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Modi Government Gives Big Gift To Bengal: पश्चिम बंगाल में पहले चरण की वोटिंग हो चुकी है. दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को है. इस बीच मोदी सरकार ने नीति आयोग में दो बंगाली विद्वानों डॉ. अशोक लाहिड़ी और डॉ. गोबर्धन दास अहम जगह दी है. डॉ. लाहिड़ी उपाध्यक्ष और दास को सदस्य बनाया गया है. इसे बंगाली भद्रलोक के लिए एक बड़ा तोहफा माना जा रहा है.
दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र डॉ. लाहिड़ी एक कोलकाता वासी हैं.
Modi Government Gives Big Gift To Bengal: पश्चिम बंगाल में पहले चरण की वोटिंग हो गई है. वहां अब दूसरे और अंतिम चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को है. राज्य में पहले चरण में जबर्दस्त वोटिंग हुई है. इस बीच केंद्र की पीएम मोदी सरकार ने राज्य को एक बड़ा तोहफा दी है. दरअसल, भारतीय नीति-निर्माण के शीर्ष पदों पर दो प्रतिभाशाली बंगाली को स्थान मिला है, जो विद्वत्ता और राष्ट्र निर्माण में बंगाल के मौलिक योगदान की समृद्ध विरासत में एक और मील का पत्थर है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विजन की ओर राष्ट्र का नेतृत्व करने की बागडोर नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. अशोक लाहिड़ी के हाथों में होगी. भारत के सबसे अनुभवी और वरिष्ठ अर्थशास्त्रियों में शुमार डॉ. लाहिड़ी का चार दशकों से अधिक का करियर रहा है. उन्होंने नीतिगत क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं, जिनमें मुख्य आर्थिक सलाहकार से लेकर वित्त आयोग के सदस्य, एशियाई विकास बैंक, विश्व बैंक और आईएमएफ शामिल हैं.
दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र डॉ. लाहिड़ी एक कोलकाता वासी हैं और बंगाल के विकास और प्रगति के लिए काम करने वाले एक अग्रणी बंगाली विद्वान हैं. नीति आयोग के सदस्य डॉ. गोबर्धन दास एक प्रख्यात आणविक विज्ञान के प्रोफेसर हैं, जिन्होंने लगभग तीन दशकों के वैज्ञानिक करियर में प्रतिरक्षा विज्ञान, संक्रामक रोगों और कोशिका जीव विज्ञान में विशेषज्ञता हासिल की है. डॉ. दास तपेदिक के रोगजनन पर अपने शोध के लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है. अमेरिका में येल विश्वविद्यालय और ह्यूस्टन मेथोडिस्ट अस्पताल और दक्षिण अफ्रीका में क्वाज़ुलु-नताल विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन सहित दुनिया भर में अत्याधुनिक शोध का नेतृत्व करने के बाद उन्होंने मातृभूमि की सेवा करने के लिए घर लौटने का विकल्प चुना है. कहने का मतलब है कि ये दोनों व्यक्ति बंगाली मूल के हैं. बंगाल में ऐसे पढ़े-लिखे विद्वान लोगों को भद्रलोक की श्रेणी में रखा जाता है.
जेएनयू में प्रोफेसर रहे डॉ. दास
विश्वभारती विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र डॉ. दास जेएनयू में प्रोफेसर बने और वर्तमान में आईआईएसईआर भोपाल के निदेशक के रूप में कार्य कर रहे हैं. डॉ. दास की पेशेवर उत्कृष्टता और वैश्विक उपलब्धियां उनके प्रेरणादायक व्यक्तिगत जीवन की कहानी और भी अधिक प्रेरक हैं, जिसमें उन्होंने एक सच्चे मिट्टी के सपूत के रूप में अकल्पनीय बाधाओं को पार किया है. बांग्लादेश से आए हिंदू दलित शरणार्थियों के परिवार में जन्मे डॉ. दास को उत्पीड़न से बचने के लिए अपना सब कुछ पीछे छोड़ना पड़ा था. डॉ. दास बंगाल में बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में पले-बढ़े. उनके पिता एक गरीब किसान थे, इसलिए उन्हें छात्र के रूप में स्ट्रीट लाइट के नीचे पढ़ाई करनी पड़ी. पश्चिम बंगाल में दंगों में अपने परिवार के 17 सदस्यों को खोने का भयावह दर्द भी सहा. इन सब के बावजूद राष्ट्र निर्माण के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता अब बंगाल और पूरे देश में अनगिनत लोगों के लिए आशा और प्रेरणा की किरण का काम करेगी.
इनपुट आईएएनएस
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न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें

