Saturday, April 25, 2026
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“हैदराबाद का वो पानी, जिससे महकता था अरब!” देखिए बम रुकनुद्दौला झील की ऐतिहासिक कहानी


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Bum Rukn-ud-Dowla Lake Hyderabad: हैदराबाद की बम रुकनुद्दौला झील (हुसैनी नहर) अपनी ऐतिहासिक शुद्धता और इत्र बनाने में इस्तेमाल होने वाले सुगंधित पानी के लिए जानी जाती है. 1770 के दशक में नवाब मीर मूसा खान द्वारा निर्मित यह झील कभी 105 एकड़ में थी, जो अब सिमटकर 4.5 एकड़ रह गई है. हाल ही में हाइड्रा की कार्रवाई के बाद इसके जीर्णोद्धार और यहाँ पार्क निर्माण का कार्य किया गया है. यह झील अपनी औषधीय शिफ़ा और अरब देशों तक इत्र के लिए प्रसिद्ध रही है.

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Bum Rukn-ud-Dowla Lake Hyderabad: हैदराबाद की ऐतिहासिक पहचान सिर्फ चारमीनार या गोलकुंडा के किलों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ के जल निकायों में भी इतिहास की गहरी खुशबू रची-बसी है. इन्हीं में से एक है बम रुकनुद्दौला झील, जिसे स्थानीय रूप से हुसैनी नहर के नाम से भी जाना जाता है. 1770 के दशक में निर्मित यह झील कभी अपनी शुद्धता और औषधीय गुणों (शिफ़ा) के लिए दुनिया भर में मशहूर थी. निज़ाम अली खान (निज़ाम द्वितीय) के प्रधानमंत्री नवाब मीर मूसा खान रुकनुद्दौला द्वारा निर्मित यह जलाशय कभी 105 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ था. इतिहासकार बताते हैं कि इस झील का निर्माण न केवल जल संचयन के लिए किया गया था, बल्कि यह उस दौर की तकनीकी दूरदर्शिता और सौंदर्यबोध का एक अद्भुत उदाहरण थी.

इतिहासकार डॉ. अजमल अली खान के अनुसार, इस झील का पानी इतना स्वच्छ और मीठा था कि इसे पवित्र और उपचारकारी माना जाता था. इस झील की सबसे बड़ी विशेषता इसके चारों ओर फैले चमेली और मोगरे के फूलों के बाग थे. जब ये फूल प्राकृतिक रूप से पानी में गिरते थे, तो पूरा जलाशय एक प्राकृतिक सुगंध से महक उठता था. इस पानी की ख्याति सात समंदर पार तक थी. कहा जाता है कि इस सुगंधित पानी को विशेष एयर-टाइट बर्तनों में भरकर सऊदी अरब और यमन जैसे देशों में भेजा जाता था. वहाँ इस पानी का उपयोग उच्च श्रेणी के इत्र बनाने के लिए एक आधार (Base) के रूप में किया जाता था. यहाँ तक कि शाही परिवार की महिलाएँ अपनी त्वचा की देखभाल और सुंदरता निखारने के लिए इसी विशेष पानी का उपयोग करती थीं.

अतिक्रमण की मार और जीर्णोद्धार की उम्मीद
वक्त के साथ विकास की अंधी दौड़ ने इस ऐतिहासिक धरोहर को गहरे जख्म दिए हैं. कभी 105 एकड़ में फैली यह विशाल झील अवैध निर्माणों और लापरवाही के कारण सिमटकर अब महज 4.5 एकड़ के करीब रह गई है. झील का अधिकांश हिस्सा अतिक्रमण की भेंट चढ़ गया, जिससे इसकी प्राकृतिक सुंदरता और जल स्तर पर बुरा असर पड़ा. हालांकि, हाल के दिनों में तेलंगाना सरकार और हाइड्रा (HYDRAA) की सक्रियता ने एक नई उम्मीद जगाई है. सरकार ने झील के आसपास से अवैध कब्जों को हटाने और इसके ऐतिहासिक स्वरूप को बहाल करने के लिए जीर्णोद्धार का कार्य तेज कर दिया है. अब इस झील के आसपास एक खूबसूरत पार्क विकसित किया गया है, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस गौरवशाली इतिहास को जान सकें.

गंगा-जमुनी तहजीब का प्रमाण
नवाब रुकनुद्दौला, जिन्होंने 11 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं और जिन्हें 1775 में शहीद कर दिया गया था, उनकी बनवाई यह झील आज भी हैदराबाद की गंगा-जमुनी तहजीब का प्रमाण है. यह न केवल एक जल निकाय है, बल्कि यह उस कालखंड की याद दिलाती है जब प्रकृति और मनुष्य के बीच एक गहरा संतुलन था.

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vicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a seasoned multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience across digital media, social media management, video production, editing, content…और पढ़ें



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