Last Updated:
Bullion Bank : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 दिन पहले देशवासियों से अपील की थी कि देशहित में सालभर सोने की खरीद कम कर दें. इसके बाद से ही देश में एक्सपर्ट और आम आदमी सभी अपनी-अपनी तरह से कयास लगा रहे हैं. ज्वैलरी के बिजनेस से जुड़े कारोबारियों ने भी पीएम और सरकार से ऐसा कोई कदम न उठाने की अपील की है. हालांकि, पीएम मोदी की अपील के 24 घंटे के भीतर आम आदमी की राहत के लिए बुलियन बैंक लॉन्च कर दिया गया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोने को लेकर एक अहम घोषणा की है. इसके बाद पूरा देश सोने पर चर्चा कर रहा है, जबकि ज्वैलर्स एसोसिएशन ने हाल ही में इस मुद्दे पर सरकार को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव दिया है. उन्होंने कहा है कि सोने की खरीद को टालना समस्या का समाधान नहीं है. ऐसा करने से 35 लाख लोगों की नौकरियां खतरे में पड़ जाएंगी. ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड ज्वैलर्स फेडरेशन (एआईजेजीएफ) ने केंद्र सरकार को यह स्पष्ट कर दिया है कि विदेशी मुद्रा बचाने का सही तरीका घरेलू सोने को जुटाना और उसका दोबारा इस्तेमाल करना है.

इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन में गंभीर समस्या आ गई है. इस संदर्भ में पीएम मोदी ने रविवार को आम नागरिकों से देश के विदेशी मुद्रा भंडार को संरक्षित रखने के लिए कुछ समय के लिए सोने की खरीदारी स्थगित करने की अपील की है. इसके बाद आभूषण उद्योग ने इस अपील पर गंभीर चिंता जताई है.

प्रधानमंत्री की टिप्पणियों के मद्देनजर, एआईजेजीएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोरा ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखा. उन्होंने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट और आयात बिलों में वृद्धि को लेकर सरकार की चिंता को वे समझ सकते हैं. हालांकि, उन्होंने चिंता जताई कि वैकल्पिक रचनात्मक उपाय दिखाए बिना खरीद रोकने का आह्वान करने से आभूषण उद्योग नष्ट हो जाएगा.
Add News18 as
Preferred Source on Google

पंकज अरोरा ने स्पष्ट किया कि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार की रक्षा करने का सरकार का इरादा समझ में आता है, लेकिन मांग को नष्ट करना इसका समाधान नहीं होना चाहिए. एकमात्र समाधान घरेलू स्तर पर यानी लोगों के घरों में निष्क्रिय पड़े सोने को जुटाना, उसका पुनर्चक्रण करना और उसे उत्पादक प्रचलन में वापस लाना है.

ज्वैलर्स संघ ने चेतावनी दी कि यदि जनता की खरीदारी का रुझान अचानक नकारात्मक हो जाता है, तो उद्योग को अपूरणीय क्षति होगी. उसने स्पष्ट किया कि शोरूमों में आने वाले ग्राहकों की संख्या घट जाएगी और उत्पादन के ऑर्डर रुक जाएंगे. इससे छोटे व्यापारियों और कारीगरों की कमाई पर भारी बोझ पड़ेगा, जो सप्लाई चेन में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

ज्वैलर्स एसोसिएशन का कहना है कि यह सिर्फ सोने के कारोबार से जुड़ी समस्या नहीं है. यह करोड़ों लोगों की आजीविका से जुड़ा मुद्दा है. उन्होंने केंद्र सरकार को वास्तविक स्थिति समझाने की कोशिश की और उन श्रमिकों का पक्ष लिया जो कारोबार ठप होने पर बेघर हो जाएंगे. इसका सबसे ज्यादा असर छोटे कारोबारियों पर पड़ेगा, क्योंकि उनका पूरा बाजार ही शादी-विवाह और त्योहारों जैसे महत्वपूर्ण समय पर निर्भर करता है.

इस अवसर पर संस्था ने भारतीय परिवारों में सोने के विशेष महत्व को भी याद दिलाया. उन्होंने कहा कि हमारे देश में सोना केवल विलासिता की वस्तु नहीं है, बल्कि यह विवाह संस्कृति का अभिन्न अंग है. यह ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के लिए आर्थिक गारंटी का काम करता है. अरोरा ने अपने पत्र में लिखा कि लाखों भारतीय परिवारों के लिए आभूषण कोई सट्टा निवेश नहीं, बल्कि पहनने के रूप में बचत है.

फेडरेशन ने गोल्ड की खरीद रोकने के बजाय सरकार को कुछ महत्वपूर्ण प्रस्ताव दिए हैं. इसने घरेलू सोने के संचय और कर्ज देने के लिए एक विशेष ‘बुलियन बैंक’ स्थापित करने का सुझाव दिया है. फेडरेशन ने कहा कि इसे GIFT-IFSC या इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज के तत्वावधान में स्थापित करने से अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे.

इसमें गोल्ड ईटीएफ को अपने भौतिक सोने के भंडार का 20-30 फीसदी बुलियन बैंकों के माध्यम से उधार देने की अनुमति देने का प्रस्ताव है. साथ ही, साल 2015 में शुरू की गई स्वर्ण मुद्रीकरण योजना में पूर्ण बदलाव का सुझाव दिया है. इसमें कर्ज के लिए गारंटी पेपर के रूप में गोल्ड प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने और सिस्टम के भीतर सोने के ट्रांसफर को टैक्स व जीएसटी से मुक्त करने जैसे बदलाव शामिल हैं.

भारत उन देशों में से एक है जिनके पास निजी हाथों में सोने का सबसे बड़ा भंडार है. फेडरेशन का अनुमान है कि अगर बुलियन बैंक प्रणाली को ठीक से लागू किया जाए, तो इससे सोने के आयात में सालाना 200-300 टन की कमी आ सकती है. एआईजेजीएफ ने कहा कि आभूषणों की मांग को दबाने से रोजगार पर असर पड़ेगा, लेकिन घरेलू सोने को जुटाकर रोजगार के अवसरों को नष्ट किए बिना विदेशी मुद्रा की बचत की जा सकती है. इस मुद्दे पर सरकार को तत्काल मंत्री स्तरीय बैठक करनी चाहिए.

