नई दिल्ली. खरीफ का सीजन शुरू होने वाला है और किसानों को सस्ते व पर्याप्त फर्टिलाइजर्स की चिंता भी सताने लगी है. ईरान संकट के बीच महंगे हो रहे आयात को देखते हुए आशंका जताई जा रही थी कि इस साल उर्वरक की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है, लेकिन सरकार ने इसका तगड़ा प्लान बना लिया है. सरकार ने गुरुवार को कहा कि देश में उर्वरकों का भंडार चालू खरीफ सीजन की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है. साथ ही सब्सिडी भी पहले लगाए गए अनुमान से कम हो सकती है, क्योंकि ग्लोबल मार्केट में इसकी कीमतों में गिरावट देखी जा रही है.
सरकार ने पहले अनुमान लगाया था कि ग्लोबल मार्केट में उर्वरक की बढ़ती कीमतों के कारण सब्सिडी का आंकड़ा करीब 3.4 लाख करोड़ रुपये पहुंच सकता है. पिछले दिनों आई एक रिपोर्ट में बताया गया था कि अगर सब्सिडी को हटा दिया जाए तो एक बोरी यूरिया की कीमत 4,000 रुपये से भी ज्यादा हो सकती है. जाहिर है कि इस कीमत पर यूरिया खरीदकर खेती करना किसानों के लिए नामुमकिन होगा. इसी तरह, अन्य उर्वरकों की कीमतें भी बिना सब्सिडी के बेकाबू हो सकती हैं. लिहाजा चालू वित्तवर्ष में उर्वरक सब्सिडी का अनुमान बढ़कर 3.40 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया था. सरकार इन पैसों से किसानों पर पड़ने वाले बोझ को खत्म करेगी. हालांकि, अब ग्लोबल मार्केट में उर्वरक की कीमतों में नरमी आई है, जिससे सब्सिडी का आंकड़ा भी आने वाले समय में कम हो सकता है.
देश की उर्वरक सुरक्षा मजबूत
पश्चिम एशिया में हालिया घटनाक्रम पर एक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में रसायन और उर्वरक मंत्रालय की अपर सचिव अपर्णा एस शर्मा ने कहा कि देश में उर्वरकों की स्थिति संतोषजनक है. भारत की उर्वरक सुरक्षा पहले की तरह मजबूत बनी हुई है. जब उनसे पूछा गया कि क्या 2026-27 के लिए 3.4 लाख करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी के अनुमान को वैश्विक कीमतों में गिरावट के कारण कम किया जाएगा, तो उन्होंने कहा कि प्रारंभिक सब्सिडी का अनुमान इस धारणा पर आधारित था कि मौजूदा रुझान जारी रहेगा. लेकिन, हाल ही में सरकार की ओर से हमारे एक उपक्रम द्वारा किए गए टेंडर के परिणामस्वरूप निश्चित रूप से सब्सिडी के आंकड़ों का पुनर्मूल्यांकन करना पड़ेगा और हम इस पर फिर से विचार करेंगे.
कितनी हो गई अब यूरिया की कीमत
अपर सचिव ने यह भी कहा कि पुनर्मूल्यांकन आपूर्तिकर्ताओं द्वारा दी गई मात्रा की पुष्टि और कुल आयात पर निर्भर करेगा. सरकारी कंपनी नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड ने हाल ही में 17 लाख टन यूरिया आयात के लिए टेंडर निकाला था, उसे 60 लाख टन से ज्यादा की बोलियां मिली हैं, जिसमें सबसे कम दर लगभग 445 अमेरिकी डॉलर प्रति टन रही है. इस ताजा टेंडर में जो दरें आई हैं, वे अप्रैल में इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) द्वारा निकाले गए टेंडर की तुलना में 50 फीसदी से भी कम हैं, जिसका कारण ग्लोबल मार्केट में यूरिया कीमतों में आई गिरावट है.
सब्सिडी दोगुनी करने की अपील
इससे पहले सरकारी सूत्रों ने बताया था कि उर्वरक मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय से 2026-27 के लिए बजट में तय 1.71 लाख करोड़ रुपये की तुलना में उर्वरक सब्सिडी को 100 फीसदी यानी करीब दोगुना बढ़ाने का अनुरोध किया है. यूरिया की वैश्विक कीमतों में गिरावट के बारे में शर्मा ने कहा कि नए देश निर्यात के लिए बाजार में आए हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति बढ़ी है. साथ ही भारत की मजबूत स्टॉक पोजिशन और निर्बाध घरेलू उत्पादन भी दरों को प्रभावित करने वाले कारक हो सकते हैं. कीमतों में गिरावट का कारण नए देशों का बड़े पैमाने पर बाजार में आना है. इससे कीमतें काफी नीचे आ गई हैं. हमारे पास पर्याप्त स्टॉक है और हमारा उत्पादन भी लगातार चल रहा है.
देश में कितना यूरिया भंडार और कितनी जरूरत
शर्मा ने कहा कि हम 10 लाख टन या 20 लाख टन और आयात कर सकते हैं. हम अपने स्टॉक पर भी नजर रखेंगे. मानसून के खतरे को देखते हुए, जो भी अनुमान लगाया गया है, वह हमारे आयात को खरीफ सीजन में मार्गदर्शन देगा. खरीफ 2026 के लिए कृषि विभाग ने उर्वरक की जरूरत 383.9 लाख टन आंकी है, जबकि इसके मुकाबले स्टॉक 197.56 लाख टन है. संकट के बाद घरेलू यूरिया उत्पादन 71.41 लाख टन, डीएपी लगभग 10.04 लाख टन, एनपीके कॉम्प्लेक्स 22.96 लाख टन और एसएसपी लगभग 14 लाख टन रहा है. यानी कुल मिलाकर 153.79 लाख टन उर्वरक आयात और घरेलू उत्पादन के जरिए हमारे स्टॉक में जोड़े गए हैं. देश का यूरिया उत्पादन 2014-15 में 225 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 306.67 लाख टन हो गया है.
कितना है उर्वरक का खुदरा मूल्य
देश में फिलहाल नीम कोटेड यूरिया का अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) 242 रुपये प्रति बोरी (45 किलो) है, जबकि डीएपी 1,350 रुपये प्रति बोरी (50 किलो) बिक रहा है. यूरिया, डीएपी, एनपीके और एसएसपी सहित कुल घरेलू उर्वरक उत्पादन 2021 में 433.29 लाख टन से बढ़कर 2025 में रिकॉर्ड 524.62 लाख टन हो गया है. पिछले कैलेंडर वर्ष में देश की कुल उर्वरक जरूरत का लगभग 73 फीसदी घरेलू उत्पादन से पूरा किया गया. इसके अलावा भारत 28 देशों ओमान, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, रूस, फिनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्की और नीदरलैंड से यूरिया खरीदता है, जबकि डीएपी और एनपीके भी रूस, मोरक्को, मिस्र, अमेरिका, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया और सऊदी अरब (रेड सी के जरिए) से खरीदा जाता है.

