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चित्रकूट जिले के लोहदा गांव निवासी आशीष सिंह रघुवंशी आज क्षेत्र में गरीब बेटियों के मसीहा के रूप में पहचाने जाते हैं. वे अब तक 17 जरूरतमंद लड़कियों की शादी करवा चुके हैं और उनका पूरा खर्च खुद उठाते हैं.उनका मानना है जब तक उनके अंदर जान है वह यह सेवा करते रहेंगे. उनकी इस सेवा की शुरुआत एक भावुक घटना से हुई थी. वर्ष 2005 में उनका काम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहाड़ी में चल रहा था. वहां कई मजदूर और मिस्त्री काम कर रहे थे, उन्हीं में एक गरीब लड़की भी मजदूरी करने आती थी.
चित्रकूटः समाज सेवा के कई रूप आपने देखे और सुने होंगे. कोई गरीबों को भोजन कराता है तो कोई शिक्षा और इलाज में मदद करता है, लेकिन बुंदेलखंड के चित्रकूट में एक ऐसा समाजसेवी भी है, जिसने गरीब और बेसहारा बेटियों की जिंदगी संवारने का बीड़ा उठाया है. चित्रकूट जिले के लोहदा गांव निवासी आशीष सिंह रघुवंशी आज क्षेत्र में गरीब बेटियों के मसीहा के रूप में पहचाने जाते हैं. वे अब तक 17 जरूरतमंद लड़कियों की शादी करवा चुके हैं और उनका पूरा खर्च खुद उठाते हैं.
2005 की घटना ने आशीष को किया था भावुक
आशीष सिंह रघुवंशी ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि उनकी इस सेवा की शुरुआत एक भावुक घटना से हुई थी. वर्ष 2005 में उनका काम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहाड़ी में चल रहा था. वहां कई मजदूर और मिस्त्री काम कर रहे थे, उन्हीं में एक गरीब लड़की भी मजदूरी करने आती थी. एक दिन काम के दौरान अचानक उसकी तबीयत खराब हो गई और उसे चक्कर आने लगे. जब मैने उससे उसके परिवार के बारे में पूछा तो लड़की ने बताया कि उसके माता-पिता नहीं हैं और उसका भाई भी बीमार रहता है. घर की जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी और मजदूरी करके वह अपने भाई की दवा और परिवार का खर्च चलाती है.
लड़की की बातें सुन आशीष हुए थे भावुक
उनका कहना है कि लड़की की यह कहानी सुनकर मैं एक दम भावुक हो गया था और उस परिवार की मदद करने का फैसला किया. इसके बाद मैने लड़की के भाई और भाभी से बातचीत की और वर्ष 2006 में उस लड़की की शादी करवाई थी. शादी का पूरा खर्च मैने खुद उठाया था. यही घटना मेरे जीवन का टर्निंग प्वाइंट बन गई है. उन्होंने आगे की जानकारी में बताया कि उस लड़की की शादी करवाने के बाद से मैने मन में ठान लिया था कि वे गरीब और बेसहारा बेटियों की शादी में सहयोग करेंगे. ोतब से लेकर अब तक यानी 2006 से 2026 के बीच वे 17 लड़कियों का कन्यादान कर चुके हैं.खास बात यह है कि शादी में लगने वाला हर खर्च, जैसे कपड़े, जेवर, भोजन और दहेज का सामान तक, उनकी ओर से उपलब्ध कराया जाता है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

