Last Updated:
आज ऋषि कपूर की छठी पुण्यतिथि है. 30 अप्रैल 2020 को ल्यूकेमिया से जूझते हुए इस दिग्गज एक्टर ने दुनिया को अलविदा कह दिया था. उस वक्त उनकी उम्र महज 67 साल थी. आज वो इस संसार में तो नहीं है लेकिन उनकी यादें आज भी बॉलीवुड को रोशन करती हैं. 1973 में ‘बॉबी’ से शुरू हुई उनकी यात्रा ‘अग्निपथ’, ‘कपूर एंड संस’, ‘मुल्क’ जैसे फिल्मों तक पहुंची, जहां उन्होंने रोमांटिक हीरो से कैरेक्टर आर्टिस्ट तक का सफर तय किया. लेकिन क्या आप उनके जीवन का वो किस्सा जानते हैं, जब वह पूरी तरह टूट गए थे और बेटे की हालत देख खुद राज कपूर भी घबराने लगे थे.
नई दिल्ली. एक दौर था जब ऋषि कपूर रोमांटिक हीरो के तौर पर बॉलीवुड पर राज कर रहे थे, लेकिन एक बॉक्स ऑफिस क्लैश ने उनका आत्मविश्वास बुरी तरह तोड़ दिया था. साल 1980 में रिलीज हुई ‘कर्ज’से उन्हें बड़ी उम्मीदें थीं, मगर उसी समय आई कुर्बानी ने सफलता की ऐसी आंधी चलाई कि ‘कर्ज’ पीछे छूट गई. फिल्म की नाकामी का असर ऋषि कपूर पर इतना गहरा पड़ा कि वह डिप्रेशन में चले गए थे. उन्होंने खुद माना था कि उस दौर में उनका आत्मविश्वास चकनाचूर हो गया था.

ऋषि कपूर न सिर्फ बेहतरीन एक्टर थे, बल्कि एक संवेदनशील इंसान भी. उनकी आत्मकथा ‘खुल्लम खुल्ला’ में उन्होंने अपने करियर के सबसे मुश्किल दौर का खुलासा किया है. 1980 में रिलीज हुई उनकी फिल्म ‘कर्ज’ (निर्देशक सुभाष घई) को उन्होंने बहुत उम्मीदें लगाई थीं. फिल्म में ऋषि कपूर, टीना मुनीम और सिमी गरेवाल मुख्य भूमिकाओं में थे. ‘ओम शांति ओम’ गाना आज भी सुपरहिट है और फिल्म बाद में कल्ट क्लासिक बन गई, लेकिन रिलीज के समय इसका मुकाबला फिरोज खान की ब्लॉकबस्टर ‘कर्बानी’ से पड़ा. ‘कर्बानी’ ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया और ‘कर्ज’ पीछे छूट गई.

अपनी बायोग्राफी खुल्लम-खुल्ला में ऋषि कपूर ने खुलासा किया था कि फिल्म ‘कर्ज’ की असफलता और उसी समय ‘कर्बानी’ की बड़ी सफलता ने उन्हें गहरे डिप्रेशन में धकेल दिया था. उन्होंने माना था कि इस असफलता ने उनका आत्मविश्वास बुरी तरह हिला दिया था. उन्होंने बायोग्राफी में लिखा है कि वह इतने तनाव में रहने लगे थे कि शूटिंग के दौरान कई बार घबराहट महसूस होती थी और हालत ऐसी हो जाती थी कि सेट पर बेहोश तक हो जाते थे.
Add News18 as
Preferred Source on Google

सुभाष घई ने भी इस बात का जिक्र किया है कि ‘कर्ज’ की नाकामी के बाद ऋषि इतने टूट गए थे कि उन्हें अस्पताल तक ले जाना पड़ा. बेटे की हालत देख राज कपूर भी घबरा गए थे. उन्होंने सुभाष घई से कहा था, ‘दोस्त को समझाओ, ये पागल हो गया है.’ ऋषि खुद मानते थे कि यह दौर उनके करियर का सबसे खराब समय था. परिवार और दोस्तों का साथ उन्हें इस दौर से उबरने में मदद मिली. दिलचस्प बात यह है कि आज ‘कर्ज’ को क्लासिक माना जाता है, लेकिन उस समय की असफलता ने ऋषि कपूर को महीनों तक प्रभावित किया.

खुद कभी फिल्म की असफलता से प्रभावित हुए ऋषि कपूर ने शाहरुख खान की जिंदगी में एक यादगार पल भी लिखा. शाहरुख का डेब्यू फिल्म ‘दीवाना’ (1992) थी, जिसमें वे ऋषि कपूर के साथ स्क्रीन शेयर कर रहे थे. शाहरुख उस समय अनसिक्योर थे . उन्हें लुक और टैलेंट को लेकर डाउट था. पहले दिन शूटिंग के बाद भी ऋषि कपूर सेट पर रुके रहे. उन्होंने शाहरुख के शॉट को देखा और मुस्कुराते हुए कहा, ‘यार तुझमें एनर्जी बहुत है.’

शाहरुख ने बाद में कई इंटरव्यू में इस बात का जिक्र किया है. उन्होंने बताया था कि उस दिन मेरे दिमाग में मैं एक्टर बन सकता हूं. ऋषि कपूर को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि उनका एक छोटा सा कमेंट शाहरुख के लिए कितना बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. ऋषि के जाने से पहले शाहरुख उनसे मिले और शुक्रिया अदा करना चाहते थे, लेकिन ऋषि साहब को अपनी इस छोटी सी मदद का पता नहीं था.

सालों बाद जब शाहरुख ने ऋषि कपूर को बताया कि उस एक वाक्य ने कितना सशक्त किया तो दिग्गज एक्टर ने अनजान बने रहते हुए पूछा, ‘क्या वाकई?’ उनके जाने के बाद शाहरुख खान ने अपनी श्रद्धांजलि में कहा था, ‘हर बार मिलने पर मेरे सिर पर उनकी हल्की थपकी… मैं इसे हमेशा ‘आशीर्वाद’ के रूप में हमेशा अपने दिल में रखूंगा.’

