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ईरान से जुड़े बढ़ते तनाव और डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख के बीच वैश्विक तेल बाजार में जबरदस्त उथल पुथल देखने को मिल रही है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर दबाव बढ़ने से कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है और कीमतों में तेज उछाल आया है, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर असर पड़ने का खतरा बढ़ गया है. यूरोप में जेट फ्यूल की कमी, रूस यूक्रेन के बीच पाइपलाइन राजनीति और जर्मनी में गिरता निवेशक भरोसा इस संकट को और गहरा बना रहा है. हालांकि अमेरिका में मांग बनी हुई है, लेकिन महंगाई और ब्याज दरों को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है. कुल मिलाकर यह संकट सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्लोबल ग्रोथ और सप्लाई चेन के लिए बड़ा खतरा बनता दिख रहा है.
ब्रेंट क्रूड लगभग 97.96 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है.
नई दिल्ली. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान की वजह से तेल की कीमतों में एक बार फिर आग लग गई है. ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान के साथ युद्धविराम को और आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं. ईरान-यूएस के बीच सीजफायर बुधवार के अंत के साथ खत्म हो जाएगा. दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच पाकिस्तान में होने वाली बातचीत पर भी अब संकट के बादल नजर आ रहे हैं. ऐसे में एक बार फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज चर्चा का केंद्र बन गया है. अब तक दुनिया को समझ आ चुका है कि यह स्ट्रेट दुनियाभर की एनर्जी आपूर्ति के लिए कितना महत्वपूर्ण है. इसीलिए एक बार फिर माहौल बिगड़ने की सुगबुगाहट के बीच तेल की कीमतें आसमान की ओर बढ़ने लगी है.
ईरान युद्ध में सीजफायर टूटने की आशंका के मद्देनजर कच्चे तेल की कीमतों में करीब 3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है. ब्रेंट क्रूड लगभग 97.96 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल 93.15 डॉलर के आसपास ट्रेड कर रहा है. इस उछाल के पीछे सबसे बड़ा कारण है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जहां से दुनिया के कुल तेल और एलएनजी सप्लाई का करीब 20 प्रतिशत गुजरता है. मौजूदा हालात में यह मार्ग लगभग ठप पड़ गया है और पिछले 24 घंटों में सिर्फ 3 जहाज ही यहां से निकल पाए हैं.
क्यों इतना अहम है हॉर्मुज
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दुनिया का सबसे अहम ऊर्जा चोकपॉइंट माना जाता है. यह खाड़ी देशों को एशिया, यूरोप और अमेरिका से जोड़ता है. अगर यहां रुकावट आती है, तो इसका सीधा असर ग्लोबल सप्लाई पर पड़ता है और कीमतें तेजी से बढ़ती हैं. यही वजह है कि इसे ग्लोबल एनर्जी का गला कहा जाता है, जहां थोड़ी सी रुकावट भी पूरी दुनिया की इकोनॉमी को झटका दे सकती है.
एविएशन सेक्टर पर मंडराता खतरा
ऊर्जा संकट का असर अब एविएशन सेक्टर में भी दिखने लगा है. यूरोप में जेट फ्यूल की कमी की आशंका बढ़ गई है और यूरोपीय संघ एयरलाइंस के लिए एडवाइजरी जारी करने की तैयारी में है. हालांकि, जर्मनी ने फिलहाल स्थिति को नियंत्रण में बताया है, लेकिन अगर सप्लाई बाधित रही तो आने वाले दिनों में फ्लाइट ऑपरेशंस और किराए पर असर पड़ सकता है.
पाइपलाइन और पावर गेम, रूस-यूक्रेन फैक्टर
ऊर्जा बाजार की जंग सिर्फ समुद्री रास्तों तक सीमित नहीं है. द्रुज़्बा पाइपलाइन को लेकर यूक्रेन ने सप्लाई दोबारा शुरू करने के संकेत दिए हैं, जिसके बदले वह यूरोप से बड़े आर्थिक पैकेज की उम्मीद कर रहा है. दूसरी तरफ रूस ने कजाकिस्तान से जर्मनी जाने वाले तेल को 1 मई से रोकने की तैयारी कर ली है. इसके अलावा यूक्रेन के ड्रोन हमलों ने रूस के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी निशाना बनाया है, जिससे सप्लाई और अस्थिर हो सकती है.
जर्मनी में मंदी का डर, अमेरिका में दबाव
यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी में निवेशकों का भरोसा तीन साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है. यह संकेत देता है कि अगर ऊर्जा संकट लंबा खिंचता है, तो यूरोप मंदी की ओर बढ़ सकता है. वहीं संयुक्त राज्य अमेरिका में पेट्रोल महंगा होने के बावजूद रिटेल डिमांड बनी हुई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ब्याज दरों में कटौती के पक्ष में हैं और फेडरल रिजर्व पर दबाव बना रहे हैं ताकि ग्रोथ को सपोर्ट किया जा सके.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें

