नई दिल्ली. टीवी, स्मार्टफोन या नया लैपटॉप खरीदते समय ‘आसान मासिक किस्त’ वाला ऑफर लोगों को तुरंत आकर्षित कर लेता है. छोटी-छोटी EMI देखकर महंगा सामान भी बजट में लगता है, लेकिन कई बार यही सुविधा बाद में जेब पर भारी पड़ सकती है. ‘नो-कॉस्ट’ या ‘लो-कॉस्ट’ EMI के नाम पर ग्राहक डिस्काउंट, कैशबैक और दूसरे फायदे गंवा देते हैं. इतना ही नहीं, कई EMI एक साथ चलने पर हर महीने का बजट भी बिगड़ सकता है.
सच तो यह है कि ‘लो-कॉस्ट EMI’ के चक्कर में कई बार आपकी जेब से ज्यादा पैसे कट जाते हैं. किसी भी लो-कॉस्ट EMI ऑफर को चुनने से पहले उसकी असली कीमत समझना बेहद जरूरी है.
1. छिपा हुआ ब्याज
कंपनियां कहती हैं कि वे आपसे कोई ब्याज नहीं ले रहीं, लेकिन असल में वो ब्याज के पैसे को प्रोडक्ट की कीमत में ही जोड़ देती हैं। या फिर, अगर आप एक बार में पूरा कैश देकर सामान खरीदते, तो आपको जो डिस्काउंट या कैशबैक मिलता, वो EMI चुनने पर नहीं मिलता यानी डिस्काउंट न मिलना भी एक तरह का नुकसान ही है.
2. प्रोसेसिंग फीस का चक्कर
भले ही ब्याज जीरो हो, लेकिन बैंक या कंपनियां आपसे ‘प्रोसेसिंग फीस’ और उस पर GST वसूल लेती हैं. दिखने में ये 199 रुपये या 299 रुपये जैसी छोटी रकम होती है, लेकिन बार-बार EMI पर सामान लेने से ये छोटे-छोटे खर्चे मिलकर बड़ा झटका देते हैं.
3. जरूरत से ज्यादा खर्च करने की आदत
जब 60,000 रुपये का फोन सिर्फ 3,000 रुपये महीने में मिलने लगता है, तो इंसान का दिमाग सोचता है कि ‘इतना तो मैं हर महीने दे ही सकता हूं’. इस चक्कर में हम वो चीजें भी खरीद लेते हैं जिनकी हमें सच में जरूरत नहीं होती.
4. एक के बाद एक EMI का बोझ
एक फोन की EMI, एक लैपटॉप की EMI, फिर एक टीवी की EMI धीरे-धीरे ये सब मिलकर आपकी सैलरी का एक बड़ा हिस्सा निगल जाती हैं. इससे आपके पास इमरजेंसी के लिए पैसे नहीं बचते.
5. लोन मिलने में दिक्कत
अगर आपके नाम पर बहुत सारी छोटी-छोटी EMI चल रही हैं, तो बैंकों को लगता है कि आप बहुत ज्यादा कर्ज लेते हैं. इसका असर आपके क्रेडिट स्कोर पर पड़ता है और भविष्य में घर या गाड़ी के लिए बड़ा लोन मिलने में मुश्किल हो सकती है.
तो क्या EMI पर सामान नहीं खरीदना चाहिए?
ऐसा नहीं है. अगर आपको लैपटॉप या फ्रिज जैसे किसी बहुत जरूरी सामान की तुरंत जरूरत है और आपके पास एक बार में देने के लिए पैसे नहीं हैं, तो EMI एक अच्छा जरिया है. बस खरीदने से पहले खुद से एक सवाल पूछिए कि अगर मुझे आज ही इसके पूरे पैसे कैश देने पड़ें तो क्या मैं इसे खरीदूंगा? अगर जवाब ‘ना’ है, तो समझ जाइए कि आप EMI के जाल में फंस रहे हैं.

