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Arvind Kejriwal News: दिल्ली शराब नीति से जुड़े अरविंद केजरीवाल समेत 22 आरोपियों को अरोपमुक्त करने के मामले में गुरुवार को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत फैसला देगी. यह फैसला कोर्ट में न्यायमित्र की नियुक्ति को लेकर होगा. इस मामले की सुनवाई के दौरान जब कोर्ट के सामने कुछ तथ्य आए तो जस्टिस शर्मा ने कहा कि मैं चुप नहीं रह सकती हूं… ये कहने के पीछे की क्या वजह है जानने के लिए पढ़ें पूरी रिपोर्ट
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा न्यायमित्र नियुक्त करने पर गुरुवार को देंगी फैसला
नई दिल्ली. दिल्ली की नई शराब नीति से जुड़े सीबीआई के मामले में गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई. यह मामला उस ट्रायल कोर्ट के आदेश से जुड़ा है, जिसमें मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत 23 लोगों को आरोपमुक्त कर दिया गया था. सीबीआई ने इसी आदेश को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.
सीबीआई की अपील पर दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच में सुनवाई शुरू हुई. सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ किया कि यह मामला सिर्फ कानूनी बहस तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि अदालत और न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा से भी जुड़ गया है.
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने क्या कहा?
सुनवाई के बीच जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि मैं चुप नहीं रह सकती… उन्होंने कोर्ट में बताया कि आज उन्हें एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) के नामों की घोषणा करनी थी. उन्होंने कहा कि उन्होंने इस संबंध में प्रयास किए और कुछ वरिष्ठ वकील एमिकस बनने के लिए सहमत भी हो गए हैं.
यह मामला साधारण आपराधिक अपील का नहीं रहा: जस्टिस स्वर्णकांता
लेकिन इसी बीच उन्हें जानकारी मिली कि कुछ प्रतिवादियों द्वारा उनके खिलाफ अत्यंत मानहानिकारक कंटेंट सोशल मीडिया या अन्य प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किया गया है. जस्टिस शर्मा ने कहा कि यह मामला अब सिर्फ एक साधारण आपराधिक अपील का नहीं रहा, बल्कि न्यायालय की अवमानना से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन गया है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह इस तरह की मानहानिकारक सामग्री पर चुप नहीं रह सकतीं.
जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने कहा कि उन्होंने कुछ प्रतिवादियों और अवमानना करने वालों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने का निर्णय लिया है. अदालत ने संकेत दिया कि न्यायपालिका के खिलाफ की गई ऐसी टिप्पणियां और पोस्ट न केवल अदालत की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश भी हो सकती हैं.

