में कदमताल करते अग्निवीर दिखा रहे थे कि कैसे प्रशिक्षण ने उन्हें एक मजबूत यूनिट में ढाला है. यह सिर्फ सैन्य कौशल नहीं, बल्कि एक ऐसी पहचान है जिस पर उनके परिवारों को गर्व है. (फोटो PTI)

एक मां का अपने अग्निवीर बेटे को चूमना… यह पल शब्दों से परे था. उस आलिंगन में वर्षों का डर, आशा और अथाह प्रेम समाया हुआ था. यह खुशी के आंसू थे जो दिखा रहे थे कि उनके बेटे ने एक सम्मानजनक रास्ता चुना है. मां की आंखों में अपने बेटे की वर्दी पर गर्व साफ झलक रहा था. (फोटो X/@basiitzargar)

एक मां अपने अग्निवीर बेटे की वर्दी पर बैज ठीक कर रही थी, चेहरे पर गर्व था. कश्मीर के युवा जो कभी शायद अलग राह पर भटक सकते थे आज देश सेवा की शपथ ले रहे हैं. यह कश्मीर की बदलती तस्वीर है जहां युवा अब बंदूक छोड़ हाथों में देश के तिरंगे को थाम रहे हैं. (फोटो PTI)

एक बुजुर्ग पिता का अपने अग्निवीर बेटे को आशीर्वाद देना इस बदलाव की गहराई को दर्शाता है. उनकी खुशी में एक सुकून था कि उनका बच्चा अब हिंसा के चक्रव्यूह से बाहर निकलकर एक बेहतर जीवन की ओर बढ़ रहा है. परेड में मौजूद धार्मिक गुरु और बुजुर्ग भी इस नए रास्ते को अपनी स्वीकृति दे रहे हैं. (फोटो X/@basiitzargar)

गौरतलब है कि कश्मीर में सेना में भर्ती होने का क्रेज तेजी से बढ़ा है. युवा अब अपने भविष्य को सुरक्षित करने और देश की सेवा करने के लिए उत्सुक हैं. यह बदलता रुझान दिखाता है कि कैसे मुख्यधारा में शामिल होने की इच्छा अब अलगाववादी विचारधारा पर हावी हो रही है. यह एक शांत क्रांति है. (PTI)

यह POP सिर्फ एक सैन्य समारोह नहीं था बल्कि कश्मीर के एक नए, शांतिपूर्ण और समृद्ध भविष्य का प्रतीक था. यह उन अनगिनत कहानियों का हिस्सा है जहां युवाओं ने हिंसा को त्याग कर अपने और अपने परिवार के लिए एक सम्मानजनक जीवन चुना है. (फोटो X/PTI)

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