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भारतीय सेना की इस ट्रेनिंग का मकसद मुश्किल ऑपरेशनल हालात के दौरान सैनिकों के बीच तेज़ी से हेलीकॉप्टर से उतरने की क्षमता, ऑपरेशनल तालमेल, युद्ध की तैयारी और आपसी सहयोग को बढ़ाना था.
भारतीय सेना की रेड शील्ड डिवीजन ने एक बार फिर दिखा दिया कि आधुनिक युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि इंसानों और प्रशिक्षित युद्धक कुत्तों की घातक टीमवर्क से भी लड़ा जाता है. 8 मई 2026 को Leimakhong Military Station में आयोजित हाई-रिस्क स्लिथरिंग एक्सरसाइज ने सेना की तेजी, तैयारी और आक्रामक ऑपरेशनल क्षमता का दम दुनिया को दिखाया.

इस बेहद कठिन सैन्य अभ्यास में पांच K9 डॉग टीमों ने हिस्सा लिया. हेलिकॉप्टर से रस्सियों के जरिए तेज़ी से नीचे उतरने वाली इस स्पेशल ट्रेनिंग का मकसद आतंकवाद-रोधी अभियानों, जंगल युद्ध और आपदा जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सेना की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को और घातक बनाना था. अभ्यास के दौरान जवानों और प्रशिक्षित सैन्य कुत्तों के बीच जबरदस्त तालमेल देखने को मिला.

स्लिथरिंग एक्सरसाइज के दौरान K9 वॉरियर्स ने जिस आत्मविश्वास और आक्रामकता का प्रदर्शन किया, उसने साफ कर दिया कि भारतीय सेना अब हर तरह के आधुनिक ऑपरेशन के लिए पूरी तरह तैयार है. ऊंचाई से हेलिबोर्न इन्सर्शन, दुर्गम इलाकों में तेज़ तैनाती और आतंकियों की तलाश जैसे मिशनों में ये डॉग स्क्वॉड सेना की सबसे खामोश लेकिन सबसे घातक ताकत बन चुके हैं.
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सेना के मुताबिक, यह अभ्यास सिर्फ ट्रेनिंग नहीं था, बल्कि वास्तविक युद्ध परिस्थितियों का सिमुलेशन था. इसमें सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन, आतंकियों का सफाया और आपदा प्रबंधन जैसे कई अहम पहलुओं पर फोकस किया गया. मणिपुर जैसे संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण इलाके में इस तरह का अभ्यास सुरक्षा रणनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

रेड शील्ड डिवीजन की यह एक्सरसाइज एक बड़ा संदेश भी देती है कि भारतीय सेना सिर्फ सीमाओं की रक्षा नहीं कर रही, बल्कि हर मोर्चे पर हाई-टेक, हाई-स्पीड और हाई-इम्पैक्ट ऑपरेशन के लिए खुद को लगातार अपग्रेड कर रही है. और इस मिशन में सेना के K9 वॉरियर्स अब सिर्फ साथी नहीं, बल्कि युद्ध के फ्रंटलाइन कमांडो बन चुके हैं.

