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Wheat Production : पिछले दिनों बेमौसम बारिश की वजह से गेहूं का उत्पादन कम होने की आशंका है. खाद्य सचिव ने कहा है कि पहले उत्पादन का अनुमान 12 करोड़ टन लगाया गया था, जो अब 11 टन रह गया है.
गेहूं का उत्पादन इस साल 1 करोड़ टन कम रहने का अनुमान है.
नई दिल्ली. अल नीनो सहित मौसम संबंधी अन्य प्रभावों की वजह से देश में गेहूं का उत्पादन अनुमान से करीब 1 करोड़ टन कम रह सकता है. खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने बताया कि फसल वर्ष 2025-26 के लिए भारत का गेहूं उत्पादन 11 से 12 करोड़ टन के बीच रहने की संभावना है. प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान के कारण यह अनुमान लगाया गया है.
रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने हाल में मौसम से हुए नुकसान को ध्यान में रखते हुए गेहूं उत्पादन का अनुमान 11 करोड़ 6.5 लाख टन लगाया था, जो फसल वर्ष 2024-25 में उत्पादित 10 करोड़ 96.3 लाख टन से थोड़ा ही ज़्यादा है. इसके अलावा कृषि मंत्रालय ने खराब मौसम की मार पड़ने से पहले उत्पादन का अनुमान 12 करोड़ 2.1 लाख टन लगाया था, जो पिछले वर्ष के 11 करोड़ 79.4 लाख टन से अधिक था.
1 करोड़ टन कम हो गया अनुमान
फेडरेशन के एक कार्यक्रम में खाद्य सचिव ने कहा कि जहां फेडरेशन ने गेहूं उत्पादन का अनुमान 11 करोड़ टन लगाया है, वहीं बारिश से पहले कृषि मंत्रालय द्वारा दिया गया आंकड़ा 12 करोड़ टन था. इसका मतलब है कि बेमौसम बारिश से गेहूं के उत्पादन में करीब 1 करोड़ टन की गिरावट आने की आशंका है. सरकार ने इस सत्र में अब तक 1.64 करोड़ टन गेहूं की खरीद की है और अपने खरीद लक्ष्य को पहले के तीन करोड़ टन से बढ़ाकर 3.45 करोड़ टन कर दिया है.
इन राज्यों में बढ़ाया खरीद का लक्ष्य
सरकार ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और उत्तराखंड में खरीद के लक्ष्य बढ़ा दिए गए हैं और उत्तराखंड को छोड़कर बाकी सभी चार राज्यों के लिए खरीद के नियमों में ढील दी है. सरकार ने चरणबद्ध तरीके से 50 लाख टन गेहूं और 10 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति भी दी है. हालांकि, चोपड़ा ने कहा है कि कीमतों में समानता से जुड़ी दिक्कतों के कारण निर्यात की गति धीमी रही है.
खुले बाजार में बेचेगी गेहूं
सचिव ने बताया कि घरेलू बाजार में कीमतें थामने के लिए सरकार अगले दो महीनों के भीतर गेहूं के लिए एक नई ‘खुले बाजार की बिक्री योजना’ नीति जारी करने की योजना बना रही है. उन्होंने मिल मालिकों से कहा कि वे अपनी आपूर्ति के लिए इस योजना पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय गेहूं की खरीद में अधिक सक्रिय भूमिका निभाएं. इस नीति का मकसद आपात स्थिति में घरेलू बाजार में अगर गेहूं की कीमतें बढ़ती हैं तो उसे थामना रहेगा.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें

