Saturday, May 9, 2026
Homeराज्यराजस्तान83 लाख बीमा क्लेम के लिए शव पर लगाया करंट: बीमार...

83 लाख बीमा क्लेम के लिए शव पर लगाया करंट: बीमार और शराब के आदी लोगों को बनाता था निशाना, डॉक्टरी जांच में पता चला फर्जीवाड़ा – Bhilwara News




भीलवाड़ा जिले के मांडल क्षेत्र में फर्जी बीमा क्लेम से जुड़े एक बड़े और संगठित खेल का खुलासा हुआ है।प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गुजरात के अहमदाबाद जिले के नरोदा गांव से एक युवक को गिरोह के लोग मालोला गांव लेकर पहुंचे थे। यहां उसकी मौत होने के बाद शव पर करंट लगाया गया, ताकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण करंट लगना दर्शाया जा सके और हादसे के नाम पर लाखों रुपए का बीमा क्लेम उठाया जा सके। मृतक के नाम 83 लाख का बीमा मृतक की पहचान अहमदाबाद निवासी दीपक भाई पुत्र मालजी भाई गोयल (36) के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि दीपक के नाम करीब 83 लाख रुपए के चार अलग-अलग बीमे थे। मामले में नया मोड़ तब आया जब मृतक के 12 वर्षीय पुत्र ने दावा किया कि उनके गांव में इस गिरोह ने करीब 71 लोगों के इसी तरह बीमे कर रखे हैं। मौत के बाद शरीर पर लगाया करंट जानकारी के मुताबिक दीपक गंभीर रूप से बीमार था और उसे मौत से एक दिन पहले ही गुजरात से मालोला गांव में परिचित डालू गाडरी के घर लाया गया था। रात में उसकी हालत बिगड़ी और कुछ देर बाद उसकी मौत भी वही हो गई। इसके बाद गिरोह के लोगों ने उसके शरीर पर करंट लगाया जिससे यह प्रमाणित हो पाए कि उसकी मृत्यु करंट से हुई हो। उसके बाद उसे मांडल उपजिला चिकित्सालय लाया गया, जहां ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर रोहित सहरावत को मामला संदिग्ध लगा।डॉक्टर को युवक की हालत और घटनाक्रम में कई विरोधाभास नजर आए, जिसके बाद उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचना दी। इसके बाद मांडल थाना प्रभारी प्रोबेशनर आईपीएस आयुष क्षोत्रिय सहित पुलिस मौके पर पहुंची और शुरुआती पूछताछ के बाद पूरे मामले की जांच शुरू की गई। इधर पुलिस को देख मृतक दीपक को लाने वाले लोग कार से फरार हो गए, मृतक की मां और बेटे से मिली जानकारी और नंबर के बाद गंगरार टोल नाके पर कार रुकवाकर तीन से चार लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। मौत के करीब लोगों को बनाता था गिरोह शिकार पुलिस सूत्रों के अनुसार गिरोह विशेष रूप से ऐसे लोगों को निशाना बनाता था जो आदतन शराबी हों, गंभीर बीमारी से ग्रसित हों या आर्थिक रूप से कमजोर हों।शुरुआत में उन्हें हर माह तीन हजार रुपए देने और आर्थिक सहायता का लालच देकर बीमा करवाया जाता था। बाद में नकद राशि देने की बजाय उन्हें शराब उपलब्ध कराई जाती थी। लगातार नशे के कारण उनकी हालत और खराब होती जाती थी। जब डॉक्टर यह कह देते कि व्यक्ति ज्यादा दिनों तक जीवित नहीं रहेगा, तब गिरोह सक्रिय हो जाता था। इसके बाद संबंधित व्यक्ति को उसके परिजनों सहित राजस्थान या अन्य क्षेत्रों में किसी किसान के यहां रखवाली या मजदूरी के नाम पर भेजा जाता था। मौत के बाद शव पर लगाया जाता था करंट जांच में सामने आया है कि मौत होने के बाद शव पर करंट लगाया जाता था ताकि पोस्टमार्टम में करंट के निशान सामने आएं और मौत को हादसा साबित किया जा सके। इसके बाद परिजनों को भी बयान देने के लिए तैयार किया जाता था, ताकि बीमा क्लेम में कोई परेशानी नहीं आए। बीमा एजेंट और सर्वेयर की भूमिका भी जांच के दायरे में इस पूरे नेटवर्क में अलग-अलग स्तर पर सांठगांठ कर बीमा की मोटी रकम का बंदरबांट किया जाता था।बीमा एजेंट और सर्वेयर की भूमिका भी जांच के दायरे में पुलिस अब मेडिकल रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, बीमा दस्तावेज, कॉल डिटेल और मृतक की गतिविधियों की गहन जांच कर रही है। आशंका जताई जा रही है कि इस नेटवर्क में बीमा एजेंट, सर्वेयर और अन्य लोगों की भी मिलीभगत हो सकती है। एसपी धर्मेंद्र सिंह यादव ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच और शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। शव ले जाने के लिए नहीं थे पैसे, विधायक की मदद से पहुंची एंबुलेंस मामले का सबसे भावुक पक्ष तब सामने आया जब मृतक के 12 वर्षीय पुत्र और बुजुर्ग मां के पास शव को गुजरात ले जाने तक के पैसे नहीं थे। जानकारी मिलने पर स्थानीय लोगों ने क्षेत्रीय विधायक उदय लाल भडाणा को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। इसके बाद विधायक की ओर से 16 हजार रुपए की आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई गई, जिससे एंबुलेंस की व्यवस्था हो सकी। बाद में एंबुलेंस के जरिए शव को अहमदाबाद भेजा गया।मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार मृतक के बेटे और वृद्ध दादी की हालत बेहद दयनीय थी। यह देखकर वहां मौजूद कुछ पत्रकारों और पुलिसकर्मियों ने भी स्वेच्छा से रुपए एकत्रित कर परिवार को खर्चे के लिए सहायता दी। पत्नी की मौत के बाद शराब की लत में डूबा मृतक चार साल पहले पत्नी की मौत के बाद शराब की लत में डूबा दीपक
मृतक दीपक भाई की पारिवारिक स्थिति भी बेहद दर्दनाक बताई जा रही है। करीब चार वर्ष पूर्व उसकी पत्नी सुमन की मौत हो गई थी। पत्नी की मौत के बाद दीपक मानसिक रूप से टूट गया और धीरे-धीरे शराब के नशे का आदी हो गया। आर्थिक तंगी से गिरोह के चंगुल में फंसे परिवार में उसके दो पुत्र हैं—12 वर्षीय देवांशू और 9 वर्षीय साहिल। वृद्ध मां चंपा बेन भी उसी पर निर्भर थीं।सूत्रों के अनुसार आर्थिक तंगी, पारिवारिक टूटन और शराब की लत के कारण दीपक को इस गिरोह ने आसानी से अपने जाल में फंसा लिया। पुलिस अब इस एंगल से भी जांच कर रही है कि गिरोह ने अब तक कितने जरूरतमंद और बीमार लोगों को इसी तरह निशाना बनाया है।



Source link

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments