Tuesday, April 28, 2026
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पिता की आखिरी सैलरी से ज्यादा तो मेरा TDS कट गया, अमेजन इम्पलॉयी के बयान से छिड़ी बहस


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भारत में हाई इनकम कमाने वाले प्रोफेशनल्स के बीच टैक्स को लेकर असंतोष फिर सामने आया है. अमेजन के एक डिजाइनर की पोस्ट ने यह दिखाया कि ऊंची सैलरी के बावजूद टैक्स कटौती का असर मानसिक और आर्थिक दोनों स्तर पर महसूस हो रहा है. इस घटना ने एक बड़ी बहस को जन्म दिया है जिसमें एक तरफ टैक्स के बदले मिलने वाली सुविधाओं पर सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरी तरफ समाज के संचालन में टैक्स की भूमिका को लेकर भी तर्क दिए जा रहे हैं.

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पोस्ट में कर्मचारी ने कहा कि वह 30 प्रतिशत से ज्यादा टैक्स और सरचार्ज दे रहे हैं. (AI)

नई दिल्ली. भारत में हाई सैलरी पाने वाले प्रोफेशनल्स के बीच टैक्स को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है. इसकी वजह बनी अमेजन में काम करने वाले एक UX UI डिजाइनर की पोस्ट, जिसने अपनी अप्रैल की सैलरी स्लिप देखकर हैरानी और नाराजगी जताई है. यह पोस्ट ग्रेपवाइन पर शेयर की गई, जहां यूजर ने लिखा कि उनकी सैलरी से कटने वाला TDS उनके पिता की रिटायरमेंट से पहले की आखिरी सैलरी से भी ज्यादा है. डिजाइनर ने लिखा कि अप्रैल की पेस्लिप देखने के बाद उनका सिर घूम गया. उन्होंने कहा कि टैक्स डिडक्शन इतना ज्यादा है कि मेहनत से कमाई गई सैलरी का बड़ा हिस्सा गायब होता नजर आता है.

पोस्ट में कर्मचारी ने कहा कि वह 30 प्रतिशत से ज्यादा टैक्स और सरचार्ज दे रहे हैं, लेकिन इसके बदले उन्हें बुनियादी सुविधाएं संतोषजनक नहीं मिलतीं. उन्होंने खराब सड़कों, जलभराव, प्रदूषण और कमजोर पब्लिक हेल्थ सिस्टम पर सवाल उठाए. डिजाइनर ने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा कम होने की वजह से उन्हें प्राइवेट हेल्थ इंश्योरेंस पर भी भारी खर्च करना पड़ता है. ऐसे में उनकी कुल कमाई का बड़ा हिस्सा टैक्स और जरूरी खर्चों में चला जाता है.

टैक्स पर पारदर्शिता की मांग

उन्होंने यह साफ किया कि टैक्स देना गलत नहीं है, लेकिन यह समझ आना जरूरी है कि सरकार उस पैसे का इस्तेमाल कैसे कर रही है. मौजूदा स्थिति को उन्होंने बेहद निराशाजनक बताया. इस पोस्ट के बाद टेक सेक्टर में अलग अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं. फ्लिपकार्ट के एक इंजीनियर ने कहा कि टैक्स से ही समाज की बुनियादी व्यवस्था चलती है, जिसमें कोर्ट, पुलिस और कानून व्यवस्था शामिल है.

व्यावहारिक नजरिया भी सामने आया

कुछ यूजर्स ने इसे एक तय वास्तविकता मानने की सलाह दी. उनका कहना था कि 30 प्रतिशत टैक्स को मानसिक रूप से स्वीकार करना ही बेहतर है, क्योंकि इस पर व्यक्तिगत नियंत्रण सीमित होता है. कई यूजर्स ने भारत के टैक्स सिस्टम की तुलना अमेरिका से की. सिस्को के एक इंजीनियर ने कहा कि वहां टैक्स के उपयोग को लेकर ज्यादा सार्वजनिक जवाबदेही देखने को मिलती है. कुल मिलाकर यह मामला केवल एक कर्मचारी की नाराजगी नहीं है, बल्कि यह उस बड़े वर्ग की सोच को सामने लाता है जो हाई इनकम के साथ हाई टैक्स का बोझ उठा रहा है. यह बहस आने वाले समय में और तेज हो सकती है कि टैक्स और उसके बदले मिलने वाली सुविधाओं के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए.

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जय ठाकुरSenior-Sub Editor

मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो, देश की इकोनॉमी क…और पढ़ें



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